अब पाबंदियों से छटपटाने लगा है रूस, भारत को भेजा त्राहिमाम संदेश, इस चीज की मांगी मदद

नई दिल्ली, 19 अप्रैल: रूस अपने ऊपर लगी चौतरफा पाबंदियों की जाल में घिरता जा रहा है। ऊपर से लॉजिस्टिक की उलझन ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है। इसकी वजह से रूस में मेडिकल उपकरण कम पड़ने लगे हैं और अब वह इसके लिए भारत की ओर देखने लगा है। 22 तारीख को इस संबंध में दोनों देशों के मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के बीच बातचीत होने वाली है, जिसमें रूस के इस संकट के समाधान का कोई उपाय तलाशा जा सकता है। हालांकि, रूस के साथ कारोबारी रिश्ता बढ़ाने में भारत का भी हित छिपा है और इसलिए दोनों के बीच नई जुगलबंदी बनती दिख रही है। उधर इंग्लैंड ने रूस के खिलाफ पाबंदियों को और भी ज्यादा सख्त करने का मिशन शुरू कर दिया है।

भारत से और ज्यादा मेडिकल उपकरण मंगवाना चाहता है रूस

भारत से और ज्यादा मेडिकल उपकरण मंगवाना चाहता है रूस

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने भारत से और ज्यादा मेडिकल उपकरण की मांग की है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से यूक्रेन पर हमले के आदेश दिए जाने के बाद से रूस मुश्किल पाबंदियां झेल रहा है और लॉजिस्टिक की भी समस्या पैदा हुई है, जिसके चलते यूरोप और चीन से उसका आयात बहुत ही ज्यादा घट गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के एक फोरम कॉर्डिनेटर राजीव नाथ के मुताबिक इस संबंध में 22 अप्रैल को दोनों देशों के मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के बीच वर्चुअल बैठक होने वाली है, जिसमें सप्लाई बढ़ाने को लेकर चर्चा होने वाली है। इस कार्यक्रम के होने की पुष्टि बिजनेस रसिया ने भी किया है, जो कि द्विपक्षीय रिश्तों को बढ़ावा देने वाला एक बिजनेस ग्रुप है।(ऊपर की तस्वीर-प्रतीकात्मक)

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    2 अरब रुपये तक निर्यात ले जाना चाहता है भारत

    2 अरब रुपये तक निर्यात ले जाना चाहता है भारत

    भारत को भी उम्मीद है कि इस मौके पर वह रूस को होने वाला अपना निर्यात बढ़ा सकता है। इस समय दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में भुगतान करने के सिलसिले में काम काम कर रहे हैं। शीत युद्ध के दौरान भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। रूस अभी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए वह भी इसे एक बेहतर मौके के तौर पर देख रहा है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन की वजह से रूस को अलग-थलग करने पर तुले हुए हैं। ऐसे में भारत के रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने को लेकर भी ये देश भारत की आलोचना कर रहे हैं। राजीव नाथ ने कहा है कि आज की तारीख में रूसी मार्केट में भारत की कोई खास भूमिका नहीं है। लेकिन, मौजूदा हालात में वह इस साल इसमें 10 गुना इजाफा करके 2 अरब रुपये तक ले जाना चाहता है।

    रूस पर पाबंदियां और सख्त करने की तैयारी

    रूस पर पाबंदियां और सख्त करने की तैयारी

    इस बीच रूस ने यूरोपीय देशों के खिलाफ जैसे को तैसा वाली रणनीति पर काम करने पर और जोर दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक उसने 36 यूरोपीय राजनयिकों को निकाल दिया है। जबकि, अमेरिका के सहयोगियों का भी रूस को लेकर बर्ताव सख्त बना हुआ है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन मंगलवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और बाकी वर्ल्ड लीडर के साथ रूस के खिलाफ पाबंदियों को और सख्त करने को लेकर बातचीत करने वाले हैं। यह जानकारी जॉनसन के प्रवक्ता की ओर से दी गई है।

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