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रूसी चमगादड़ में 'SARS-CoV-2 जैसा वायरस', कोरोना से भी खतरनाक! जानिए क्या कहते हैं मेडिकल एक्सपर्ट?

नई दिल्ली, 24 सितंबर। एक ताजा स्टडी में कोरोना से भी खतरनाक वायरस मिलने का दावा किया गया है। हालांकि ये वायरस अब तक सिर्फ रूस के चमगादड़ों में पाया गया है, लेकिन मेडिकल एक्सर्ट्स का मनना है कि ये इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

मौजूदा टीके वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं

मौजूदा टीके वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं

अमेरिकी चिकित्सा वैज्ञानिकों की एक स्टडी मेडिकल जर्नल PLOS पैथोजेन में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, मौजूदा कोविड टीके वायरस 'खोस्ता -2' पर बेअसर हैं, लेकिन इसमें एक बीमारी के रूप में विकसित होने के लिए जरूरी माने जाने वाले जीन की कमी है। ये स्टडी एक रूसी चमगादड़ में सार्स-कोव-2 के जैसे एक नए वायरस की खोज पर आधारित है। इसको लेकर मेडिकल एक्सपर्ट्स का दावा है कि ये वायरस इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। मौजूदा समय में वायरस से बचाव के उपलब्ध टीके इसे रोकने के लिए कारगर साबित नहीं हो रहे।

वॉयरोलॉजिस्ट ने क्या कहा?

वॉयरोलॉजिस्ट ने क्या कहा?

स्टडी को लेकर एक वायरोलॉजिस्ट के हवाले से मिरर यूके ने अपने लेख में कहा, "हमारा शोध आगे एशिया के बाहर वन्यजीवों में फैलने वाले सरबेकोवायरस लेकर जारी रहेगा। नया वायरस पश्चिमी रूस समेत वैश्विक स्वास्थ्य व SARS-CoV-2 के खिलाफ चल रहे वैक्सीन अभियानों के लिए भी खतरा है। वायरोलॉजिस्ट ने दावा किया कि आनुवंशिक रूप से फैलने वाले ये अजीब रूसी वायरस पहले मौजूद कुछ अन्य वायरस से मिलते जुलते है, लेकिन SARS-CoV-2 से भी खतरनाक हैं।

2020 में खोजा गया था Khosta-2 वायरस

2020 में खोजा गया था Khosta-2 वायरस

खोस्ता -1 और खोस्ता -2 वायरस 2020 में रूसी चमगादड़ों में खोजे गए थे। शुरुआती जांच में ये कहा गया कि ये इंसानों के लिए खतरनाक नहीं हैं, लेकिन बाद में पता चला कि खोस्ता -2 कोविड 19 से भी खतरनाक है। इसे वर्तमान कोविड टीकों के सीरम और प्रभावों से समाप्त नहीं किया जा सकता।

'खोस्ता -2' कोरोना वायरस की सब कैटेगरी

'खोस्ता -2' कोरोना वायरस की सब कैटेगरी

PLOS पैथागंस पत्रिका में गुरुवार को प्रकाशित एक शोध पत्र में वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि 'खोस्ता -2' वायरस कोरोनवायरस की एक सब-कैटेगरी में आता है। जो कि रूसी चमगादड़ में पाया गया। इस वायरस को सर्बेकोवायरस के नाम से जाना जाता है। ये सार्स-कोव-2 का ही एक वेरिएंट है। यूनिवर्सिटी के पॉल जी एलन स्कूल की एक टीम ने पाया कि खोस्ता -2 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और SARS-CoV-2 के खिलाफ मौजूदा टीकों से इंसान में एंडीबॉडी मौजूद होने के बावजूद ये मानव कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है।

यूनिर्सल टीके की जरूरत

यूनिर्सल टीके की जरूरत

रूसी चमगादड़ों में खतरनाक वायरस की खोज करने वाली मेडिकल एक्सपर्ट्स की टीम का कहना है कि अब किसी यूनिर्सल टीके की जरूरत है। तभी सर्बेकोवायरस से बचा ज सकता है। मेडिकल साइंटिट्स ने कहा कि फिलहाल घबराने जैसी कोई बात नहीं है। सर्बेकोवायरस एक रेस्पिरेटरी वायरस हैं जो अक्सर रेकॉम्बिनेशन की प्रक्रिया से गुजरता रहते हैं। बता दें कि अमेरिका में वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सबसे पहले साल 2020 के अंत में रूसी चमगादड़ों में वायरस की खोज की थी।

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