Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bangladesh: चुनाव जीतने के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों को लुभाने में जुटी शेख हसीना, क्या हिन्दू खतरे में हैं?

बांग्लादेश में अगले महीने चुनाव होने वाले हैं। इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग अब मुस्लिम कट्टरपंथियों को लुभाने में जुट गई है। चूंकि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की छवि अल्पसंख्यकों के प्रति नरम रुख रखने वाली रही है।

ऐसे में सरकार के बदले एजेंडे ने वहां रह रहे हिन्दुओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्या लगातार घट रही है। पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर 'अन्याय' और 'उत्पीड़न' इस कदर हुआ है कि वहां हिन्दुओं की आबादी बेहद कम हो चुकी है।

Sheikh Hasina woos Islamists

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 1951 में 22 प्रतिशत थी। ये 2022 में घटकर 8 प्रतिशत से भी कम हो गई है। वहीं अगर मुसलमानों की बात की जाए तो 1951 में वहां मुसलमानों की आबादी 76 फीसदी थी, यह अब 91 फीसदी से भी अधिक हो चुकी है।

हिन्दुओं का धार्मिक उत्पीड़न

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के अनुसार 1964 और 2013 के बीच, 1.1 करोड़ से अधिक हिंदू धार्मिक उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश से भाग गए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में हर साल 2,30,000 हिंदू देश छोड़कर चले जाते हैं।

DW की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 की जनगणना से पता चला कि 2000 से 2010 के बीच बांग्लादेश की आबादी से दस लाख हिंदू गायब हो गए। हालांकि बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी प्रतिशत में गिरावट की वजह सिर्फ पलायन ही नहीं है। मुसलमानों के बीच उच्च जन्म दर और हिंदू आबादी में कम जनसंख्या दर भी संख्या में गिरावट की वजह है।

बांग्लादेश का राज्य धर्म इस्लाम है, लेकिन अवामी लीग सरकार ने 2011 में प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्षता' को फिर से शामिल किया था। जब बांग्लादेश में पिछले 15 सालों से प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व में 'धर्मनिरपेक्ष' अवामी लीग सरकार सत्ता में है, तो धार्मिक अल्पसंख्यकों को ऐसे हमलों और उत्पीड़न का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

अगले महीने आम चुनाव

यह एक ज्वलंत प्रश्न है और यह और भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि में बांग्लादेश 7 जनवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में 'बीइंग हिंदू इन बांग्लादेश: द अनटोल्ड स्टोरी' के लेखक और पत्रकार दीप हलदर बताते हैं कि 2024 के चुनाव का हिंदुओं पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

दीप हलदर कहते हैं कि, "अगर हसीना सरकार को किसी ऐसे तत्व से बदल दिया जाता है जो धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश के विचार के लिए हानिकारक है, तो यह बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए विनाशकारी होगा जैसा कि हमने 2001 में देखा था जब खालिदा जिया की बीएनपी-जमात सत्ता में आई थी।

बांग्लादेश में दो दशक पहले खालिदा जिया की सरकार में हिंदुओं के नरसंहार और हिंसा की घटनाएं हुई थीं। हालांकि अब बीएनपी खुद को एक अल्पसंख्यक समर्थक होने का दावा कर रही है।

हाल ही में बीएनपी ने शेख हसीना सरकार का 'असली चेहरा' उजागर करने के लिए हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों को उजागर करने वाला एक दस्तावेज़ जारी किया है। इस दस्तावेज में अवामी लीग के सदस्यों द्वारा हिंदुओं की जमीन हड़पने की ओर इशारा किया गया है।

अवामी लीग कैसे इस्लामवादियों को लुभा रही है?

2018 के आम चुनाव में अवामी लीग के घोषणापत्र के केंद्र में 'अल्लाह सर्वशक्तिमान' और 'अल्लाह महान है' था। पार्टी जनवरी 2024 के चुनाव के लिए अभी तक अपना घोषणापत्र लेकर नहीं आई है।

'इस्लाम एंड पॉलिटिक्स इन बांग्लादेश: द फॉलोअर्स ऑफ उम्माह' के लेखक मुबाशर हसन कहते हैं कि दोनों मुख्यधारा की पार्टियां - अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) - अपनी राजनीति में इस्लामी संस्कृति और मूल्यों का उपयोग करती हैं। वह अवामी लीग को, जैसा कि पार्टी दावा करती है, एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं मानते हैं।

मुबाशर हसन इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं, "मेरे शोध में, मुझे आज़ादी के तुरंत बाद बांग्लादेश में कोई ऐसा नेता नहीं मिला जिसने नीति-निर्माण और विदेश नीति में बहुसंख्यक धर्म का पक्ष न लिया हो। अपनी किताब में, मैं तर्क देता हूं कि बांग्लादेश में कोई धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "इस संदर्भ में, अल्पसंख्यक राजनीतिक मोहरे बन गए हैं।"

बांग्लादेश पर नजर रखने वालों ने विस्तार से बताया कि कैसे शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार इस्लामी कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रही है। वे कट्टरपंथियों को लुभाने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

एक तरफ अवामी लीग अति-कट्टरपंथी इस्लामी समूह हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश के साथ दोस्ती बढ़ा रही है। दूसरी तरफ देश में सऊदी-वित्त पोषित मस्जिदों और मदरसों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

कट्टरपंथियों को क्यों लुभा रही शेख हसीना?

शेख हसीना की अवामी लीग इस्लामवादियों को लुभाने की कोशिश कर रही है क्योंकि वह अपना मतदाता आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेख हसीना और अवामी लीग की राजनीतिक मजबूरियां हैं जो उन्हें इस्लामवादियों को लुभाने के लिए मजबूर कर रही हैं।

वे कहते हैं कि यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अवामी लीग एक राजनीतिक पार्टी है जिसका उद्देश्य चुनाव जीतना है। बांग्लादेश की पांच प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से, अवामी लीग एकमात्र आधिकारिक तौर पर धर्मनिरपेक्ष पार्टी है।

हालांकि, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, अवामी लीग व्यावहारिक रूप से अधिक धर्मनिरपेक्ष बनने और धर्मनिरपेक्ष विरोधी तत्वों का मुकाबला करने में असमर्थ है। ऐसे में राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए धर्मनिरपेक्ष विरोधी ताकतों से दोस्ती करना अवामी लीग की मजबूरी बन चुकी है।

हालाँकि अवामी लीग ने चरमपंथियों को हालात बदतर बनाने से रोका है, लेकिन उसके पास इस्लामवादियों को रोकने की शक्ति या राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है। यदि वह कट्टरपंथियों को रोकने के लिए कड़े फैसले लेती है तो वह एक बड़ा वोटबैंक खो देगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+