वॉर गेम: रूस ने शुरू किया सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास, पेंटागन और नाटो रखेगा नजर
मास्को। शीत युद्ध के बाद पहली बार रूस बड़े स्तर पर सैन्य अभ्यास कर दुनिया को अपनी ताकत अहसास करा रहा है। साइबेरिया के पूर्वी तट पर रूस के करीब 3,00,000 सैनिक मंगलवार से इस विशाल सैन्य अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जो सात दिन तक चलेगा। इस सैन्य अभ्यास में हथियारों के साथ विशाल संख्या में ना सिर्फ रुसी सैनिक दिखाई देंगे, बल्कि 1,000 से ज्यादा प्लेन, हेलीकॉप्टर, ड्रोन्स और 36,000 से ज्यादा टैंक, 80 सैन्य जहाजों के अलावा अन्य मिलिट्री व्हीकल्स भी शामिल होंगे। इसके अलावा, चीन ने भी अपने करीब 3,200 जवान, आर्म्ड व्हीकल्स और एयरक्राफ्ट को भेजा है। वहीं, मंगोलिया ने भी अपने कुछ मिलिट्री यूनिट भेजे हैं। इस मिलिट्री ड्रिल का नाम Vostok-2018 है। रूस ने इससे पहले ऐसा ही सैन्य अभ्यास 1981 में किया था, जब शीत युद्ध अपने चरम पर था। फिलहाल पेंटागन इस सैन्य अभ्यास पर अपनी पूरी नजर रखेगा। रूस के इस सैन्य अभ्यास को 'वॉर गेम' कहा जा रहा है।

क्या मकसद है इस सैन्य अभ्यास का?
रूस की सेना उस वक्त सैन्य अभ्यास कर रही है, जब मास्को और नाटो के बीच टेंशन का दौरा चल रहा है। अमेरिका की बढ़ती ताकत के बीच राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपनी मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन को बढ़ाया है, जिसमें कई नई न्यूक्लियर मिसाइलें भी शामिल है। लंदन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट, लैंड वारफेयर में लैंड वॉरफेयर के विशेषज्ञ जैक वाटलिंग ने वोस्टोक 2018 को 'कुछ हद तक बल का प्रदर्शन' बताया है। उन्होंने कहा, 'यह दिखाने का एक प्रयास है कि रूस उस स्तर पर मिलिट्री अभ्यास कर सकता है, जो नाटो के पास भी नहीं है।

चीन क्यों शामिल हो रहा है इसमें?
रूस के इस सैन्य अभ्यास में चीन के जवानों और कुछ मिलिट्री व्हीकल्स की उपस्थिति देखी जा रही है, जिसका सीधा ताल्लुक दुनिया को यह देखना है कि ये दोनों देश मिलिट्री सहयोग से लेकर हर स्तर पर एक-दूसरे के साथ है। क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव कहते हैं, 'इससे यह साबित होता है कि दोनों देश सभी क्षेत्रों में आपस में सहयोग कर रहे हैं।' वही, वाटलिंग ने कहा कि रूस दुनिया को दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उनका चीन के साथ गठबंधन हैं, लेकिन मॉस्को में इसका क्या अर्थ है इसके बारे में चिंता भी है। रूसी डिफेंस मिनिस्टर सरजेई शोइगू कह चुके हैं कि मध्य एशिया इस्लामिक कट्टरपंथी रूस की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है, वहीं चीन अपने देश में मुसलमानों को कमजोर करने और उनकी आबादी को रोकने लिए हर संभव कोशिश करने में लगा है।

नाटो ने क्या कहा?
रूस के इस सैन्य अभ्यास को लेकर नाटो ने कहा कि वे इस पर पूरी नजर रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य अभ्यास करने का अधिकार है, लेकिन इसमें जरूरी यह है कि यह ट्रांसपरेंट और प्रेडिक्टेबल तरीकों से निपटना चाहिए। नाटो के प्रवक्ता ने कहा, 'वोस्टोक (Vostok-2018) बड़े स्तर पर संघर्ष का प्रयोग करने पर रूस का ध्यान आकर्षित करता है। पिछले कुछ समय से यह हमने देखा है कि रूस एक अधिक जोरदार रूप से अपने रक्षा बजट और इसकी सैन्य उपस्थिति में तेजी से वृद्धि की है।'












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