पहली बार सूर्य से 10,000 गुना विशाल तारों का पता चला, लाखों में है संख्या
खगोल वैज्ञानिकों ने लगभग ब्रह्मांड के जमाने के तारों का पता लगाया है, जो सूरज से भी 10 हजार गुना बड़े हैं। यह तारे गोलाकार गुच्छों में हैं, जिनकी संख्या लाखों में बताई जा रही है।

खगोल वैज्ञानिक हमेशा से ब्रह्मांड के अंदर झांकने की कोशिश में लगे रहते हैं और उन्हें कई ऐसी चीजों का पता चलता रहता है, जो दुनिया से अनजान बनी रहती है। ऐसी ही एक कोशिश में वैज्ञानिकों ने ऐसे बहुत ही शुरुआती तारों का पता लगाया है, जो सूर्य से भी 10,000 बड़े हैं और ब्रह्मांड बनने के कुछ समय बाद ही बने हुए बताए जा रहे हैं।
असाधारण तारों की मौजूदगी का पहला सुराग मिला-वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों इन विशाल तारों का पता जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से लगाया है। एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में छपे शोध के मुताबिक स्विट्जरलैंड में जिनेवा यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोफिजिसिस्ट कोरिने चारबोनल ने इसके बारे में कहा है, 'आज जेम्स-वेब स्पेस टेलीस्कोप से जुटाए गए डेटा के लिए धन्यवाद, हमें विश्वास है कि हमें इन असाधारण तारों की मौजूदगी का पहला सुराग हाथ लग गया है।'
1,00,000 से 10,00,000 तारों का विशाल समूह
यह 1,00,000 से 10,00,000 तारों का विशाल समूह है, जिसे गोलाकार गुच्छों (Globular clusters) के रूप में जाना जाता है। इन सबकी एक तरह की ही विशेषताएं होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सारे एक ही समय में बने थे। दरअसल, वे प्राचीन ब्रह्मांड के अवशेष हैं। इसलिए शोधकर्ताओं की ओर से उन्हें 'जीवाश्म' बताया जाता है।
एक समय का होकर भी अलग हैं 'लौकिक राक्षस'
खगोल विज्ञान की भाषा में इसे लौकिक राक्षस भी कहा जा रहा है। माना जाता है कि इनका जन्म ब्रह्मांड बनने के कुछ ही करोड़ साल बाद हुआ था। वैसे ये तारे एक ही समय के बने माने जाते हैं, लेकिन गोलकार गुच्छों के विभिन्न तारों में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सोडियम और एलुमिनियम की मात्रा अलग-अलग होती है।
'राक्षस तारों' का कोर बहुत ज्यादा गर्म
इन तारों का कोर आज दिखाई पड़ने वाले तारों के मुकाबले बहुत ज्यादा गर्म हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा बहुत ज्यादा तापमान पर हाइड्रोजन के जलने की वजह से हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि छोटे तारे इन विशाल तारों से जाकर टकरा जाते हैं और उनकी ऊर्जा का रस लेते हैं।
'गोलाकार गुच्छे 10 से 13 अरब साल पुराने'
बार्सिलोना यूनिवर्सिटी के मार्क गिएलेस कहते हैं, 'गोलाकार गुच्छे 10 से 13 अरब साल पुराने हैं, जबकि सुपरस्टार्स का अधिकतम जीवन 20 लाख वर्षों का होता है।' 'इसलिए वे बहुत ही जल्दी उन गुच्छों से गायब हो गए, जो मौजूदा समय में देखे जा सकते हैं। उनका सिर्फ अप्रत्यक्ष निशान बचा हुआ है।'
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शोधकर्ताओं का कहना है कि 'अगर सुपरमैसिव स्टार की परिस्थिति को भविष्य के अध्ययनों से पुष्टि की जा सकती है तो इससे गोलाकार गुच्छों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पायदान उपलब्ध हो पाएगा....जिसका बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव होगा....'
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