वीडियो में देखें वो नजारा जब विशालकाय उल्का पिंड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा, जानें क्या कोई आवाज सुनाई दी?
वीडियो में देखें वो नजारा जब विशालकाय उल्का पिंड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा, क्या कोई आवाज सुनाई दी
बेंगलुरु।दुनिया भर पर छाए कोरोनासंकट के बीच एक के बाद एक प्राकृतिक आपदा के बारे में खबरें आ रही हैं। इसी बीच वैज्ञानिकों ने 29 अप्रैल यानी आज बुधवार को एक उल्कापिंड के पृथ्वी के काफी करीब से गुजरने का दावा किया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के करीब से कल गुजरने वाला पर्वत समान उल्कापिंड, जिसकी गति 19000 किलोमीटर प्रति घंटा थी ऐसे में कोरोना महामारी के संकट के बीच लोगों डरें हुए थे कि कहीं इससे धरती को कोई नुकसान न हो, कहीं यह धरती से बेहद करीब से गुजरते हुए टकरा न जाए। वैज्ञानिकों ने जो इसके धरती से न टकराने का दावा किया था वो बिलकुल सच हुआ।

दोपहर में इस समय बगैर किसी आहट के पृथ्वी के पास से गुजर गया उल्कापिंड
बगैर किसी आहट के पृथ्वी के काफी करीब से उल्कापिंड गुजर गया। बुधवार को भारतीय समयानुसार 3 बजकर 26 मिनट पर यह उल्कापिंड गुजरा और इससे पृथ्वी के किसी हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ। दक्षिण अफ्रीका की ऑब्जर्वेटरी की ओर से इस खगोलीय घटना की पुष्टि भी की गई है।

वीडियों में देखें वो नजारा
ऑब्जर्वेटरी की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि यह विनाशकारी उल्कापिंडों में से एक है। इसमें एक वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें आप वो नजारा देख सकते हैं जब ये पत्थरनुमा उल्का पिंड धरती के बेहद करीब से गुजरा तो कैसा नजारा दिख रहा था । आप भी देखिए वो सुंदर नजारा।
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धरती के पास से गुजरते समय क्या कोई आवाज सुनाई दी?
मालूम हो कि इस उल्कापिंड के बारे में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने आज से डेढ़ महीने पहले ही सूचना दी थी । वैज्ञानिकों ने तब दावा किया था कि इस उल्कापिंड का आकार किसी पर्वत के जितना है। साथ ही यह आशंका जताई गई थी कि जिस रफ्तार से यह उल्कापिंड बढ़ रहा है, अगर पृथ्वी की सतह से जरा-सा भी टकराया, तो बड़ी सुनामी आ सकती है। लेकिन नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने ये बात बताई थी कि इससे घबराने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि इसके धरती से टकराने की संभावना न के बराबर हैं। वैज्ञानिकों का ये अनुमान सच निकला और उल्का पिंड धरती से बेहद करीब से गुजरते हुए बिना किसी आहट के आगे निकल गया। इस समय कोई आवाज भी नहीं सुनाई दी

अगले उल्का पिंड के लिए वैज्ञानिकों ने बताई ये बात
अब इस तरह का अगला संयोग 2079 में होगा। प्यूर्टो रिको के ऑब्जर्वेटरी में 8 अप्रैल से इस उल्कापिंड की मॉनिटरिंग की जा रही है, इसके अनुसार इसकी रफ्तार 19,461 मील (31,320 km/h) प्रति घंटे की थी। मालूम हो कि 1998 OR2 नामक इस उल्कापिंड की खोज एस्टेरॉयड ट्रैकिंग प्रोग्राम के जरिए की गई थी। चपटी कक्षा वाले इस उल्कापिंड की खोज 1998 में हो गई थी। तभी से इस पर शोध जारी है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 1344 दिन का समय लग जाता है।

जानें उल्का पिंड होते क्या हैं?
काश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का यानी कि meteor कहा जाता है और उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड यानी कि meteorite कहा जाता है, हर रात को उल्काएं अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं लेकिन इनमें से पृथ्वी पर गिरने वाले पिंडों की संख्या बेहद कम होती है।












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