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शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी खार की बातचीत लीक, चीन और अमेरिका के बीच फंस गया पाकिस्तान?

साउथ एशिया इंडेक्स ने दावा किया है, कि अमेरिका ने भारत की भी जासूसी की है और भारत के NSA अजीत डोभाल ने रूस के NSA से यूक्रेन युद्ध को लेकर क्या बात की थी, वो भी अमेरिका के लीक हुए दस्तावेज में शामिल है।

Pakistan US China

Pakistan US China: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार के बीच हुई बातचीत लीक हो गई है।

एआरवाई न्यूज ने बताया है, कि अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों से पता चला है, कि पाकिस्तान की विदेश मामलों की राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का त्याग करने के खिलाफ देश को आगाह किया है।

मार्च महीने में, हिना रब्बानी ने तर्क दिया था, कि उनका देश "अब चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच खेल का मैदान बनकर नहीं रह सकता है"।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी के बीच हुई इस बातचीत के लीक होने के बाद पातिस्तान में बवाल मच गया है। वहीं, इस लीक से पता चलता है, कि पाकिस्तान किस तरह से चीन और अमेरिका के बीच फंसा हुआ है। इस लीक बातचीत से ये भी पता चलता है, कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति को लेकर कैसे फंस चुका है और सरकार के नेता कितने कनफ्यूज हो चुके हैं।

आपको बता दें, कि शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी के बीच की ये बातचीत, उस लीक का हिस्सा है, जो कुछ दिन पहले अमेरिका में हुआ था। अमेरिका के एक सैनिक ने अमेरिकी इंटेलीजेंस के सैकड़ों कागजात को लीक कर दिया था, जिससे पता चला है, कि अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों, जैसे ब्रिटेन, भारत, ब्राजील और पाकिस्तान के साथ साथ दुश्मन देश ईरान और रूस की भी जासूसी की है।

पाकिस्तान सरकार में विदेश नीति पर कनफ्यूजन

यूएस इंटेलिजेंस की लीक रिपोर्ट से पता चलता है, कि पाकिस्तान अभी तक तय नहीं कर पाया है, कि वो चीन और अमेरिका, किसके खेमे में जाए, इसीलिए वो दो महाशक्तियों के हाथों खेलता नजर आ रहा है।

पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून के मुताबिक, हिना रब्बानी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आगाह किया था, कि पाकिस्तान को चीन और अमेरिका के बीच "बीच का रास्ता" बनाए रखना बंद करना चाहिए।

हिना रब्बानी, जो पहले पाकिस्तान की विदेश मंत्री रह चुकी हैं, ने एक आंतरिक मेमो में "पाकिस्तान के कठिन विकल्प" शीर्षक से आगाह किया है, कि इस्लामाबाद को पश्चिम को खुश करने की कोशिश बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा, कि पाकिस्तान को अब अमेरिका को खुश रखने की प्रवृति पूरी तरह से त्याग देनी चाहिए और चीन के साथ देश की "वास्तविक रणनीतिक" साझेदारी का लाभ उठाना चाहिए।

उन्होंने शहबाज शरीफ को आगाह करते हुए कहा है, कि अगर पाकिस्तान अभी भी अमेरिका को खुश रखने की कोशिश करता है, तो चीन के साथ उसके संबंधों की बलि चढ़ जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है, कि आखिर अमेरिका ने शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी के बीच हुई बातचीत का पता कैसे लगाया।

हालांकि, पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया, कि हिना रब्बानी ने मार्च में अमेरिकी लोकतंत्र शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान को मिले न्योते को लेकर शहबाज शरीफ के साथ बातचीत की थी, और उसी दौरान दोनों नेताओं के बीच ये बातचीत की गई थी।

आपको बता दें, कि अमेरिकी लोकतंत्र शिखर सम्मेलन में अमेरिका के न्योते के बाद भी पाकिस्तान ने हिस्सा नहीं लिया था, क्योंकि उस सम्मेलन में चीन को न्योता नहीं दिया गया था। पाकिस्तान ने कहा था, कि वो लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर अमेरिका से अलग से बात कर लेगा। इस्लामाबाद ने 2021 में पहली शिखर सम्मेलन को भी छोड़ दिया था, जब इमरान खान प्रधान मंत्री थे।

सूत्रों ने कहा, कि हिना रब्बानी ने इस मुद्दे पर अपना इनपुट शहबाज शरीफ को दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लिया, लेकिन एक नाजुक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। खार के विचार के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है, कि क्या पाकिस्तान सार्वजनिक रूप से ऐसा रुख अपनाने को तैयार है, जिससे पता चले, कि वह चीन के खेमे में शामिल हो गया है।

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