'श्रीलंका के हर मामले में चीनी दखल बर्दाश्त नहीं', सांसद ने 'ChinaGoHome' आंदोलन के साथ खोला मोर्चा

श्रीलंका ने इस साल जनवरी महीने में ही चीन से लोन रीस्ट्रक्चर की अपील की थी, लेकिन चीन ने इनकार कर दिया था। इसके बाद भारत ने इस साल श्रीलंका को करीब 4 अरब डॉलर की मदद दी है।

Sri lanka China News: चीन के कर्ज जाल में फंसकर श्रीलंका दिवालिया हो चुका है और अब जाकर श्रीलंका के लोगों को समझ में आया है, कि ड्रैगन से दोस्ती करना कितना घातक साबित हो सकता है। श्रीलंकन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका के संसद सदस्य शनकियान रासमानिक्कम ने चेतावनी दी है, कि अगर चीनी दूतावास और उसकी सरकार अपने देशवासियों के लाभ के लिए काम नहीं करती है और कर्ज का पुनर्गठन करने में विफल रहती है तो वह "चाइना गो होम" अभियान का नेतृत्व करेंगे।

श्रीलंका में शुरू होगा

श्रीलंका में शुरू होगा "चाइना गो होम"

तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) के सांसद रासमानिक्कम ने चीन के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं और उन्होंने देश के संसदीय मामलों में चीनी दूतावास के दखल पर सवाल उठाए हैं। श्रीलंका स्थित एक वेबसाइट अदा डेराना ने शनकियान रसामानिक्कम के हवाले से कहा कि, "मैं चीनियों को चेतावनी देना चाहूंगा, कि जल्द ही चीन गो होम अभियान शुरू होगा और मैं खुद इसका नेतृत्व करूंगा।" संसद में बोलते हुए श्रीलंकन सांसद रासमानिक्कम ने जोर देकर कहा कि, चीन की भागीदारी श्रीलंका की संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है। अपने भाषण में चीनी दूतावास को संबोधित करते हुए रसमनिकम ने कहा कि, वो ट्विटर युद्ध के लिए तैयार हैं। एडे डेराना की रिपोर्ट में कहा गया है, कि टीएनए सांसद ने कहा कि, उन्होंने चीनी ऋणों के बारे में चिंता जताई है, क्योंकि वह चाहते हैं कि श्रीलंका की अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत आगे बढ़े।

'आंतरिक मामलों में दखल क्यों'

'आंतरिक मामलों में दखल क्यों'

श्रीलंका के सांसद ने संसद में बोलते हुए श्रीलंका के संसदीय मामलों में चीनी दूतावास की दखलअंदाजी का आरोप लगाया है और अदा डेराना वेबसाइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि,शनकियान रसमनिकम ने संसद में बोलते हुए कहा कि, "चीनी दूतावास का उन मामलों से क्या लेना-देना है, जिन पर इस कक्ष (संसद में) में चर्चा की जाती है? मुझे इस सदन में बोलने का सौभाग्य मिला है। चीनी दूतावास का काम क्या है, कि वह मेरी टिप्पणियां ले और उनके बारे में ट्विटर पर बात करे?" शनकियान रसमनिकम ने कहा कि, उन्होंने कर्ज पुनर्गठन प्रक्रिया में चीन की मदद की बात कही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन, जो कि 20 ट्रिलियन अमरीकी डालर की अर्थव्यवस्था है, श्रीलंका के ऋण को बट्टे खाते में डालने या देरी करने में सक्षम क्यों नहीं है? चीन इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था है और श्रीलंका के सिर्फ 7.4 बिलियन अमरीकी डालर को लेकर रीस्ट्रक्चर क्यों नहीं कर रहा है, इसपर ध्यान देने की जरूरत है।

'श्रीलंका को फंसा रहा है चीन'

'श्रीलंका को फंसा रहा है चीन'

श्रीलंका के सांसद रासमानिक्कम ने चीनी सरकार पर द्वीप राष्ट्र की आर्थिक स्थिति से अवगत होने के बावजूद श्रीलंका को पैसा उधार देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि, चीन जानता है कि चीन के ऋण जाल में श्रीलंका फंसा हुआ है और श्रीलंका की अर्थव्यवस्था खाई में गिर चुकी है, उसके बाद भी वो श्रीलंका को सिर्फ कर्ज ही ऑफर कर रहा है, आखिर चीन ऐसा क्यों कर रहा है? 30 नवंबर को संसद में बोलते हुए सांसद शनकियान रसमनिक्कम ने कहा कि, चीन श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का दोस्त है, ना कि श्रीलंका का। उन्होंने कहा कि, चीन को ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए यदि बीजिंग "मुश्किल समय में श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा होना चाहता है।" उन्होंने श्रीलंका के साथ आईएमएफ वार्ता को बाधित करने के लिए भी चीन को जिम्मेदार ठहराया।

चीनी दूतावास ने भी दी प्रतिक्रिया

चीनी दूतावास ने भी दी प्रतिक्रिया

सांसद शनाकियान रसमनिकम के संबोधन के जवाब में श्रीलंका में चीनी दूतावास ने सिलसिलेवार ट्वीट किए और लिखा कि, "क्षमा करें सांसद जी, आपकी समझ गलत और अधूरी है। चीन COVID19 से लड़ने और आजीविका राहत में श्रीलंका का सबसे बड़ा समर्थक है, जिसमें आपके जिले बट्टीकलोआ भी शामिल है। चीन अप्रैल में श्रीलंका के कर्ज चुकाने में चूक के बाद से श्रीलंका के वित्तीय संकट का पहला उत्तरदाता भी है।" आपको बता दें कि, चीन के ऊपर देशों को कर्ज जाल में फंसाकर फिर उस देश के आंतरिक और विदेश मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगते रहे हैं। इससे पहले भी चीन कई देशों के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर चुका है। चीन पाकिस्तान के अलावा नेपाल की राजनीति में भी दखल देता है।

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