चांद पर दिखा भारत का दमखम, चंद्रयान-3 की सलफता पर NASA, ESA स्पेस एजेंसियों ने दी बधाई
भारत ने आज स्पेस सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-3 का लैंडर 'विक्रम' चांद की दक्षिणी हिस्से की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर चुका है। ऐसे में आज 23 अगस्त 2023 की यह तारीख भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है।
चंद्रयान-3 ने बुधवार 6:04 बजे चांद पर लैंडिंग की। इसके साथ ही भारत, चांद के किसी भी हिस्से में यान उतारने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले अमेरिका, सोवियत संघ और चीन को ही यह कामयाबी मिली है।

अब सभी को विक्रम लैंडर से प्रज्ञान रोवर के बाहर आने का इंतजार है। रिपोर्ट के मुताबिक चांद पर धूल का गुबार शांत होने के बाद प्रज्ञान रोवर बाहर आएगा। हालांकि इसमें करीब 1 घंटा 50 मिनट लगेगा। इसके बाद विक्रम और प्रज्ञान एक-दूसरे की फोटो खींचेंगे और पृथ्वी पर भेजेंगे।
वहीं, इस दौरान भारत समेत दुनियाभर में उत्साह देखने को मिला। चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने पर अमेरिका में वॉशिंगटन स्थित इंडियन एंबेसी में भारतीय समुदाय के लोगों ने चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग पर मिठाईयां बांटी।
नासा चीफ बिल नेल्सन ने चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग पर इसरो को बधाई दी। नेल्सन ने कहा, "आपकी सफल चंद्रयान-3 चंद्र दक्षिणी ध्रुव लैंडिंग पर बधाई हो इसरो ! चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान की सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनने पर भारत को बधाई। हमें इस मिशन में आपका भागीदार बनकर खुशी हो रही है।"
यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) ने भी चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर इसरो को बधाई दी है।
चंद्रयान-3 मिशन की सफल लैंडिंग पर यूके अंतरिक्ष एजेंसी ने भी भारत को बधाई दी।
यूके स्पेस एजेंसी में चैंपियन स्पेस डायरेक्टर प्रोफेसर अनु ओझा ने कहा, "इंजीनियरिंग और दृढ़ता की इस अद्भुत उपलब्धि पर भारत को बधाई। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्रयान -3 की सफल लैंडिंग इस बात का सबूत है कि हम एक नए अंतरिक्ष युग में रह रहे हैं, जहां दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और कंपनियां चंद्रमा और उससे आगे की योजनाओं पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।"
चांद पर पहुंचकर चंद्रयान-3 ने मैसेज भेजा है। चंद्रयान-3 ने कहा- मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।
कैसे हुई चंद्रयान-3 की लैंडिंग?
- विक्रम लैंडर 25 किलोमीटर की ऊंचाई से चांद पर उतरने की यात्रा शुरू की।
- अगले स्टेज तक पहुंचने में विक्रम को करीब 11.5 मिनट लगे।
- 7.4 km की ऊंचाई पर पहुंचने तक इसकी गति 358 मीटर प्रति सेकेंड रही।
- 6.8 km की ऊंचाई पर चंद्रयान ने गति कम कर ली। यह 336 मीटर प्रति सेकेंड हो गई।
- 800 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर के सेंसर्स चांद की सतह पर लेजर किरणें डालकर लैंडिंग के लिए सही जगह की तलाश करने लगे।
- 150 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर की गति 60 मीटर प्रति सेकेंड थी।
- 60 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर की स्पीड 40 मीटर प्रति सेकेंड रही।
- 10 मीटर की ऊंचाई पर लैंडर की स्पीड 10 मीटर प्रति सेकेंड थी।
- चंद्रमा की सतह पर उतरते समय यानी सॉफ्ट लैंडिंग के लिए लैंडर की स्पीड 1.68 मीटर प्रति सेकेंड थी












Click it and Unblock the Notifications