चंद्रमा पर क्रैश कर गया रूस का लूना-25 स्पेसक्राफ्ट, रूसी स्पेस एंजेंसी रोस्कोस्मोस ने की पुष्टि

Russia's Luna-25 spacecraft has crashed: जर्मनी की DW News ने दावा किया है, कि रूस का मिशन मूल फेल हो गया है और उसका स्पेसक्राफ्ट लूना-25 चंद्रमा पर सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर पाया। रिपोर्ट में रूसी स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस के हवाले से बताया गया है, कि चंद्रमा पर लूना-25 क्रैश कर गया है, जो रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है।

आज सुबह ही चंद्रमा पर लैडिंग से ठीक पहले रूस के अंतरिक्षयान लूना-25 को लेकर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने एक बड़ी जानकारी दी थी और कहा था, कि लूना-25 ने चंद्रमा पर लैडिंग से पहले 'इमरजेंसी की स्थिति' में है और लूना-25 कुछ टेक्निकल ग्लीच का सामना कर रहा है। लूना-25 को चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर उतरना था, जो काफी मुश्किल मिशन माना जाता है। भारत के चंद्रयान-3 को भी दक्षिणी पोल पर ही उतरना है और इसरो ने घोषणा की है, कि चंद्रयान-3, 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट के आसपास दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश करेगा।

Luna-25 spacecraft crashed

रोस्कोस्मोस ने कहा था, कि जब अंतरिक्ष यान लैंडिंग-पूर्व कक्षा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, तब एक घटना घटी है। रोस्कोस्मोस ने एक टेलीग्राम पोस्ट में कहा था, कि "ऑपरेशन के दौरान, लैडिंग से पहले ऑर्बिट में ट्रांसफर करने के लिए थ्रस्ट स्टार्ट किया गया था। लेकिन ऑपरेशन के वक्त लूना-25 के ऑटोमेटिक स्टेशन में एक आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसकी वजह से इसके थ्रस्ट को स्टार्ट करने की इजाजत नहीं दी गई।"

क्रैश पर रोस्कोस्मोस ने क्या कहा?

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को घोषणा की है, कि लूना 25 में आई टेक्निकल ग्लीच की जांच में पता चला है, कि लूना-25 प्रपोल्‍शन मैनूवर के वक्त चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग के वक्त असंतुलित होकर टकरा गया, लिहाजा लूना-25 हादसे का शिकार हो गया है और इसके साथ ही, रूस का मिशन मून फेल हो गया है।

रूस का लूना-25 लैंडर मिशन का फेल होना उसके लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि सोवियत काल के बाद चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने का रूस की ये पहली कोशिश थी। रूस ने चंद्रमा पर अपना अंतिम लैंडर लूना-24, 18 अगस्त 1976 को चंद्रमा की सतह पर उतारा था, लेकिन उस वक्त रूस, सोवियत संघ हुआ करता था।

लूना 25 अंतरिक्ष यान को 10 अगस्त को सोयुज-2 फ़्रीगेट रॉकेट पर सवार होकर रूस के अमूर ओब्लास्ट में वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से लॉन्च किया गया था, और इसे शॉर्टकट रास्ते के जरिए चंद्रमा पर सिर्फ 2 हफ्ते में पहुंचना था, लेकिन आखिरी वक्त में ये चंद्रमा की सतह से क्रैश हो गया।

लूना-25 के प्रक्षेप पथ ने इसे भारत के चंद्रयान-3 चंद्र लैंडर से आगे निकलने की अनुमति दी थी, जिसे चंद्र सतह के रास्ते पर जुलाई के मध्य में लॉन्च किया गया था। माना जा रहा है, कि भारत का चंद्रयान-3, 23 अगस्त को चंद्रमा पर लैंड करेगा।

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