वैक्सीन लगाने के बाद कोरोना पॉजिटिव हुए लोगों में मिला सुपर इम्युनिटी, 2000% एंटीबॉडी देख वैज्ञानिक हैरान
कोविड वैक्सीन लेने के बाद जो भी लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं, उनके अंदर वैज्ञानिकों को सुपर इम्युनिटी मिला है, जो ओमिक्रॉन के खिलाफ बड़ी खुशखबरी है।
वॉशिंगटन, दिसंबर 20: कोरोना वायरस वैक्सीन लगाने के बाद भी जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण के शिकार हुए हैं, उनके लिए बड़ी खुशखबरी है। एक नई स्टडी में पाया गया है कि, ऐसे लोग, जो वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं, उनके शरीर के अंदर 'सुपर इम्युनिटी' मिला है। यानि, वैक्सीन लगवाने के बाद भी पॉजिटिव होने वाले लोगों के अंदर सुपर इम्युनिटी मिल रहा है, जो बहुत बड़ी खुशखबरी है।

मरीजों में मिला सुपर इम्युनिटी
अमेरिका के ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में एक छोटे से ग्रुप में ये स्टडी की गई है और रिजल्ट को देखकर वैज्ञानिक हैरान रह गये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 26 लोगों पर ये टेस्ट किया गया है और स्टडी के दौरान पता चला कि, वैक्सीन लेने के बाद भी जो लोग पॉजिटिव हुए हैं, उनके अंदर 2000 प्रतिशत से ज्यादा एंटीबॉडी बढ़ गई है। जिन लोगों पर ये टेस्ट किया गया है, उन्हें वैक्सीन लेने से पहले कभी कोरोना वायरस संक्रमण नहीं हुआ था और वैक्सीन लेने के बाद वो संक्रमित हुए थे और टेस्ट में पता चला कि, ऐसे में लोगों में एंटीबॉडी की मात्रा एक हजार से 2 हजार प्रतिशत तक बढ़ गई है।

शरीर में प्रचूर मात्रा में एंटीबॉडी
ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के प्रोफेसर और इस स्टडी को करने वाले फिकाडु ताफेसे ने कहा कि, 'स्टडी में हमने देखा है कि इन लोगों में एंटीबॉडी का स्तर पर्याप्त मात्रा में बढ़ गया है और इसका प्रतिशत एक हजार से 2 हजार के बीच है। और हमने स्टडी में पाया है कि, एंटीबॉडी की ये मात्रा काफी ज्यादा है''। प्रोफेसर फिकाडु ताफेसे ने एंटीबॉडी की इस मात्रा को "सुपर इम्युनिटी" कहा है। प्रोफेसर फिकाडु ताफेसे ने डेली मेल से बात करते हुए कहा कि, 'यह करीब एक सुपर इम्युनिटी है'। अमेरिकी वैज्ञानिक का ये रिसर्च ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब पूरी दुनिया में ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से फैल रहा है और ओमिक्रॉन के खिलाफ ज्यादातर वैक्सीन घुटने टेक रहे हैं।

ओमिक्रॉन वेरिएंट और सुपर इम्युनिटी
इस वक्त जब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल चुका है और अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में काफी ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, उस वक्त ये रिसर्च काफी ज्यादा फायदा देने वाला है। क्योंकि, ओमिक्रॉन वेरिएंट की चपेट में ऐसे भी लोग आ रहे हैं, जिन्होंने वैक्सीन की दोनों खुराक ले रखी है। इस बीच, कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक स्टडी में पाया है कि, फाइजर या मॉडर्न का बूस्टर शॉट लेने वाले रोगियों में मूल वायरस की तुलना में ओमिक्रॉन रोकने के लिए 6.5 गुना कम एंटीबॉडी थे, जिसका मतलब ये हुआ कि अकले बूस्टर शॉट भी ओमिक्रॉन को रोकने में काबिल नहीं हैं।

वैक्सीन ही बचाएगी जान
प्रोफेसर फिकाडु ताफेसे ने यूएसए टुडे से बात करते हुए कहा कि, "स्टडी में सबसे खास बात यही निकलकर सामने आई है कि, वैक्सीन ही आपकी जिंदगी बचा सकती है और कोरोना वायरस के खिलाफ मेक्सिमम सुरक्षा दे सकती है''। उन्होंने अमेरिकी लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 'इसका मतलब ये नहीं, कि वैक्सीन ले चुका कोई शख्स जान बूझकर कोरोना संक्रमित होने की कोशिश करे, ताकि उसके अंदर सुपर इम्युनिटी डेवलप हो जाए। क्योंकि आपको अंदाजा भी नहीं है, कि ये वायरस कितना ज्यादा खतरनाक है।''

अलग अलग स्तर पर एंटीबॉडी
विभिन्न रिसर्च में यह पता चला है कि, एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होना या फिर कोविड 19 वैक्सीन की एक खुराक लेना, कोरोना वायरस के खिलाफ काफी प्रभावी है। वहीं, सैन फ्रांसिस्को में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर, डॉ. मोनिका गांधी ने कहा कि, ''इस स्टडी से पता चलता है कि, सिर्फ एक बार कोरोना संक्रमित होने या फिर वैक्सीन की एक खुराक लेने के बाद किसी शरीर में उतना एंटीबॉडी नहीं बनता है, जितना एंटीबॉडी एक खुराक वैक्सीन लेने के बाद कोविड पॉजिटिव होने के बाद बनता है।

वायरस का अलग अलग असर
डॉ. मोनिका गांधी चेतावनी देते हुए कहती हैं कि, इसका मतलब ये नहीं है कि, बिना वैक्सीन लगाए कोई शख्स संक्रमित होने की कोशिश करे, क्योंकि आप कभी अंदाजा नहीं लगा सकते हैं, कि वैक्सीन आपके ऊपर क्या असर दिखाने वाला है और आप किस स्तर तक बीमार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि, 'हम जो कह रहे हैं, हम जानते हैं कि ऐसा होता है। यदि आप वायरस के संपर्क में आते हैं, तो आपके पास यह अद्भुत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होगी''। आपको बता दें कि, फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन, जो कि अमेरिका में सबसे अधिक इस्तेमाल किया गया है, मार्च महीने में वो 87 प्रतिशत तक असरदार था, जबकि सितंबर महीने में ये वैक्सीन सिर्फ 43 प्रतिशत ही असरदार रह गई, ऐसे में अमेरिकी लोगों को वैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जा रहा है।












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