Sri lanka: भारत ने दी खुफिया सूचना फिर क्यों नहीं लिया एक्शन? SC ने पूर्व राष्ट्रपति पर लगाया भारी जुर्माना
21 अप्रैल 2019 को नेशनल तवाहीद जमात के 9 सुसाइड बॉम्बर ने सिलसिलेवार तरीके से तीन चर्च और कई होटलों पर हमला कर श्रीलंका में तबाही मचा दी थी। उन आतंकी हमलों में 270 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

File Image: PTI
2019 के ईस्टर आतंकी हमले में श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना को कोर्ट ने दोषी माना है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे 2019 के ईस्टर हमले के पीड़ितों को मुआवजे के रूप में 100 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का भुगतान करें। मैत्रीपाला सिरीसेना पर यह जुर्माना इसलिए लगाया गया है क्योंकि उन्हें हमले की आशंका के बारे में प्रामाणिक जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसे रोकने में लापरवाही दिखाई। इसके साथ ही श्रीलंका की शीर्ष अदालत ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा मिला या नहीं इस बारे में उसे छह महीने में जानकारी दी जानी चाहिए।
भारत ने दी थी खुफिया सूचना
उच्चतम न्यायालय की 7 सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि दी कि 2019 के ईस्टर के हमलों को रोक पाने में नाकाम रहते हुए याचिकाओं में नामजद प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया था। कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अधिकारी घातक आत्मघाती बम हमले को रोकने के लिए भारत की ओर से साझा की गई विस्तृत खुफिया सूचना पर कार्रवाई करने में विफल साबित हुए।
चार अधिकारियों पर लगा जुर्माना
श्रीलंका की शीर्ष अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति सिरीसेना पर 100 मिलियन श्रीलंकाई रुपये, पूर्व पुलिस प्रमुख पुजिथ जयसुंदरा और पूर्व राज्य खुफिया सेवाओं के प्रमुख नीलांथा जयवर्धने को पर 75 मिलियन श्रीलंकाई रुपये और पूर्व रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को 50 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रीय खुफिया सेवा प्रमुख सिसिरा मेंडिस पर 10 मिलियन श्रीलंकाई रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी आदेश
इन सभी को उनकी निजी निधि से पीड़ित कोष में भुगतान करने का आदेश दिया गया है। मुआवजे के भुगतान पर 6 महीने के भीतर शीर्ष अदालत को सूचित किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि ईस्टर संडे कुछ ही हफ्ते दूर था तभी भारत ने देश में हमले के बारे में खुफिया सूचना साझा किया था। लेकिन फिर भी देश के अधिकारी पर्याप्त सुरक्षा के उपाय लागू करने में विफल रहे। इतना ही नहीं पीठ ने राज्य से जयवर्धने के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को भी कहा।
270 लोगों की हुई थी मौत
21 अप्रैल 2019 को नेशनल तवाहीद जमात के 9 सुसाइड बॉम्बर ने सिलसिलेवार तरीके से तीन चर्च और कई होटलों पर हमला कर श्रीलंका में तबाही मचा दी थी। उन आतंकी हमलों में 270 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस हमले के लिए इस्लामी चरमपंथियों को जिम्मेदार माना गया। इस हमले के बाद देश नस्लीय आधार पर भी बंट गया था। श्रीलंका की आबादी के लगभग दस प्रतिशत मुसलमान अलग-थलग हो गए थे। श्रीलंका की वर्तमान बदहाली का जिम्मेदार ईस्टर हमले को भी जाता है।












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