जिंदा रहने के लिए चिड़ियाघर के जानवरों को खा रहे हैं रूसी सैनिक, पुतिन ने जवानों को भूखा छोड़ा?

चिड़ियाघर में काम करने वाले लोगों ने कहा कि, रूसी सैनिकों ने चिड़ियाघर में रखे गये कई जानवरों को खा लिया।

Russian soldiers eating Zoo Animals: पिछले एक महीने में यूक्रेन में किसी भी हाल में जीत हासिल करने को लेकर बेताब दिख रही पुतिन की सेना असल में भारी बेताब नजर आ रही है। अपने सैनिकों तक लॉजिस्टिक सप्लाई करने में रूस बुरी तरह से फेल साबित हो रहा है, लिहाजा रूसी जवान अब दो रोटी के लिए तरसने लगे हैं। वहीं, यूक्रेन से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन के सैनिकों ने जिंदा रहने के लिए अब चिड़ियाघर के जानवरों को खाना शुरू कर दिया है।

जानवरों को खाते रूसी जवान

जानवरों को खाते रूसी जवान

24 फरवरी को यूक्रेन में जंग शुरू करन वाले रूसी राष्ट्रपति पुतिन अपने जवानों को जिंदा रखने के लिए उनतक भोजन पहुंचाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं, लिहाजा पुतिन के सनिक अब चिड़ियाघर के जानवरों को खाने के लिए मजबूर हैं। फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सैनिक अब चिड़ियाघर के जावनलों को मारकर खा रहे हैं, ताकि लड़ाई लड़ने के लिए जिंदा रह सके। दरअसल, कुछ महीने पहले ही यूक्रेन से रिपोर्ट्स आने लगी थी, कि यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के पास भोजन खत्म होने लगा है और भोजन की आपूर्ति के लिए रूसी सैनिकों ने स्थानीय लोगों से छीनाझपटी शुरू कर दी थी। इसके साथ ही यूक्रेन ने रूस और यूक्रेनी शहरों को जोड़ने वाले कई पुलों क भी नष्ट कर दिया है, जिससे रूस अपने सैनिकों तक खाने के लिए भोजन और लड़न के लिए हथियार पहुंचाने में नाकामयाब हो रहा है। वहीं, फ्रंटलाइन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि कई क्षेत्रों में हुई भीषण लड़ाई के बाद स्थानीय लोग भाग चुके हैं, लिहाजा सैनिकों के पास अब पेट भरने का कोई और विकल्प नहीं बचा है।

चिड़ियाघर बन रहे निशाना

चिड़ियाघर बन रहे निशाना

फ्रंटलाइन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, रूसी सैनिकों के पास चिड़ियाघर के बेगुनाह जानवरों को मारने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। रूसी सैनिकों के चिड़ियाघरों के जानवरों को खाने का दावा पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क में याम्पिल चिड़ियाघर के स्वयंसेवकों का है। आपको बता दें कि, यम्पिल गांव पर आक्रमण की शुरुआत में रूस ने कब्जा कर लिया था, लेकिन, 30 सितंबर को एक बार फिर से यूक्रेनी सैनिकों ने इस क्षेत्र को वापस अपने कब्जे में ले लिया है, जिसके बाद रूसी सैनिकों को लेकर ये खुलासे किए जा रहे हैं। जब याम्पिल गांव के क्षेत्र में यूक्रेनी सैनिक वापस लौटे हैं, तो वहां उन्होंने कई खतरनाक चीजें देखी हैं। जानवरों को बचाने का काम करने वाले एक वॉलेंटियर ने कहा कि, उसे चिड़ियाघर के मैदान में जानवरों के कंकाल और मांस के टुकड़े मिले हैं।

कई जानवरों को खा गये रूसी सैनिक

कई जानवरों को खा गये रूसी सैनिक

चिड़ियाघर में काम करने वाले लोगों ने कहा कि, रूसी सैनिकों ने चिड़ियाघर में रखे गये कई जानवरों को खा लिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, खाए गए जानवरों में दो ऊंट, एक कंगारू, एक बाइसन, कुछ सूअर, पक्षी और कई भेड़िये थे। वहीं, चिड़ियाघर में कई और जानवर हैं, जो फिलहाल नहीं मिल रहे हैं। इन जानलरों में भालू, ऊंट, हिरण और जंगली सूअर हैं, जिनकी तलाश जारी है। अगर ये नहीं मिलते हैं, तो फिर इसका मतलब यही हुआ, कि रूसी सैनिकों ने उन्हें भी खा लिया होगा। वहीं, चिड़ियाघर में जो जानवर बच गये हैं, उन्हें सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है। आपको बता दें कि, 11 हजार लोगों की आबादी वाले याम्पिल गांव को सितंबर महीने में यूक्रेनी सैनिकों ने रूसियों के हाथों से आजाद करवाया है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने याम्पिल गांव को आजाद करने वाले अपने सैनिकों की तारीफ की है।

यूक्रेनी सैनिकों की तारीफ

यूक्रेनी सैनिकों की तारीफ

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि, "मैं खास तौर पर 10वीं माउंटेन असॉल्ट ब्रिगेड और 54वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड के सैनिकों की लगातार बहादुरी और वीरता के लिए सराहना करना चाहता हूं। साथ ही याम्पिल की मुक्ति के लिए एसओएफ की 214 सेपरेट राइफल बटालियन और 103वीं सेपरेट टेरिटोरियल डिफेंस ब्रिगेड के सैनिकों की भी तारीफ करता हूं"। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, "मैं अपनी खुफिया इकाइयों, रक्षा मंत्रालय की रक्षा खुफिया इकाई और यूक्रेन की सुरक्षा सेवा का भी आभारी हूं।" आपको बता दें कि, यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को भारी जख्म दिया है और जंग की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 14 मिलियन यानी की 1 करोड़ 40 लाख लोगों को उनके घरों से जबरन विस्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही दुनिया भर में शरणार्थियों और विस्थापित लोगों की संख्या में 103 मिलियन से अधिक की वृद्धि हुई है।

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