यूक्रेन संकट के बीच रूस-जापान में गैस पर घमासान! पुतिन से पंगा लेने की तैयारी
टोक्यो, 29 मार्च: यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से पंगा लेने वाला जापान अगला देश हो सकता है। इसने अपनी कंपनियों को साफ मना कर दिया है कि रूस को गैस आयात के बदले रूबल में पैसे देने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि रूस इस समय यूक्रेन के प्रति सहानुभूति रखने वाले देशों को इसी के दम पर नकेल कसने की कोशिश कर रहा है और साथ ही अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखने का भी प्रयास कर रहा है। ऐसे में जापान का अपनी कंपनियों के लिए जारी नया फरमान पुतिन को उसके खिलाफ भी भड़का सकता है।

जापान ने कंपनियों से कहा-रूबल में नहीं करें भुगतान
18 मार्च के आंकड़ों के मुताबिक 2021 में जापान के कुल लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) के आयात में रूस का हिस्सा 9% था और कच्चे तेल में उसने कुल आयात का 4% रूस से मंगवाया था। लेकिन, यूक्रेन संकट की वजह से इस आयात पर भी आफत के बादल मंडरा रहे हैं। क्योंकि, जापान ने अपनी कंपनियों से कहा है कि रूस को उसकी मुद्रा रूबल में भुगतान करने की जरूरत नहीं है। दरअसल, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फरमान जारी कर कहा है कि जो अभी 'गैरमित्र' देश हैं, उन्हें गैस या तेल तो बेचा जा सकता है, लेकिन उसके बदले सिर्फ रूबल ही लिए जाएं, यूरो या डॉलर नहीं।
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रूस ने कही है सिर्फ रूबल में भुगतान लेने की बात
मंगलवार को जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी हिरोकाजू मातसूनो ने कहा है कि जापानी कंपनियों से कहा जाएगा कि ऊर्जा के भुगतान के लिए रूबल में पेमेंट करने की रूसी मांग को ठुकरा दें। दरअसल, यूक्रेन संकट के बाद जिस तरह से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं, उसी के बाद रूस ने अपने तेल और गैस के निर्यात के लिए रूबल में ही भुगतान अनिवार्य बना दिया है। पिछले हफ्ते जापानी वित्त मंत्री शुनिची सुजूकी ने संसद सत्र में कहा था कि सरकार मास्को का इरादा नहीं समझ पाई है या 'वो ये कैसे करेंगे।'

यूक्रेन के मसले पर रूस के खिलाफ मुखर है जापान
दरअसल, जापान ने यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद उसके खिलाफ कई दंडात्मक कार्रवाई किए हैं, जिसमें पुतिन सरकार के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ को निशाना बनाकर लगाई गई पाबंदी भी शामिल है। इसके अलावा जापान ने चेचन्या रिपब्लिक के हेड और क्रेमलिन के नजदीकी कंपनियों के अधिकारियों पर भी पाबंदियों की घोषणाएं की हैं। जापान ने रूस के सेंट्रल बैंक के खिलाफ भी कार्रवाई की है और रूस को ऑयल रिफाइनरी उपकरण बेचने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है। यही नहीं सप्लाई चेन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक की चिंताओं के नाम पर बड़ी जापानी कंपनियां, जैसे कि ट्योटा, हॉन्डा, निन्टेंडो और सोनिया ने रूस को किया निर्यात भी आधा कर दिया है।

'यूरोपीय देशों को बिना रूबल के गैस नहीं देगा रूस'
जापान ने जिस तरह से रूबल में गैस खरीदने से अपनी कंपनियों को मना किया है, इसके बाद रूस क्या करेगा यह संकेत सोमवार को ही वह दे चुका है। ग्लोबल न्यूज के मुताबिक रूस यूरोपीय देशों को मुफ्त में गैस की सप्लाई नहीं करेगा, क्योंकि जी7 के देशों ने रूबल में ऊर्जा खरीदने की उसकी मांग मानने से इनकार कर दिया है। जाहिर है कि पुतिन जापान के लिए भी यह रणनीति नहीं अपनाएंगे, इसका कोई कारण नहीं। वैसे भी जापान अमेरिका का एक सबसे नजदीकी एशियाई सहयोगी है। जापान उन देशों में शामिल है, जिसने यूक्रेन में रूसी कार्रवाई के खिलाफ बेहद सख्त स्टैंड लिया है। (कुछ तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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