यूक्रेन के बाद फिनलैंड और स्वीडन को भी नहीं छोड़ेंगे, करेंगे सैन्य हमला, जानिए अब क्यों भड़का रूस?

साल 1949 में नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन यानि नाटो का गठन किया गया था और गठन के वक्त इस संगठन का एकमात्र उद्येश्य रूस के खिलाफ एक मजबूत सैन्य गठबंधन का निर्माण करना था।

मॉस्को/कीव/वॉशिंगटन, फरवरी 26: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने अपने दो और पड़ोसी देशों फिनलैंड और स्वीडन को भी गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। रूसी विदेश मंत्रालय की तरफ से बकायदा बयान जारी करते हुए कहा है कि, अगर स्वीडन और फिनलैंड ने भी रूस के खिलाफ जाकर नाटो में शामिल होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें भी सैन्य अंजाम भुगतना होगा। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के मद्देनजर इस तरह के कदम का 'गंभीर सैन्य-राजनीतिक असर' होगा।

स्वीडन-फिनलैड को चेतावनी

स्वीडन-फिनलैड को चेतावनी

रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर अपने उन पड़ोसी देशों को गंभीर चेतावनी दी है, जो नाटो में शामिल होने का सपना देख रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़खारोवा ने कहा कि, "फिनलैंड और स्वीडन को अन्य देशों की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी सुरक्षा का आधार नहीं बनाना चाहिए और नाटो में उनके प्रवेश के हानिकारक परिणाम हो सकते हैं और उन्हें भी सैन्य और राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।" रूसी विदेश मंत्रालय ने बाद में ट्वीटर के जरिए भी स्वीडन और फिनलैंड को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी है।

नाटो को लेकर रूस की धमकी

नाटो को लेकर रूस की धमकी

रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर स्वीडन और फिनलैंड को चेतावनी देते हुए ट्वीटर पर लिखा है कि, "हम उत्तरी यूरोप में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक सैन्य गुटनिरपेक्ष नीति के लिए फिनिश सरकार की प्रतिबद्धता को एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं।" ट्वीट में आगे कहा गया है कि, 'फिनलैंड के NATO में शामिल होने के गंभीर सैन्य और राजनीतिक परिणाम होंगे।' आपको बता दें कि, स्वीडन और फिनलैंड दोनों आर्कटिक सर्कल में रूस की सीमा से जुड़ते हैं और रूस को स्वीडन और फिनलैंड को लेकर भी वही डर है, जैसा डर यूक्रेन को लेकर है। यूक्रेन के अलावा ये दोनों देश भी काफी वक्त से नाटो में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे रूस सीधे तौर पर अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

रूस की धमकी से यूएस परेशान

रूस की धमकी से यूएस परेशान

स्वीडन या फ़िनलैंड का नाटो में शामिल होने के लिए बढ़ाया गया एक कदम भी रूस के गुस्से को बुरी तरह से भड़का सकता है और रूस ने साफ कर दिया है कि, अगर ये दोनों देश ऐसा करते हैं, तो उनके खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इन सबके बीच रूस की धमकी ने अमेरिका के माथे पर चिंता की रेखाएं खींच दी हैं। अमेरिकी खुफिया अधिकारी चिंतित हैं, कि रूस शनिवार दोपहर तक यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जा कर सकता है और सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सैनिकों ने स्थानीय समयानुसार शनिवार की सुबह शहर में प्रवेश कर लिया था।

यूक्रेन भी बनना चाहता है नाटो का हिस्सा

यूक्रेन भी बनना चाहता है नाटो का हिस्सा

यूक्रेन भी लंबे अर्से से नाटो का हिस्सा बनना चाहता है और रूस हमेशा से यूक्रेन के इस फैसले का विरोध करता आया है। हालांकि, अमेरिका लगातार यूक्रेन के नाटो में शामिल होने के फैसले का समर्थन करता आया है, लेकिन नाटो के कई देशों को यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की मांग को लेकर एतराज रहा है और इसीलिए अभी तक यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया गया। आपको बता दें कि, नाटो 30 देशों का सैन्य गठबंधन है, जिसकी प्रमुख शक्ति अमेरिका ही है और फ्रांस, जर्मनी जैसे देश नाटो के एक्टिव सदस्य हैं। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार की सुबह साथी नाटो सदस्यों के साथ मुलाकात भी की थी, ताकि पूर्वी सहयोगियों को आश्वस्त किया जा सके, कि कीव में प्रवेश करने के लिए तैयार रूसी सैनिकों से उनकी रक्षा की जा सकती है। लेकिन, नाटो पहले ही मना कर चुका है, कि वो यूक्रेन में अपनी सेना को नहीं भेज सकता है।

अगले कुछ घंटों में कीव पर कब्जा

अगले कुछ घंटों में कीव पर कब्जा

यूक्रेन युद्ध के बीच सबसे ताजा स्थिति यह है कि, रूसी सैनिक राजधानी कीव में पहुंच गये हैं और भारी गोलीबारी की जा रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि, अगले 96 घंटे के अंदर 'लोहे की मजबूत दीवार' टूट जाएगी और रूस का राजधानी कीव पर कब्जा हो जाएगा। लेकिन, फिलहाल जो स्थिति नजर आ रही है, उसमें हालात और भी भयावह नजर आ रहे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा है कि, 'हमें अभी या बाद में... रूस से बात करनी ही होगी।' इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के लोगों से सावधान और अपने घरों मे ही रहने की अपील की है।

डरपोक हैं पश्चिमी देश- यूक्रेन

डरपोक हैं पश्चिमी देश- यूक्रेन

वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों को डरपोक बताया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से रूसी आक्रमण के खिलाफ और अधिक कदम उठाने का अनुरोध किया है और कहा है कि, अभी तक रूस के खिलाफ जो भी प्रतिबंध लगाए गये है, वो पर्याप्त नहीं हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि, ''मैंने 27 यूरोपीय देशों के नेताओं से बात की, कि क्या आप यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के लिए तैयार हैं? लेकिन हर नेता डरे हुए नजर आए, किसी ने भी उत्तर नहीं दिया।'' यानि, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने साफ तौर पर यूरोपीय देशों को डरपोक करार दिया है और कहा है कि, रूस अब 96 घंटे के अंदर कीव पर कब्जा कर लेगा।

क्या है नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन?

क्या है नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन?

साल 1949 में नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन यानि नाटो का गठन किया गया था और गठन के वक्त इस संगठन का एकमात्र उद्येश्य रूस के खिलाफ एक मजबूत सैन्य गठबंधन का निर्माण करना था और नाटो के गठबंधन के वक्त इसमें अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और आठ दूसरे यूरोपीय देश शामिल थे और धीरे धीरे इसमें कई और यूरोपीय देश जुड़ते चले गये और इस वक्त नाटो गठबंधन में 30 देश शामिल हैं और नाटो गठबंधन यूनाइटेड नेशंस के साथ मिलकर काम करता है। नाटो गठबंधन का मुख्यालय ब्रुसेल्स में है और इस गठबंधन की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि अगर नाटो गठबंधन में शामिल किसी भी देश पर हमला होता है, तो उसे सभी 30 देश पर हमला माना जाएगा और सभी 30 देश एकसाथ सैन्य कार्रवाई करेंगे। इसीलिए नाटो गठबंधन विश्व का सबसे मजबूत सैन्य गठबंधन है।

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