यमन में खत्म होगी जंग! जानिए कैसे चीन के एक कदम से मिडिल ईस्ट में 9 साल बाद आएगी शांति
अमेरिका में सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति बाइडेन ने 2 साल में यमन के गृह युद्द को खत्म करने का वादा किया था। इसी वादे के मुताबिक उन्होंने सऊदी को हथियार देने बंद कर दिए। हालांकि जंग को रोकने का श्रेय चीन को मिल रहा है।

यमन में बीते 9 सालों से जारी गृह युद्ध खत्म हो सकता है। इसके लिए सऊदी अरब और ओमान के एक प्रतिनिधि ने रविवार को यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से बातचीत की है। इस घटनाक्रम को सऊदी अरब की रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
9 साल पहले यमन में 2014 के अंत में युद्ध शुरू हो गया था। उस वक्त हूती विद्रोहियों ने देश के सबसे बड़े शहर और राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। हूती आमतौर पर शिया मुसलमानों के जायदी संप्रदाय से आते हैं। हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता रहा है।
सऊदी अरब हूती विद्रोहियों को आतंकवादी मानता है। मार्च 2015 में सऊदी अरब की अगुवाई में खाड़ी के अधिकतर सुन्नी मुस्लिम देशों के पश्चिम समर्थित गठबंधन ने यमन पर हवाई हमले करने शुरू कर दिया था। इस हमले को पश्चिमी देशों का भी समर्थन मिल रहा था।
पश्चिमी देशों से मिले हथियारों से सउदी ने यमन में तबाही मचा दी। यमन के हालात ऐसे हो गए कि संयुक्त राष्ट्र ने इसे 'दुनिया का सबसे बुरा मानवीय संकट' करार दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के अंत तक यमन में कम से कम 377,000 लोग मारे जा चुके थे।
बहरहाल, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईद से पहले यमन में शांति समझौता हो जाएगा। ये बातचीत पिछले महीने 11 मार्च को सऊदी अरब और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का नतीजा माना जा रहा है। चीन की मदद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल हो चुके हैं।
सऊदी और ओमान के डेलीगेशन ने यमन के सबसे ज्यादा हिस्से में कब्जा करने वाले हूती विद्रोहियों के हेड मेहदी अल मशत से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने यमन में शांति स्थापित करने पर जोर दिया। शांति प्रयास की शर्तें क्या हैं?
1. 6 महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले संघर्ष विराम का विस्तार करना
2. हूती-नियंत्रित हवाई अड्डों और बंदरगाहों को खोलना
3. यमन में मौजूद बाहरी ताकतों को दूर करना
4. सार्वजनिक कर्मचारियों को मुआवजा देने
5. ताइज और अन्य प्रांतों में सड़कों को खोलना
ऐसा कहा जा रहा है कि चीन ने अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करके मध्यपूर्व में शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। यदि मिडिल ईस्ट में जंग समाप्त होती है तो इससे सबसे अधिक फायदा चीन का होगा। चीन की छवि विश्वनेता के तौर पर और अधिक मजबूत हो जाएगी।












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