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अर्दोआन का कश्मीर पर बोलना पड़ा भारी, भारत ने उठाया साइप्रस का मुद्दा, तुर्की ने 50 सालों कर रखा है कब्जा

भारत के द्वारा लगातार आपत्ति जताने के बाद भी अर्दोआन हैं कि कश्मीर को लेकर विषवमन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में भारत ने भी तुर्की के सामने साइप्रस का मुद्दा छेड़ कर उसकी दुखती रग पर हाथ रख डाला है।

न्यूयॉर्क, 22 सितंबरः भारत के खिलाफ अक्सर जहर उगलने के लिए कुख्यात हो चुके तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर से कश्मीर का मुद्दा उठाया है। भारत के द्वारा लगातार आपत्ति जताने के बाद भी अर्दोआन हैं कि कश्मीर को लेकर विषवमन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में भारत ने भी जैसे को तैसा नीति के तहत तुर्की के सामने साइप्रस का मुद्दा छेड़ कर उसकी दुखती रग पर हाथ रख डाला है।

अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा तुर्की

अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा तुर्की

अर्दोआन ने पिछले हफ्ते ही उज्बेकिस्तान के समरकंद में SCO सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और पुरी दुनिया के मुस्लिम देशों का मौलाना बनने की सनक में एक बार फिर कश्मीर मुद्दा छेड़ डाला। उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप अर्दोआन ने मंगलवार को एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि, "भारत और पाकिस्तान के बीच अभी तक शांति स्थापित नहीं की है।"

एस जयशंकर ने उठाया साइप्रस का मुद्दा

अर्दोआन के बयान के कुछ घंटों के अंदर ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तुर्की के अपने समकक्ष मेवलुत चावोसउलो से मुलाकात की और साइप्रस का मुद्दा उठाया। इस मीटिंग की जानकारी देते हुए जयशंकर ने ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, 'तुर्की के विदेश मंत्री से मुलाकात की और उनसे कई मुद्दों पर बात हुई। इनमें यूक्रेन का संकट. खाद्य सुरक्षा, जी-20 देश और साइप्रस शामिल हैं।'

तुर्की ने 50 सालों से कर रखा है कब्जा

तुर्की ने 50 सालों से कर रखा है कब्जा

दरअसल साइप्रस का मुद्दा तुर्की के लिए हमेशा से परेशान करने वाला रहा है और भारत ने भी कश्मीर पर बोलने की एवज में साइप्रस राग अलापा है। भारत की इस कूटनीति को तुर्की के कश्मीर राग का करारा जवाब माना जा रहा है। साइप्रस का संकट 1974 में शुरू हुआ था, जब तुर्की ने ग्रीस की मदद से देश के उत्तरी हिस्से पर कब्जा जमा लिया था। सैन्य तख्तापलट के चलते साइप्रस में हालात बिगड़ गए थे और उसका फायदा उठाते हुए तुर्की ने यह कब्जा किया था। तब से ही भारत इस बात का पक्षधर रहा है कि इस मामले का हल संयुक्त राष्ट्र के अनुसार निकाला जाए।

कश्मीर मुद्दे पर साइप्रस देता है भारत का साथ

कश्मीर मुद्दे पर साइप्रस देता है भारत का साथ

साइप्रस के साथ भारत के हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं और कश्मीर मुद्दों पर वह बीते 5 दशक से भारत का समर्थन करता रहा है। जयशंकर और तुर्की के विदेश मंत्री की मुलाकात से कुछ घंटों पहले अर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान को आजाद और संप्रभु मुल्क बने 75 साल गुजर गए हैं, लेकिन अब तक दोनों देशों में शांतिपूर्ण संबंध नहीं हैं। यह दुर्भाग्य की बात है। हम उम्मीद करते हैं कि कश्मीर के मुद्दे का समाधान होगा और वहां स्थायी शांति आ सकेगी। बता दें कि बीते कुछ सालों में कई बार तुर्की के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं।

पहले भी कश्मीर का मुद्दा छेड़ता रहा है तुर्की

पहले भी कश्मीर का मुद्दा छेड़ता रहा है तुर्की

इससे पहले भी अर्दोआन कश्मीर राग अलापने से नहीं चूके हैं। बीत साल 2021 में अर्दोआन ने कहा था कि हम उम्मीद करते हैं कि इस मसले का हल दोनों पक्ष शांति से करेंगे। वहीं, इसके 2020 में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। हर बार भारत की तरफ से तुर्की को करारा जवाब दिया जाता रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने एससीओ समिट के इतर पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। तुर्की इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे में उनकी इस मुलाकात को कारोबारी संबंधों को बेहतर करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था।

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