रूस-यूक्रेन युद्ध: हजारों की मौत,लाखों बेघर के बीच जानिए कौन से देश हो रहे हैं मालामाल?

मॉस्को, 15 अप्रैल। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तकरीबन दो महीने से युद्ध चल रहा है। इस युद्ध में हजारों लोगों की जान जा चुकी है जबकि लाखों लोग अपने घर से बेघर हो चुके हैं। रूस की ओर से युद्ध की शुरुआत के बाद से ही पश्चिमी देशों ने कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन बावजूद इसके रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को रोकने के मूड में नहीं है। कई बूचा जैसी नरसंहार की घटनाओं ने हर किसी का दिल दहला दिया है, जहां आम लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। इस बीच अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए 800 मिलियन डॉलर के हथियारों की सप्लाई के साथ अन्य मदद का ऐलान किया है।

बड़ी मात्रा में हथियारों की हो रही सप्लाई

बड़ी मात्रा में हथियारों की हो रही सप्लाई

जिस तरह से अमेरिका और मित्र देश यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं, उसकी वजह से यूक्रेन रूस के खिलाफ युद्ध में लगातार डटा हुआ है और पीछे नहीं हटा है। युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका यूक्रेन को 2.4 बिलियन डॉलर की मदद पहुंचा चुका है। अमेरिका ने इस दौरान भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, रक्षा उपकरण आदि मुहैया कराए हैं। साथ ही एंटिक्राफ्ट सिस्टम, जैवलिन एंटि आर्मर सिस्टम, स्विचेबल ड्रोन, एयर सर्विलांस राडार, एमआई 17 हेलिकॉप्टर, 155 एमएम तोपें सप्लाई की है।

 30 देश कर रहे हैं यूक्रेन की मदद

30 देश कर रहे हैं यूक्रेन की मदद

यूक्रेन को ना सिर्फ अमेरिका बल्कि कनाडा, यूके, जर्मनी, इटली, टर्की समेत 30 देशों ने मदद मुहैया कराई है। इन देशों ने हथियार-डिफेंस सिस्टम की सप्लाई की है। इन देशों ने अपने देश की हथियार निर्माता कंपनियों की मदद से ये हथियार मुहैया कराए हैं। यूक्रेन के पड़ोसी देश चेक रिपब्लिक, पोलैंड ने भी मिलिट्री हार्डवेयर की सप्लाई की है। इसके साथ ही यूक्रेन को बड़ी मात्रा में कैश भी दिया गया है जिससे वह और जरूरी हथियारों की खरीद कर सके. 7 अप्रैल को यूरोपियन यूनियन ने 543 मिलियन डॉलर की मदद देने का ऐलान किया। जिसके बाद यूक्रेन को कुल आर्थिक मदद 1.63 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

आखिर कहां से आ रहा हथियार

आखिर कहां से आ रहा हथियार

लेकिन इन सब के बीच सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इतने लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आखिर यूक्रेन को इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों का जखीरा मुहैया कहां से कराया जा रहा है। अमेरिका और यूरोप में सैन्य हथियारों का सबसे अधिक उत्पादन होता है यहां प्राइवेट कंपनियां बड़ी मात्रा में हथियारों का निर्माण करती हैं। ऐसे में जब सरकारें सैन्य उपकरणों की मदद का ऐलान करती हैं तो ये प्राइवेट कंपनियां ही इन देशों को उपकरण मुहैया कराने का काम करती हैं।

 ब्याज के साथ लौटाना होता है पैसा

ब्याज के साथ लौटाना होता है पैसा

जो कंपनियां इन देशों को हथियार मुहैया कराती हैं उन्हें 25-30 साल के दौरान ये देश पैसा वापस करते हैं इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड के अनुसार 1 फीसदी तक का ब्याज भी इस राशि पर देना होता है। लेकिन चीन इस मामले में सिर्फ 15 साल की ही अवधि देता है। अगर देश पैसे का भुगतान नहीं करता है तो संबंधित देश को राजनीतिक विपक्षियों के विरोध का सामना करना पड़ा है। विपक्ष सवाल करता है कि आखिर हमे दूसरे देश के लिए हथियार के पैसे क्यों देने पड़ रहे हैं।

पांच सबसे बड़ी हथियार कंपनियां अमेरिका में

पांच सबसे बड़ी हथियार कंपनियां अमेरिका में

इस मामले में अमेरिका यूएन में योगादन करने से कतराता है अगर देश पैसे वापस नहीं करता है। लेकिन यूक्रेन के मामले में सीधे सैन्य मदद काफी तेज और बड़ी मात्रा में हो रही है। इस मामले में रणनीतिक ब्याज अहम किरदार निभाती है। लेकिन इस बात का भी डर बना है कि अगर रूस पीछे नहीं हटता है तो क्या होगा। लेकिन इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि युद्ध एक बड़े व्यापार का मौका है, जिससे मैन्युफैक्चरर और कॉन्ट्रैक्टर को फायदा होता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 10 सबसे बड़े हथियारों के निर्माता कंपनी में से 5 अमेरिका में हैं। लॉकहीड मार्टिन सबसे बड़ी हथियार निर्माता कंपनी अमेरिका की है।

अमेरिका की भूमिका पर सवाल

अमेरिका की भूमिका पर सवाल

रूस के हमले के बाद से ही हथियारों की बड़ी मात्रा में सप्लाई हो रही है। लेकिन इससे पहले भी ये कंपनियां छोटी मात्रा में हथियारों का निर्माण करती रहती हैं। 2017 में डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को हथियार खरीदने का लाइसेंस दियाथा, साथ ही 47 मिलियन डॉलर तक के हथियारों के आयात की अनुमति दी थी। इसका सबसे अधिक लाभ लॉकहीड को ही हुआ है। मेजर जनरल जीडी बख्शी ने बताया कि यूएस और यूरोप में हथियार बनाने की कंपनियां मुख्य रूप से प्राइवेट हैं। अमेरिका ऐसा ही करता आया है, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 25 मिलियन रूसी नागरिक मारे गए थे जबकि 7 मिलियन जर्मन लोगों की मौत हुई थी लेकिन इन दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान अमेरिकी हथियार कंपिनियों ने जमकर पैसा कमाया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+