आज से अंधेरे में डूब जाएगा फिनलैंड, रूस ने रोकी बिजली की सप्लाई, नाटो में शामिल होने का फैसला पड़ा महंगा
फिनलैंड के नाटो में शामिल होने की घोषणा के बाद रूस ने अपने इस पड़ोसी देश पर कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया हैं। रूस आज से फिनलैंड को सप्लाई होने वाली बिजली को रोकने जा रहा है।
हेल्सिंकी, 14 मई: फिनलैंड के नाटो में शामिल होने की घोषणा के बाद रूस ने अपने इस पड़ोसी देश पर कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया हैं। रूस आज से फिनलैंड को सप्लाई होने वाली बिजली को रोकने जा रहा है। हालांकि बिजली रोकने के पीछे की वजह बकाया भुगतान बताया जा रहा है।

आज से बंद होगी बिजली सप्लाई
जानकारी के अनुसार, रूस की सरकारी एनर्जी फर्म इंटर आरएओ फिनलैंड को दी जाने वाली बिजली सप्लाई को आज से बंद करने जा रही है। एनर्जी फर्म ने इसकी वजह बिजली का भुगतान न होने की बात कही है। फिलहाल फिनलैंड द्वारा भुगतान में देरी होने को लेकर कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। फिनलैंड पर अंधेरे में डूबने का खतरा ऐसे समय पर मंडरा रहा है जब देश पहले से मॉस्को की तरफ से गैस सप्लाई में कटौती की तैयारी कर रहा है। इस तनाव का कारण फिनलैंड के नाटो में शामिल होने का फैसला है।

स्वीडन से करेंगे बिजली आयात
फिनिश के सहायक आऱएओ नार्डिक ने डेलीमेल को एक बयान में कहा कि हमारे लिए यह असाधारण घटना है। हमारे 20 साल के व्यापारिक इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। वही, फिनलैंड के ग्रिड ऑपरेटर फिंगरिड ने कहा कि स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजे से बिजली की सप्लाई रोक दी जाएगी। फिंगरिड ने कहा कि रूस से आपूर्ति और बिजली को कोई खतरा नहीं है। फिनलैंड अपनी कुल बिजली खपत का मात्र 10 फीसदी हिस्सा रूस से आयात करता है। फिंगरिड ने आशा जताई कि स्वीडन से बिजली आयात और घरेलू उत्पादन से रूसी द्वारा की जाने वाली बिजली कटौती को पूरा किया जा सकता है।

गैस स्पलाई में कटौती की तैयारी
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को खतरों से निपटने के लिए सैन्य, तकनीकी और दूसरे जरूरी कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकता है। वही, फिनलैंड संभावित कटौतियों और खाने की कमी को लेकर योजना बना रहा है। बतादें कि फिनलैंड अपनी ज्यादातर गैस रूस से आयात करता है। लेकिन देश की वार्षिक ऊर्जा की खपत में गैस की हिस्सेदारी सिर्फ 5 फीसदी है। हालांकि देश पहले से मॉस्को की तरफ से गैस सप्लाई में कटौती की तैयारी कर रहा है।

रविवार को होगी औपचारिक घोषणा
इससे पहले बीते 12 मई को फिनलैंड के राष्ट्रपति शाऊली निनिस्टो और प्रधान मंत्री सना मारिन ने एक संयुक्त बयान देते हुए कहा था वे रूस की धमकियों के बावजूद बिना देरी किए सुरक्षा गठबंधन में शामिल होंगे। उन्होंने नाटो में शामिल होने का उद्देश्य देश को 'संपूर्ण विनाश' और 'सबसे अप्रिय परिणामों' से सुरक्षित रखना बताया। राष्ट्रपति सौली नीनिस्टो ने कहा कि हमारा मकसद किसी से दुश्मनी नहीं है। फिनलैंड के औपचारिक फैसले की घोषणा रविवार को की जाएगी। हालांकि औपचारिक रूप से नाटो में शामिल होने की प्रक्रिया को पूरा होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है।

फिनलैंड ने रूस को बताया जिम्मेदार
राष्ट्रपति सौली नीनिस्टो से जब यह पूछा गया कि नाटो में शामिल होने के फैसले के बाद अब वे रूस से क्या कहेंगे तो उनकी प्रतिक्रिया थी, 'आप इसका कारण बने हैं। आपको आइने में अपनी शक्ल देखनी चाहिए' फिनलैंड के इस फैसले के बाद अब रूस की सीमाओं पर पश्चिमी देशों की उपस्थिति 754 मील से बढ़कर 1584 मील तक की हो जाएगी। फिनलैंड, रूस के साथ 830 मील की सीमा साझा करता है। अब तक रूस के संग मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए वह नाटो से बाहर रहा है।

स्वीडन भी हो सकता है शामिल
ऐसा कहा जा रहा है कि अगले सप्ताह स्वीडन भी फिनलैंड का अनुसरण करते हए जल्द कोई कदम उठा सकता है। नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि गठबंधन खुली बाहों से फिनलैंड और स्वीडन का स्वागत करेगा। वही, फिनलैंड के रूस में शामिल होने की घोषणा पर क्रेमलिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि उसे जवाबी कार्रवाई के तौर पर 'सैन्य-तकनीकी' कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ेगा।












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