सुब्रमण्यम भारती के घर पहुंचे विदेश मंत्री, महाकवि के के भांजे केवी कृष्णन का लिया आशीर्वाद
शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित भारतीय भाषा समिति की अनुशंसा पर तमिल महाकवि सुब्रमण्यम म भारती के जन्म दिवस 11 दिसंबर को सरकार ने इस वर्ष से ‘भारतीय भाषा दिवस’ उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया है।

(Photo Credit: External Affairs Minister twitter)
विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को हनुमान घाट स्थित तमिल महाकवि सुब्रमण्यम म भारती के घर पहुंचे। इस अवसर उन्होंने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के भांजे केवी कृष्णन से भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया। विदेश मंत्री ने इस दौरान महाकवि के घर में बने संग्रहालय का भी अवलोकन किया। विदेश मंत्री ने कहा कि आज यहां आकर धन्य हुआ। मठ के महंत मणि ने रुद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र देकर मंत्री को सम्मानित किया। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित भारतीय भाषा समिति की अनुशंसा पर तमिल महाकवि सुब्रमण्यम म भारती के जन्म दिवस 11 दिसंबर को सरकार ने इस वर्ष से 'भारतीय भाषा दिवस' उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया है।

कवि, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक
सी. सुब्रमण्यम भारथियार तमिलनाडु के एक कवि, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्हें महाकवि भारथियार के नाम से जाना जाता है और भारत के महानतम कवियों में से एक माना जाता है। राष्ट्रवाद और भारत की स्वतंत्रता पर उनके गीतों ने तमिलनाडु में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करने के लिए जनता को जोड़ने में मदद की। सुब्रमण्यम भरथियार का जन्म 11 दिसंबर 1882 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के एट्टयपुरम नामक गांव में हुआ था और उनके बचपन का नाम सुब्बैया था। उनके पिता चिन्नास्वामी अय्यर और माता लक्ष्मी अम्मल थीं।
1907 में कांग्रेस में हुए शामिल
सुब्रह्मण्य भारती बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। ग्यारह वर्ष की आयु में उन्हें कवियों के एक सम्मेलन में आमंत्रित किया गया, जहां उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें ज्ञान की देवी सरस्वती का अलंकरण दिया गया। वे कम उम्र में ही अपनी बुआ के पास वाराणसी चले गए, जहां उनका परिचय अध्यात्म और राष्ट्रवाद से हुआ। इसका उनके जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा। चार साल के काशी प्रवास में सुब्रह्मण्य भारती ने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी भाषा का गहन अध्ययन किया। भारती 1907 की ऐतिहासिक सूरत कांग्रेस में शामिल हो गए। इसी अधिवेशन में कांग्रेस नरम दल और गरम दल के बीच बंट गया था। भारती ने तिलक, अरविंद तथा अन्य नेताओं के गरम दल का समर्थन किया था।
बम बनाने की भी ली ट्रेनिंग
अंग्रेज सत्ता के विरुद्ध स्वराज्य सभा के आयोजन के लिए भारती को जेल जाना पड़ा। कलकत्ता जाकर उन्होंने बम बनाना, पिस्तौल चलाना और गुरिल्ला युद्ध का भी प्रशिक्षण लिया। वह सुब्रमण्यम भारती ही थे जिन्होंने नानासाहब पेशवा को मद्रास में छिपाकर रखा था। वह 1917 में वे गांधीजी के संपर्क में आए और 1920 के असहयोग आंदोलन में भी सहभागी हुए। स्वामी विवेकानंद के प्रभाव में आने के बाद जीवन के उत्तरार्ध में लिखी भारती की कविताओं में भारतीय हिंदू राष्ट्रवाद का गुणगान मिलता है।

तमिल साहित्य में एक नए युग की शुरुआत
तमिल साहित्य में एक नए युग की शुरुआत सुब्रमण्यम भारती से हुई। उनकी रचनाओं का अधिकांश हिस्सा देशभक्ति, भक्ति और रहस्यवादी विषयों पर लघु गीतात्मक अभिव्यक्ति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। सुब्रमण्यम भारती मूलत: गीतात्मक कवि थे। सुब्रमण्यम को राष्ट्रीय कवि के रूप में माना जाता है क्योंकि उनकी देशभक्ति के स्वाद की कई कविताएं हैं जिनके माध्यम से उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने और देश की मुक्ति के लिए दृढ़ता से काम करने का आह्वान किया।

जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ते रहे
भारती एक समाज सुधारक भी थे। हमेशा ही वे जाति व्यवस्था के खिलाफ खड़े मिले। उन्होंने पुरुष और महिला को ही मनुष्य की दो जातियां बताया। उन्होंने अपना जनेऊ उतार दिया था और समानता के भाव के लिए उन्होंने कई दलितों को जनेऊ पहनाया था। 11 सितंबर 1921 को भारती की मृत्यु हो गई। एक कवि, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक के रूप में भारती ने न केवल तमिल समाज पर बल्कि पूरे मानव समाज पर भी बहुत प्रभाव डाला।












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