रूस-यूक्रेन युद्ध: खेरसोन से पीछे हट रहा है रूस, क्यों है ये शहर अहम?

यूक्रेनी सेना
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यूक्रेनी सेना

रूसी सेना को यूक्रेन के खेरसोन शहर से पीछे हटने के आदेश मिल चुके हैं.

ये किसी भी यूक्रेनी राज्य की एकमात्र राजधानी थी जिसपर रूस का कब्ज़ा था.

अब यूक्रेन में रूस के कमांडर सर्गेई सुरोविकिन ने कहा है कि वो खेरसोन में अपने सैनिकों तक रसद नहीं पहुँचा पा रहे हैं और इसलिए सैनिकों को शहर छोड़ना होगा.

इस घोषणा का अर्थ है कि रूसी सेना नाइपरो नदी के पश्चिमी तट से पीछे हट जाएगा. ये रूस के लिए एक बड़ा धक्का है.

उधर यूक्रेनी सेना लगातार रूसी कब्ज़े वाले इलाकों की ओर बढ़ रही है. गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी फौज ने कई और इलाक़ों को अपने कब्ज़े में ले लिया है.

पर खेरसोन से रूस के पीछे हटने को इतनी तव्वजों क्यों दी जा रही है?

  • यूक्रेन में मौजूद बीबीसी संवाददाता ह्यूगो बाचेगा के अनुसार यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने कहा है कि सेना आगे बढ़ रही है और धीरे-धीरे अपनी स्थिति मज़बूत कर रही है.
  • इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाक़ात के बाद नैटो महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने कहा है कि "रूस का पीछे हटना ये बताता है कि उस पर भारी दवाब है." उन्होंने कहा कि जब तक होगा नेटो यूक्रेन की मदद करेगा.
  • मॉस्को में मौजूद बीबीसी संवाददाता विल वरनॉन ने कहा है रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि खेरसोन इलाक़े से रूसी सैनिकों को निकालकर नाइपरो नदी की दूसरी तरफ लाया जा रहा है. वहीं पत्रकारों से बात करते हुए रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल आइगोर कोनाशेन्कोव ने कहा सेना से शहर से निकलने की बात तो की, हांलाकि उन्होंने इसे सेना का पीछे हटना न कहकर इसे सेना की "मोर्चाबंदी" कहा है.
जेन्स स्टोल्टनबर्ग
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जेन्स स्टोल्टनबर्ग

खेरसोन कहां है और इसकी क्या अहमियत है?

  • रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले यूक्रेन के दक्षिण में बये खेरसोन में क़रीब 380,000 लोग रहते थे.
  • ये काला सागर के तट पर नाइपरो नदी के किनारे बसा शहर है.
  • ये क्राइमिया प्रायद्वीप के भी क़रीब है. रूस ने यूक्रेन के इस हिस्से पर साल 2014 में नियंत्रण कर लिया था.
  • क्राइमिया में रूस के कई सैन्य अड्डे भी हैं.

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खेरसोन की भौगोलिक स्थिति
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खेरसोन की भौगोलिक स्थिति

किंग्स कॉलेज लंदन की डिफेंस रिसर्चर मारिया मिरोन के मुताबिक़, "ख़ेरसोन क्राइमिया का दरवाज़ा है. अगर यूक्रेन इसे रूस के क़ब्ज़े से छुड़ा लेता है तो उसके लिए क्राइमिया को फिर से हासिल करने का रास्ता खुल जाएगा. यूक्रेन इस युद्ध में क्राइमिया को हासिल करना चाहता है."

पूर्व ब्रितानी आर्मी इंटेलिजेंस अधिकारी और मैकेंज़ी इंटेलिजेंस सेवा के मुख्य अधिकारी फ़ोर्ब्स मैकेंजी कहते हैं कि खेरसोन की भौगोलिक स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण है.

वो कहते हैं, "नाइपरो नदी पर नियंत्रण महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सीधे यूक्रेन के मध्य से होकर गुज़रती है."

खेरसोन का सांकेतिक महत्व क्या है?

खेरसोन यूक्रेन की एकमात्र प्रांतीय राजधानी है जिसपर रूस ने क़ब्ज़ा कर लिया है.

रूस ने मार्च के शुरूआती दिनों में इस शहर पर क़ब्ज़ा किया था और हाल ही में इसे औपचारिक रूप से रूस में मिलाने की घोषणा की है. इसके अलावा यूक्रेन के तीन अन्य क्षेत्रों का भी रूस ने अपने आप में विलय किया है.

मिरोन कहती हैं, "शहर पर फिर से क़ब्ज़ा करने से ये संदेश जाएगा कि युद्ध यूक्रेन के पक्ष में जा रहा है. ये पश्चिमी देशों को भी ये दिखाएगा कि यूक्रेन को हथियार देते रहना और यूक्रेन युद्ध में ख़र्च करते रहना फ़ायदे का सौदा है."

हालांकि, रूस की सेनाओं पर भी खेरसोन को सुरक्षित करने का भारी दबाव है.

देश के पूर्वी हिस्से में यूक्रेन के जवाबी हमलों के दौरान रूस की सेना को क़रीब 6000 वर्ग किलोमीटर इलाक़ा छोड़ना पड़ा है.

मिरोन कहती हैं, "रूस को जीत की ज़रूरत है. उसे दिखाना है कि वो भी जवाबी हमला कर सकता है."

खेरसोन का एक पुल
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खेरसोन का एक पुल

रूस खेरसोन क्यों छोड़ रहा है?

रूसी कमांडर ने साफ़ कहा है कि वो खेरसोन में अब अपने सैनिकों तक सामान की आपूर्ति करने में विफल हैं इसलिए अपनी सेना को शहर से बाहर निकलने को कह रहे हैं.

रूस का कहना है कि उसने शहर से 70 हज़ार नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है और उसके शहर से अधिकारियों को भी बाहर निकालने के संकेत हैं.

खेरसोन क्षेत्र में रूस की तरफ़ से नियुक्त डिप्टी नागरिक प्रशासक किरील स्ट्रेमूसोव का कहना है कि रूस की सेनाएं नाइपरो नदी के पश्चिम में स्थित शहर के हिस्से से पीछे हट रही हैं.

उन्होंने कहा है, "बहुत संभव है कि हमारे सैनिक और हमारी यूनिटें शहर के पूर्वी तट की तरफ़ आ जाएं."

हालांकि यूक्रेन की सेना का कहना है कि रूस का सैनिकों को पीछे हटाने की बात करना चाल भी हो सकती है.

मैकेंज़ी इंटेलिजेंस के अनुमान के मुताबिक़ खेरसोन की सुरक्षा में रूस के 5 से 10 हज़ार तक सैनिक तैनात हो सकते हैं. इनमें कुछ इलीट यूनिट भी शामिल होंगी.

वहीं इंस्टीट्यूट फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर का अनुमान है कि रूस के सैनिक खेरसोन के भीतर और शहर के उत्तर-पश्चिमी इलाक़ों में रक्षात्मक मोर्चेबंदी कर रहे होंगे.

बेन बैरी कहते हैं, "इसे लेकर विरोधाभासी बातें हैं. रूस अपने प्रशासकों को बाहर निकाल रहा है, और ठीक उसी समय वह वहां अपने पैराट्रूपर और नोसौनिकों को उतार रहा है."

खेरसोन के युद्ध की क्या क़ीमत हो सकती है?

फ़ोर्ब्स मैकेंज़ी का कहना है कि खेरसोन पर क़ब्ज़ा करने के लिए हमला करना यूक्रेन के सैन्यबलों के लिए बहुत भारी पड़ सकता है.

वो कहते हैं, "ये लड़ाई गली-गली में और घर-घर में लड़ी जाएगी और इसमें बड़ी तादाद में सैनिकों की जानें जाएंगी. जो होगा बहुत भयावह होगा."

वहीं बेन बैरी का मानना है कि इस शहर पर क़ब्ज़े के लिए आमने-सामने की लड़ाई हो ये ज़रूरी नहीं है.

वो कहते हैं, "हर पक्ष के पास विकल्प हैं. रूस के सैनिक यूक्रेन के आक्रमण को धीमा करने के लिए लड़ सकते हैं और फिर पीछे हट सकते हैं. यूक्रेन की सेना शहर को चारों तरफ़ से घेरकर शहर में घुसने के बजाए रसद का पहुंचना रोक सकती है."

"हालांकि किसी भी पक्ष की क्या रणनीति है, उसका सही अनुमान लगाना असंभव है."

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