अगर शनिवार को पुतिन का तख्तापलट हो जाता, तो कौन बनता नया राष्ट्रपति? रूस के ताकतवर नेताओं को जानिए...

Russia's Powerful Leaders: शनिवार को वैगनर ग्रुप के इस ऐलान के साथ, कि वो पुतिन की सत्ता का तख्तापलट कर देंगे और उसके सैनिक रूस में दाखिल हो चुके हैं, पूरी दुनिया में रूस के भविष्य को लेकर सनसनी मच गई। रूस एक ऑटोक्रेटिक देश है, यानि रूस में पुतिन का शासन तानाशाहों की तरह है, लिहाजा ऐसे देशों के भविष्य को लेकर हमेशा से अनिश्चितता बनी रहती है।

लेकिन, फर्ज कीजिए, कि अगर राष्ट्रपति पुतिन की तख्तापलट करने में वैगनर ग्रुप का कामयाब हो जाता, तो फिर रूस का नया राष्ट्रपति कौन बनता। हालांकि, ये बात तो तय थी, कि वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोजिन के हाथों में रूस की सत्ता नहीं आती, क्योंकि पुतिन को लेकर क्रेमलिन में भले ही कितनी भी नाराजगी क्यों ना हो, लेकिन येवगेनी प्रिगोजिन के हाथों में रूस की कमान तो नहीं ही सौंपी जाती। ऐसे में आइये जानते हैं, रूस के उन शक्तिशाली नेताओं के बारे में, जो पुतिन के जाने के बाद रूस का कमान अपनी हाथों में ले सकते हैं।

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सर्गेई शोयगु- रूस के रक्षा मंत्री

सर्गेई शोयगु, जो इस वक्त रूस के रक्षा मंत्री हैं, वो राष्ट्रपति पुतिन के बाद रूस के 'दूसरे सबसे लोकप्रिय' राजनेता माने जाते हैं। पिछले साल जब पुतिन ने 'न्यूक्लियर फोर्स' को एक्टिव करने का आदेश दिया था, तो सर्गेई शोयगु भी हैरान रह गये थे। पूर्वी रूस में स्थिति चादान के रहने वाले रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगु ने यूक्रेन में रूसी हमले को आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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सर्गेई शोयगु ने साल 2012 में कोई सैन्य अनुभव नहीं होने के बावजूद यूक्रेन युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई है। उससे पहले साल 2014 में यूक्रेन के ही क्रीमिया पर रूसी आक्रमण का नेतृत्व किया था। सर्गेई शोयगु, राष्ट्रपति पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं।

निकोलाई पेत्रुशेव- रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव

निकोलाई पेत्रुशेव रूस के ताकतवर शख्सियतों में से एक हैं और रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के पूर्व प्रमुख हैं और उस वक्त रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव हैं। सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के बारे में कहा जाता है, कि वे दुनिया के अंदर बनाए जाने वाले 'साजिशों, प्लानिंग्स और गुप्त नीतियों' को काफी बारिकी से जानते और समझते हैं।

रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी का ही पूर्व नाम केजीबी था, जिसके प्रमुख खुद व्लादिमीर पुतिन रह चुके हैं, लिहाजा समझना आसाना है, कि निकोलाई पेत्रुशेव के पास कितनी ताकत हो सकती है। निकोलाई पेत्रुशेव भी एक 'तानाशाह' की तरह ही बर्ताव करते हैं और साल 2006 में, जब वो रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के प्रमुख थे, उस वक्त उनपर रूस के पूर्व एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको को पोलोनियम जहर देकर मारने के आदेश देने के आरोप लगा था।

एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको ने उस वक्त रूस के साथ विद्रोह कर दिया था और भागकर ब्रिटेन चला गया था। जांच में जहर देने के आरोप की पुष्टि भी हो गई थी।

वालेरी गेरासिमोव- रूस के सेना प्रमुख

वालेरी गेरासिमोव को राष्ट्रपति पुतिन ने साल 2012 में रूसी सेना का प्रमुख नियुक्त किया था और वो रूस के माहिर रणनीतिकार माने जाते हैं, जिन्होंने 'गेरासिमोव सिद्धांत' बनाया था, जो रूस के लिए रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक, सूचनात्मक और सैन्य रणनीति को जोड़ता है।

पिछले दो दशकों से वो रूस के द्वारा उठाए गये कई एक्शन का निर्माण करने में शामिल रहे हैं और उनकी बदौलत ही रूस साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप कर पाया था और साल 2014 शीतकालीन ओलंपिक और 2018 फीफा विश्व कप की सफल मेजबानी कर पाया था।

दिमित्री मेदवेदेव- पूर्व राष्ट्रपति

दिमित्री मेदवेदेव साल 2008 से 2012 के बीच, जब पुतिन का दूसरा कार्यकाल खत्म हुआ था, उस वक्त रूस के राष्ट्रपति भी रह चुके है और इस वक्त वो रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में जन्मे दिमित्री मेदवेदेव एक वकील भी हैं और पुतिन ने उन्हें रूस का राष्ट्रपति इसी शर्त पर बनाया था, कि वो राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन को अपना प्रधानमंत्री बनाएंगे और उन्होंने अपना वादा निभाया भी था।

दिमित्री मेदवेदेव पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं और जब 2012 में जब पुतिन ने फिर से सत्ता संभाली, तो उन्होंने मेदवेदेव को प्रधानमंत्री की भूमिका का उपहार देकर एहसान वापस कर दिया। मेदवेदेव ने आठ साल तक रूस के प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई, इससे पहले कि उन्होंने और ड्यूमा में उनकी सरकार ने व्लादिमीर पुतिन के लिए व्यापक संवैधानिक परिवर्तनों को लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए इस्तीफा दे दिया था।

मिखाइल मिशुस्तीन- रूस के मौजूदा प्रधानमंत्री

रूस के वर्तमान प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन ने कोविड महामारी शुरू होने से ठीक पहले ही रूसी प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया था और मेदवेदेव के इस्तीफे के बाद उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। रूस के पूर्व टैक्स पुलिस अधिकारी रह चुके मिखाइल मिशुस्तीन की रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन में काफी पकड़ है और वो रूस के भीतर ही पनपे कई असंतुष्ट वर्ग को भी संतुष्ट कर सकते हैं।

मॉस्को में जन्मे राजनेता मिखाइल मिशुस्तीन ने अपने काम की बतौलत कोविड के दौर में रूस में काफी लोकप्रियता हासिल की है और प्रोफ़ेसर टॉल्ज़-ज़िलिटिंकेविक ने कहा कि, 'वह देश भर में कई अलग-अलग समूहों को संतुष्ट करेंगे और व्यवस्था की दृष्टि से, वह काफी सौम्य हैं।'

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