'जासूसी गुब्बारे' ने अमेरिका-चीन के रिश्तों की हवा कैसे निकाल दी?
जिस तरह गुब्बारा फूटकर समंदर में डूबा ठीक उसी तरह चीन और अमेरिका के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशें भी डूब गई.
चीन का कहना है, "हम मामले की जांच कर रहे हैं, हमें दुख है कि हमारे मौसम की जानकारी जुटाने वाले गुब्बारे को उड़ा दिया गया. हमें लगता है कि अमेरिकी मीडिया और राजनेता इस मामले को काफ़ी बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं. अमेरिका का इस एयरशिप पर हमला अंतराष्ट्रीय अभ्यास का उल्लंघन है."
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस सप्ताह चीन के दौरे पर जाने वाले थे ऐसे में चीन शुरू में तो इस पूरे विवाद में अमेरिका को बार-बार ये यकीन दिलाना चाह रहा था कि ये पूरा मामला महज एक हादसा भर है. लेकिन जैसे ही ये साफ़ हो गया कि ब्लिंकन चीन नहीं जा रहे हैं और गुब्बारा भी चीन को वापस नहीं मिलने वाला तो उसने भी कड़े तेवर अख़्तियार कर लिये.
अब बात वहां जा पहुंची है जहां चीन और अमेरिका दोनों ही नहीं होना चाहते.
अमेरिका के विदेश मंत्री को चीन में होना था जहां वो दोनों देशों के बीच गहरी होती खाई को पाटने की कोशिश करते, अगर खाई ना भी पाट पाते तो वे इन दूरियों को बढ़ने से ज़रूर रोकते.
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चीन की भूल
ये भी माना जा रहा था कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस दौरे से कई उम्मीदें थी और वह संभवतः खुद एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात करने वाले थे. लेकिन सवाल ये है कि आख़िर उस गुब्बारे से ऐसे कौन से इंटेलिजेंस जुटाए जा रहे थे कि चीन ने इतना बड़ा रिस्क लिया.
इसका छोटा सा जवाब है चीन की ओर से है- कुछ भी नहीं. कई विश्लेषक मानते हैं कि अगर एक हद तक जासूसी भी थी तो गुब्बारे को ऐसे वक़्त लगाना चीन की तरफ़ से एक भूल है.
चीन के दो 'जासूसी' गुब्बारे थे, लैटिन अमेरिका के ऊपर हवा में झूल रहा था, हालांकि ये अब तक नहीं पता है कि इस दूसरे गुब्बारे को ख़त्म किया गया है या नहीं.
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोग मानते हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी काफ़ी शक्तिशाली है. उसके पास सुपर कम्प्यूटर हैं और एक बड़ी ताक़त है जिसे सीधे शी जिनपिंग कमांड करते हैं.
कम्युनिस्ट पार्टी एक शक्तिशाली पार्टी है ये तय है, लेकिन इसमें भी कई डिपार्टमेंट है तो आपस में वर्चस्व के लिए एक-दूसरे से कॉम्पीटिशन करते रहते हैं. कई बार सूचना जुटाने के लिए वो ऐसा भी करते हैं कि जान-बूझ कर एक-दूसरे से अपने एक्शन की जानकारी छुपाई जाए ताकि उनके विभाग को इसका फ़ायदा मिले.
जब अमेरिका के एक न्यूक्लियर सिस्टम के पास एक उपकरण से लटकता गुब्बारा नज़र आया तो ये माना जाने लगा कि ये गुब्बारा ना सिर्फ़ जासूसी के लिहाज से लगाया गया है बल्कि ये बाइडन प्रशासन को एक संदेश भी था.
लेकिन अगर हम उस डैमेज की ओर देखें जो इस पूरे वाकए से हुआ- वो दौरा जिसे चीन की सरकार उम्मीद भरी नज़रों से देख रही थी, तो ये कहना थोड़ा कठिन लगता है कि इससे चीन को फ़ायदा हुआ है. ब्लिंकन का दौरा चीन के लिए महत्वपूर्ण था इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन इस मामले में शुरुआत में बेहद समझौते वाली भाषा बोलता नज़र आ रहा था.
क्यों चीन के लिए अहम था ब्लिंकन का दौरा
चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने ये कहा कि "चीन को इस तरह से एयरशिप के अमेरिकी एयरस्पेस में दाखिल होने पर खेद है."
भले ही ये गुब्बारा जासूसी के लिए हो या मौसम की जानकारी के लिए, लेकिन इससे दोनों देशों के रिश्तों को ज़ोरदार धक्का लगा है. जबकि दोनों देश बीते कुछ महीने से तनाव को कम करने में जुटे थे. ब्लिंकन के दौरे से कुछ बहुत बड़ा हासिल नहीं होने वाला था लेकिन उनका दौरा हो पाना ही खुद में एक बड़ी बात होती.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ये दौरा चाहते थे क्योंकि चीन में भी वह ये साबित करना चाहते हैं कि उनकी सरकार के पास चीन के भविष्य का विज़न है.
बीते दिनों ही जिनपिंग सरकार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था जब पार्टी कांग्रेस में उन्होंने कहा था कि देश की ज़ीरो कोविड पॉलिसी से वह पीछे नहीं हटेंगे और इसके बाद उन्हें इसमें ढील देनी पड़ी.
इसके बाद देश में कोविड से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा और अस्पतालों के बाहर लंबी कतारें देखी गई, दवाओं की पड़ी हुई दिखीं.
अब चीन की सरकार ये दिखाना चाहती है कि आर्थिक विकास के लिए खुद को खोलने के ज़रूरी प्रयास कर रहा है.
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अमेरिका के विदेश मंत्री का दौरा इस लिहाज से शी जिनपिंग सरकार के लिए बेहतर साबित होता. अमेरिका ने कहा है कि ये 'अमेरिका की संप्रभुता का उल्लंघन' है. लेकिन हम ये भी जानते हैं कि अमेरिका भी वक़्त वक़्त पर चीन की जासूसी करता रहा है.
वहीं चीन ये अमेरिका के इस 'मानवरहित गुब्बारे' को नष्ट करने के क़दम की निंदा की है, हालांकि अगर ये गुब्बारा अमेरिका का होता और चीन के एयरस्पेस में घूम रहा होता तो पीपल्स लिब्रेशन आर्मी इसे मार गिराने में कोई क़सर नहीं छोड़ती.
दोनों ही ओर से एक-दूसरे के प्रति संदेह और डर बना रहता है.
हालांकि बेहतर बात ये है कि गुब्बारा अब नहीं है, अब दोनों देश इससे आगे बढ़ेंगे और ब्लिंकन का चीन दौरा दोबारा तय किया जा सकता है. और लोग एक दूसरे से पूछ रहे होगे- अरे क्या तुम्हे वो गुब्बारे वाला विवाद याद है?
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