धमाके के बाद सूरज से निकला आग का विशालकाय गोला, जानिए कैसे जलने से बचेगी हमारी धरती?
कई लोगों के मन में जिज्ञासा है कि, सूरज के अंदर इस बार जो विस्फोट के बाद तूफान उठे हैं, वो आखिर कितना शक्तिशाली है?
नई दिल्ली, फरवरी 20: मंगलवार को सूरज में दो बड़े विस्फोट हुए हैं, जिसके बाद काफी तेज रफ्तार से आग का विशालकाय गोला सूरज से निकल गया है, जिससे से भारी तादाद में प्लाज्मा और रेडिएशन निकलकर अंतरिक्ष में प्रवाहित हो रहे हैं। लेकिन, सूरज से निकली इस आग का हमारी धरती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि धरती इस आग के गोले को चकमा देने जा रही है।

मंगलवार को हुआ था विस्फोट
खगोलशास्त्री डॉ टोनी फिलिप्स ने अपनी वेबसाइट spaceweather.com पर लिखा है कि, मंगलवार को सूरज में दो बड़े और घातक विस्फोट हुए थे, जिसके बाद अंतरिक्ष में भारी संख्या में प्लाज्मा और रेडिएशन का निकलना शुरू हो गया है। हालांकि, उन्होंने लिखा है कि, इस रेडिएशन और प्लाज्मा का धरती पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि, सूरज के जिन हिस्सों में विस्फोट हुए हैं, वो पृथ्वी से काफी ज्यादा दूर हैं। यह विस्फोट 4 फरवरी को हुए इसी तरह के एक और विस्फोट की तरह की ही शक्तिशाली था, जिसकी जद में आने से एलन मस्क की स्पेसएक्स स्टारलिंक कंपनी के 40 से ज्यादा सैटेलाइट पूरी तरह से जल गये थे।

क्या होता है भू-चुंबकीय तूफान?
सूरज से निकले तूफान का ये कण जब पृथ्वी के चुंबकमंडल में गड़बड़ी पैदा करते हैं, तो इसे भू-चुंबकीय तूफान कहा जाता है। हालांकि, पिछले दिनों SWPC की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि इस तूफान का हमारी तकनीक पर प्रभाव नाममात्र का होगा। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने एक रिपोर्ट में समझाया था कि, ''पूर्ण प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है। हम औरोरा देखने की उम्मीद कर रहे हैं। आयनोस्फीयर में धाराओं के इंजेक्शन की उम्मीद की जाती है, जो बदले में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में उतार-चढ़ाव को प्रेरित करेगा''।

क्या होता है सौर तूफान?
आपको बता दें कि, सौर तूफान को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निंया की वैज्ञानिक संगीता अब्दू ज्योति ने पिछले दिनों बताया था कि, आने वाल भविष्य में धरती को बड़े सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। सौर तूफान का मतलब सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास इजेक्शन है, जो बेहद नुकसानदायक और प्रयलकारी साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में इस सौर तूफान के कारण धरती पर इंटरनेट सर्विस ठप हो सकती है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कई देशों में पावर ग्रिड फेल हो सकते हैं। संगीता ने सिगकॉम 2021 डेटा कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में अपनी स्टडी वैज्ञानिकों को दिखाई , जिसके बाद से वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

कितना शक्तिशाली है तूफान?
कई लोगों के मन में जिज्ञासा है कि, सूरज के अंदर इस बार जो विस्फोट के बाद तूफान उठे हैं, वो आखिर कितना शक्तिशाली है? जिसको लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि, इसकी सटीक जानकारी जानना अभी संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने कहा कि, सूरज में उठे तूफान को एक्सरे ऑउटपुट के जरिए वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन अभी एक्सरे रिपोर्ट में सूरज की सीध में कोई स्पेसक्राफ्ट नहीं दिखा है। इसका पता एक्सरे सेंसर से लगाया जाता है। वहीं, वैज्ञानिक डॉ. फिलिप्स ने इस तूफान को 'एक्स फ्लेयर' कहा है। डॉ. फिलिप्स के मुताबिक, एक्स फ्लेयर काफी ज्यादा शक्तिशाली सोलर तूफान से निकला आग का गोला होता है और उन्होंने इस बार जो आग का गोला निकला है, उसे एम क्लास कैटोगिरी में रखा है, जो दूसरे नंबर का सबसे ज्यादा शक्तिशाली कैटोगिरी माना जाता है।
धरती पर क्या पड़ेगा असर?
सेंटर ऑफ एक्सलेंस इन स्पेस साइंसेस इंडिया ने कहा है कि, 'अगले कुछ दिनों में पृथ्वी पर सौर हवा की स्थिति बढ़ जाएगी और हम सूरज पर कई छोटे छोटे फिलामेंट देख सकते हैं।' वहीं, इसने कहा है कि, 'सूरज से विशालकाय आग का गोला निकलने की वजह से पृथ्वी के नजदीकी अंतरिक्ष वातावरण में कुछ गड़बड़ियां पैदा हो सकती हैं।' शोधकर्ता के मुताबिक सौर तूफान को लेकर हमारी जानकारी कम है और हमारे पास इससे संबंधित डेटा की कमी है, जिसक कारण इसका नुकसान अधिक हो सकता है। शोध के मुताबिक सौर तूफान पावर ग्रिड्स को नुकसान पहुंचाता है।

1989 में आया था सोलर तूफान
इस सोलर तूफान का पृथ्वी पर क्या असर होगा, इसका पता तो बाद में चलेगा, लेकिन इससे पहले 1989 में सूरज से निकला तूफान पृथ्वी से टकराया था, जिसका काफी असर कनाडा पर पड़ा था। उस वक्त कनाडा के क्यूबेक शहर में करीब 12 घंटे के लिए बिजली गायब हो गई थी और लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

1959 में भी आया था शक्तिशाली तूफान
वहीं, उससे पहले 1959 में अभी तक का सबसे बड़ा और शक्तिशाली तूफान जिओमैग्नेटिक पृथ्वी से टकराया था, जिसने अमेरिका के टेलीग्राफ नेटवर्क को पूरी तरह से तबाह कर दिया था और उन नेटवर्क में काम करने वाले कर्मचारियों ने बिजली का काफी तेज झटका महसूस किया था। वहीं, सोलर तूफान की वजह से नार्दर्न लाइट इतनी तेज हो गई थी कि रात के करीब 12 बजे दिन जितनी रोशनी हो गई थी। ये रोशनी इतनी ज्यादा थी कि लोग उसमें अखबार तक पढ़ पा रहे थे।












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