चीन के करीबी, सेना के लाडले, भारत के ‘प्यारे’, शहबाज शरीफ होंगे अगले PM! जानिए क्यों हैं छुपे रुस्तम?

अगर सबकुछ सही रहा, तो शहबाज शरीफ पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री बन सकते हैं, क्योंकि, पाकिस्तान की तमाम विपक्षी पार्टियों ने उन्हें अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवारा बनाया हुआ है।

इस्लामाबाद, अप्रैल 09: पाकिस्तान की राजनीति में उठा बवंडर आज खत्म हो सकता है और अगर इमरान खान की पार्टी... पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ आज संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग करवाती है, तो पूरी उम्मीद है, कि इमरान खान की सरकार गिर जाएगी और ऐसे में वो 'भाग्यशाली' चेहरा, जो पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री बन सकता है, वो चेहरा होगा शहबाज शरीफ का। वो शहबाज शरीफ, जिसके बारे में इमरान खान कहते हैं... कि 'उसने शेरवानी लंबे वक्त से सिलवा रखी है'।

शहबाज शरीफ हो सकते हैं प्रधानमंत्री

शहबाज शरीफ हो सकते हैं प्रधानमंत्री

शहबाज शरीफ, जिनके पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री होने की सबसे अधिक संभावना है, अपने देश के बाहर बहुत कम जाने जाते हैं, लेकिन एक राजनेता के रूप में एक प्रभावी प्रशासक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा घरेलू स्तर पर काफी ज्यादा है। तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई, 70 वर्षीय शहबाज, इमरान खान सरकार को गिराने के लिए संसद में विपक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं, और अगर शनिवार को अविश्वास प्रस्ताव होता है, तो उन्हें व्यापक रूप से इमरान खान की जगह प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि नवाज़ के विपरीत, शहबाज के पाकिस्तान की सेना के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं, जो परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र में 22 करोड़ लोगों की विदेश और रक्षा नीति को पारंपरिक रूप से नियंत्रित करता है।

कौन हैं शहबाज शरीफ

कौन हैं शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के जनरलों ने तीन बार नागरिक सरकारों को गिराने के लिए सीधे हस्तक्षेप किया है, और 1947 के बाद से आजतक पाकिस्तान के किसी भी प्रधानमंत्री ने अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। अमीर शरीफ वंश का हिस्सा शहबाज शरीफ आज प्रधानमंत्री बन सकते हैं और बकौल इमरान खान, जो शेरवानी उन्होंने पीएम पद का शपथ लेने के लिए बनवाई है, उसे आज पहन सकते हैं। शहजाब शरीफ अपनी प्रशासनिक शैली के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, जो पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री के तौर पर पूरे पाकिस्तान ने देखा था। शहबाज शरीफ को चीन के काफी करीब माना जाता है और पंबाज प्रांत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी उन्होंने चीनी परियोजनाओं के लिए काफी काम किया था। माना जा रहा है, कि शहबाज शरीफ सीपीईसी परियोजना को फिर से हरी झंडी दिखा सकते हैं, जिसे इमरान खान ने बंद कर दिया था और चीन को अपने खिलाफ कर लिया था। इसके साथ ही, शहबाज शरीफ अमेरिका के साथ ही अच्छा संबंध बनाने की कोशिश करेंगे और इस काम में उनकी मदद उनके बड़े भाई नवाज शरीफ करेंगे।

चुनौतियों का होगा अंबार

चुनौतियों का होगा अंबार

अगर सबकुछ सही रहा, तो शहबाज शरीफ पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री बन सकते हैं, क्योंकि, पाकिस्तान की तमाम विपक्षी पार्टियों ने उन्हें अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवारा बनाया हुआ है। अगर शहबाज शरीफ पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करते हैं, तो फिर उनके सामने चुनौतियों का अंबार होगा और उन्हें फौरन पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कदम उठाने होंगे, महंगाई को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे, पाकिस्तान रुपया, जो डॉलर के मुकाबले करीब 190 पर पहुंच गया है, उसे संभालने के लिए फौरन कदम उठाना होगा, वहीं पाकिस्तान में तेजी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए भी आपातकालीन कदम उठाने होंगे।

क्या आजादी से कर पाएंगे काम?

क्या आजादी से कर पाएंगे काम?

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि, शहबाज शरीफ पूरी आजादी के साथ काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें अन्य विपक्षी दलों और अपने भाई के साथ सामूहिक एजेंडे पर काम करना होगा। जेल से छूटने के बाद से नवाज पिछले दो साल से लंदन में रह रहे हैं, जहां वहां इलाज करवा रहे हैं। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजिम सेठी ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, 'शहबाज शरीफ क्या... अभी किसी भी प्रधानमंत्री के लिए देश संभालना काफी ज्यादा मुश्किल है।' उन्होंने कहा कि, 'विपक्ष में कई पार्टियां हैं और सबकी अपनी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं और शहबाज शरीफ आपसी सहयोग बनाते रहेंगे या सरकार चलाएंगे?' उन्होंने कहा कि, 'सवाल ये है, कि क्या एक साल तक शहबाज शरीफ सरकार चलाएंगे? अगर वो ऐसा करते हैं और जिन मुद्दों पर वो इमरान खान को 'नालायक' कहते थे, अगर उन मुद्दों को संभाल नहीं पाएंगे, तो फिर इमरान खान के लिए आगामी चुनाव में एक हरी घास की पिच मिल जाएगी, जहां वो बड़ी आसानी से विपक्ष की गिल्लियां बिखेर सकते हैं।'

चीन के काफी करीब हैं शहबाज शरीफ

चीन के काफी करीब हैं शहबाज शरीफ

पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में, पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत, शहबाज शरीफ ने अपने गृहनगर, पूर्वी शहर लाहौर में पाकिस्तान की पहली आधुनिक जन परिवहन प्रणाली सहित कई महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा मेगा-परियोजनाओं की योजना बनाई और उसे पूरा किया था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, निवर्तमान चीनी महावाणिज्य दूत ने पिछले साल शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर विशालकाय चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पहल के तहत परियोजनाओं के "पंजाब की रफ्तार" की प्रशंसा की थी। राजनयिक ने यह भी कहा था, कि शरीफ और उनकी पार्टी सरकार या विपक्ष में चीन के मित्र होंगे। अफगानिस्तान में, इस्लामाबाद पर तालिबान को अपनी मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए उकसाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव है, जबकि वहां अस्थिरता को सीमित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के ‘प्यारे’

भारत के ‘प्यारे’

इमरान खान के विपरीत, जिन्होंने नियमित रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निंदा की है, शरीफ राजनीतिक वंश अपने साथी परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी भारत के प्रति अधिक उदार रहा है, जिसके साथ पाकिस्तान ने तीन युद्ध लड़े हैं। जब नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, उस वक्त पीएम मोदी ने अचानक पाकिस्तान का दौरा भी किया था। इसीलिए, इमरान खान शरीफ परिवार पर भारत के प्यारे होने का आरोप लगाते रहते है। इमरान खान बार बार आरोप लगाते हैं, कि नवाज शरीफ और उनके परिवार का व्यापार भारत में भी है और शरीफ भाई भारत के लिए 'प्यारे हैं' और वो भारत के 'वफादार' हैं।

शहबाज शरीफ की राजनीति

शहबाज शरीफ की राजनीति

शरीफ खानदान ने लगातार सेना के साथ अच्छे संबंध बनाकर रखे हैं। मुशर्रफ कार्यकाल को छोड़ दिया जाए, तो नवाज शरीफ भी तीन बार सेना के आशीर्वाद से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। शहबाज शरीफ का जन्म लाहौर में एक धनी औद्योगिक परिवार में हुआ था और उनकी शिक्षा स्थानीय स्तर पर हुई थी। उसके बाद उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय में प्रवेश किया और संयुक्त रूप से एक पाकिस्तानी स्टील कंपनी के मालिक हैं। उन्होंने पंजाब में राजनीति में प्रवेश किया, 1997 में पहली बार पंबाज प्रांत के मुख्यमंत्री बने, लेकिन, पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट के बाद उन्हें भी कैद कर लिया गया था और फिर उन्हें साल 2000 में सउदी अरब में निर्वासन में भेज दिया गया।

2007 में फिर लौटे पाकिस्तान

2007 में फिर लौटे पाकिस्तान

शहबाज अपने राजनीतिक जीवन को फिर से शुरू करने के लिए 2007 में पंजाब में निर्वासन से लौटे। पनामा पेपर्स के खुलासे से संबंधित संपत्ति छिपाने के आरोप में 2017 में नवाज को दोषी पाए जाने के बाद जब वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी के प्रमुख बने तो उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में प्रवेश किया। शरीफ परिवार और समर्थकों का कहना है कि नवाज शरीफ के खिलाफ मामले राजनीति से प्रेरित थे। दोनों भाइयों ने इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद 'नेशनल अकाउंटिबिलीटी ब्यूरो' में कई भ्रष्टाचार के मामलों का सामना किया है, लेकिन शहबाज को किसी भी आरोप में दोषी नहीं पाया गया है।

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