Saudi Ramdan 2026: रोजा रखने वाले न हों कन्फ्यूज, सऊदी में इस तारीख से रमजान शुरू, कैसे हुआ तय?
Saudi Ramdan 2026: दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय 2026 में रमज़ान की शुरुआत को लेकर सऊदी अरब की तरफ देख रहे हैं। अलग-अलग देश अपने पहले रोज़े की तारीख तय कर रहे हैं। खगोलविदों के मुताबिक 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण होने की वजह से अमावस्या का दिखना लगभग असंभव बताया गया था। इसके बावजूद एशिया और खाड़ी देशों की धार्मिक संस्थाएं और अदालतें पारंपरिक तरीके यानी आंखों से चांद देखने पर ही भरोसा कर रही हैं। रमज़ान की शुरुआत मग़रिब की नमाज़ के बाद पहली बार दिखाई देने वाली अमावस्या पर निर्भर करती है। इसी आधार पर रोज़े की तारीख तय होती है।
17 या 18 फरवरी? कब से शुरू रमजान
अगर मंगलवार 17 फरवरी को चांद दिखाई देता है, तो उसी रात ईशा की नमाज़ के बाद तरावीह होगी और पहला रोज़ा बुधवार 18 फरवरी से शुरू होगा। अगर चांद नहीं दिखता, तो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शाबान 1447 एएच के 30 दिन पूरे होंगे और पहला रोज़ा गुरुवार 19 फरवरी से रखा जाएगा।

सऊदी अरब के खगोलविदों ने इस शाम चांद दिखने की 'मजबूत संभावना' जताई है। खगोलविद मुहम्मद अल-थकाफी ने कहा कि इंशाअल्लाह, बुधवार को रमज़ान का पहला दिन हो सकता है, बशर्ते मौसम में कोई अप्रत्याशित बदलाव धार्मिक अवलोकन को प्रभावित न करे।
ऑब्जर्वेटरीओं से क्या संकेत मिले?
हरीक ऑब्जर्वेटरी के अब्दुलअज़ीज़ अल-मुऐना के अनुसार, सूर्य शाम 5:52 बजे अस्त होगा और अमावस्या देखने के लिए मौसम अनुकूल है। खगोलविद अब्दुल्ला अल-खुदैरी ने बताया कि कुंडलाकार ग्रहण के चरण सूर्यास्त से 25 मिनट पहले समाप्त हो जाएंगे। सुदैर क्षेत्र में वायुमंडलीय स्थिति चांद देखने के लिए अनुकूल बताई गई है।
हालांकि एक चुनौती यह है कि सूर्यास्त और चांद के अस्त होने के बीच केवल लगभग दो मिनट का समय होगा। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि रमज़ान 1447 एएच का चांद दिखने की प्रबल संभावना है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने क्या फैसला लिया?
सिंगापुर ने पुष्टि की है कि 17 फरवरी को चांद दिखाई नहीं दिया, इसलिए वहां पहला रोज़ा गुरुवार 19 फरवरी को होगा। मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस ने भी 19 फरवरी से रमज़ान शुरू करने का निर्णय लिया है, क्योंकि मंगलवार शाम उनके क्षेत्रों में चांद नहीं देखा गया। तुर्की ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि 19 फरवरी 2026 को पहला रोज़ा होगा। फिलीपींस में बैंगसामोरो दारुल इफ्ता ने भी विभिन्न अवलोकन स्थलों की जांच के बाद 19 फरवरी की तारीख घोषित की है।
खगोलविदों की चेतावनी और सुप्रीम कोर्ट की अपील
खगोलविदों ने पहले आकलन किया था कि कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के कारण 17 फरवरी को रमज़ान का चांद देखना 'असंभव' हो सकता है। फिर भी सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी नागरिकों और खाड़ी देशों-जैसे संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर-के लोगों से अपील की कि वे नंगी आंख या दूरबीन से चांद देखने की कोशिश करें।
राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 17 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात के कुछ हिस्सों में धूल भरी स्थिति रही। उत्तरी इलाकों में बादल और बारिश की संभावना भी जताई गई थी, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती थी।
सुदैर और तुमैर: चांद देखने के मुख्य केंद्र
सऊदी अरब में अल-मजमा'आ क्षेत्र के हवात सुदैर और तुमैर ऑब्जर्वेटरीएं 2026 के रमज़ान चांद अवलोकन के मुख्य केंद्र हैं। 17 फरवरी की शाम अब्दुल्ला अल-खुदैरी और मुतब अल-बरघाश जैसे विशेषज्ञों ने उन्नत उपकरणों के बावजूद पैगंबर मुहम्मद (पीबीयूएच) की सुन्नत के अनुसार नंगी आंख से क्षितिज देखने की योजना बनाई।
काउंसिल ऑफ सीनियर स्कॉलर्स के सदस्य शेख अब्दुल्ला अल-मुनी ने कहा कि सूर्यास्त और चांद के अस्त होने के बीच सिर्फ दो मिनट का समय है, जिसमें अमावस्या दिख सकती है।
क्या ग्रहण से चांद देखने पर असर पड़ेगा?
अब्दुल्ला अल-खुदैरी ने स्पष्ट किया कि कुंडलाकार ग्रहण रमज़ान के चांद की विजिबिलिटी को प्रभावित नहीं करता। हरमेन की रिपोर्ट के अनुसार, सुदैर ऑब्जर्वेटरी में पहली बार आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
तुमैर की नई ऑब्जर्वेटरी का हाल ही में उद्घाटन प्रिंस डॉ. फैसल बिन अब्दुलअज़ीज़ बिन अय्याफ ने किया। यह ऑब्जर्वेटरी अब आधिकारिक चांद ऑब्जर्वेशन सेंटर है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के समन्वय से कार्यालय, वेटिंग रूम और ऊंचाई पर स्थित ऑब्जर्वेशन एरिया बनाया गया है।
लेटेस्ट टेकनोलॉजी और सामुदायिक भागीदारी
हरमेन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिशियल्स के साथ आम नागरिकों ने भी तुमैर में 2026 के रमज़ान के पहले चांद अवलोकन सत्र में हिस्सा लिया। यह सुविधा इब्राहिम बिन अब्दुलमोहसेन अल-सुल्तान चैरिटेबल फाउंडेशन और रियाद क्षेत्र नगर पालिका की सामुदायिक पहल से बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह ऑब्जर्वेटरी संगठित चांद अवलोकन को मजबूत करती है और रमज़ान के दौरान चांद देखने की पुरानी परंपरा को संरक्षित रखती है।
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्या स्थिति है?
भारत में धार्मिक अधिकारी बुधवार 18 फरवरी की शाम चांद देखने की कोशिश करेंगे। मंगलवार भारत में शाबान 1447 एएच का 28वां दिन है। इसलिए पहला रोज़ा 19 या 20 फरवरी को हो सकता है, जो सऊदी अरब और स्थानीय अवलोकन पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान में केंद्रीय रुइत-ए-हिलाल समिति की बैठक 18 फरवरी को पेशावर में मौलाना अब्दुल ख़बीर आज़ाद की अध्यक्षता में होगी। यदि 29वें दिन चांद दिखता है, तो पहला रोज़ा 19 फरवरी से शुरू होगा। बांग्लादेश की राष्ट्रीय चांद देखने वाली समिति भी 18 फरवरी को बैठक करेगी और खाड़ी तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेगी।
इंडोनेशिया और फिलीपींस की आधिकारिक प्रक्रिया
इंडोनेशिया का धार्मिक मामलों का मंत्रालय अपनी सालाना 'सिदांग इस्बात' बैठक आयोजित कर रहा है। यह बैठक जकार्ता के होटल बोरोबुदुर में शाम 6:30 बजे (डब्ल्यूआईबी) शुरू होगी और लगभग 7:05 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए नतीजे घोषित किए जाएंगे।
फिलीपींस में सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को बालो-ई, लानाओ डेल नॉर्ट के सभी प्रथम-स्तरीय न्यायालयों में काम निलंबित करने की घोषणा की है। हालांकि जरूरी मामलों के लिए कर्मचारी ड्यूटी पर रहेंगे।
अलग-अलग देशों की संभावित तारीखें
आधिकारिक घोषणाओं के मुताबिक- सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया (संभावित), फिलीपींस (बैंगसामोरो) और तुर्की में पहला रोज़ा 19 फरवरी तय है। भारत में 19 या 20 फरवरी हो सकता है। पाकिस्तान में 19 फरवरी की उम्मीद है। सऊदी अरब और खाड़ी देशों में 18 या 19 फरवरी का फैसला 17 फरवरी के अवलोकन पर निर्भर है।
पूरी दुनिया एक तारीख की ओर
2026 के रमज़ान चांद के अवलोकन की तस्वीर यह दिखाती है कि कई एशियाई देश 19 फरवरी को पहले रोज़े के रूप में मान रहे हैं। सऊदी अरब और खाड़ी राज्य सुदैर और तुमैर ऑब्जर्वेटरीओं से अंतिम पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं।
धार्मिक समितियां, अदालतें और सरकारें मिलकर फैसले ले रही हैं ताकि मुस्लिम समुदाय एक साथ रोज़ा, नमाज़ और दान की तैयारी कर सके। यानी टेक्नोलॉजी और परंपरा-दोनों के मेल से 2026 का रमज़ान तय होने जा रहा है।
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