स्पर्म फ्रीज करा सकते हैं रूसी सैनिक, वंश बढ़ाने के लिए पुतिन मुफ्त में देंगे ये सुविधा, वजह जान चौंक जाएंगे
रूसी अखबार रोजनबर्ग में कहा गया है कि पहले केवल बीमार लोग अपना स्पर्म स्टोर कराते थे। ताकि उनके मरने के बाद भी वंश बढ़ता रहे। लेकिन, जंग शुरू होने के बाद एकदम स्वस्थ लोग भी ऐसा कर रहे हैं।

यूक्रेन में इस साल की 24 दिसंबर को शुरू हुए युद्ध को पूरे 10 महीने महीने हो गए हैं। जब यह युद्ध शुरू हुआ था तब ऐसे दावे करने वाले लोगों की कमी नहीं थी कि ये युद्ध हफ्ते या पखवाड़े भर में समाप्त हो जाएगा। लेकिन अब कोई भी नहीं बता सकता कि यह युद्ध अब कब खत्म होगा। एक अनुमान के मुताबिक दोनों ओर से इस युद्ध में कम से कम 2 लाख सैनिकों की जान जा चुकी है या वे बुरी तरह से घायल हुए हैं। वहीं इस युद्ध में कम से कम 40 हजार आम लोग भी मारे गए हैं। इस बीच रूसी सरकार ने सैनिकों के स्पर्म को फ्रीज करने की पेशकश की है।

रूसी सरकार खर्च करेगी पैसा
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सरकार ने मेडिकल इंश्योरेंस में बदलाव करके स्पर्म फ्रीज कराने की सुविधा को मुफ्त कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक सैनिक अपने स्पर्म को क्रायोबैंक में जमा करा सकते हैं। क्रायोबैंक वो जगह होती है जहां स्पर्म, सीमन को सुरक्षित रखा जाता है। इसके लिए उन्हें पैसा खर्च करने की भी जरूरत नहीं होगी। इसका पैसा रूसी सरकार ही खर्च करेगी।

अलग से बजट बनाएगी सरकार
रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय इसके लिए बजट बनाने जा रही है। रूसी वकील संघ के प्रमुख आइगोर ट्रूनोव ने सरकारी न्यूज एजेंसी तास को बताया है कि स्वास्थ्य विभाग ने उनकी मुफ्त क्रायोबैंक और अनिवार्य मेडिकल इंश्योरेंस से बदलाव से जुड़ी अपील को स्वीकार कर लिया है। अब से यूक्रेन युद्ध में हिस्सा लेने जा रहे रूसी सैनिकों को क्रायोबैंक में अपने स्पर्म को मुफ्त में फ्रीज कराने की सुविधा मिलेगी।

बिना किसी तनाव के लड़ेंगे सैनिक
ट्रूनोव ने कहा कि उनसे कई ऐसे रूसी परिवारों ने संपर्क किया जो युद्ध में हिस्सा लेने जा रहे थे और अपना स्पर्म फ्रीज करवाना चाहते थे। रूसी सरकार फ्री सीमन फ्रीजिंग योजना से रूसी सैनिकों को युद्ध के दौरान इस बात का संतोष होगा कि उनका अगला वंश सुरक्षित है। ऐसे में रूसी सैनिक बिना किसी तनाव के यूक्रेन युद्ध में मोर्चे पर लड़ेंगे। इससे पहले सैनिकों में यह डर रहता था कि यदि युद्ध के दौरान उन्हें कुछ हो गया तो उनका वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा।

सरकार ही करेगी भुगतान
रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन ने कहा कि यदि किसी सैनिक की युद्ध में लड़ते हुए मौत हो जाती है तो सरकार, सैनिकों की पत्नियों के लिए IVF कराने के लिए भुगतान भी करेगी। राष्ट्रपति पुतिन ओर से सैन्य लामबंदी की घोषणा के बाद रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीट्सबर्ग में आईवीएफ क्लिनिक्स में आने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ने की जानकारी मिली है। ये पुरुष अपने स्पर्म को फ़्रीज करके उनसे जुड़े कागजात बनवा रहे थे ताकि भविष्य में उनकी पत्नियां उनका इस्तेमाल कर सकें।
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