भारत को दरकिनार कर, रूस-पाकिस्‍तान और चीन आए एक साथ, तालिबान के जरिए करेंगे आईएसआईएस का खात्‍मा

भारत को दरक‍िनार रूस, पाकिस्‍तान और चीन अपनी दोस्‍ती को और ज्‍यादा मजबूत कर रहे हैं। इसी के चलते ये तीनों देश अफगानिस्‍तान में मौजूद इस्‍लामिक स्‍टेट(आईएसआईएस) का खात्‍मा करने में जुट गए हैं।

काबुल। भारत को दरक‍िनार रूस, पाकिस्‍तान और चीन अपनी दोस्‍ती को और ज्‍यादा मजबूत कर रहे हैं। इसी के चलते ये तीनों देश अफगानिस्‍तान में मौजूद इस्‍लामिक स्‍टेट(आईएसआईएस) का खात्‍मा करने में जुट गए हैं। तीनों देशों ने इस्‍लामिक स्‍टेट के खिलाफ इस अभियान में तालिबान की मदद लेने की बात कही है। वहीं भारत हमेशा से ही यह बात कहता रहा है कि अफगानिस्तान में सबसे बड़ा खतरा तालिबान से है। तीन देशों के साथ आने का अप्रत्‍यक्ष प्रभाव यह होगा कि अफगानिस्‍तान में पाकिस्‍तान को खुद की स्थिति बेहतर करने में मदद मिलेगी। एक तरफ भारत इससे कमजोर होगा तो वहीं दूसरी तरफ भारत और रूस के मजबूत रिश्‍तों से इसमें आंच भी आ सकती है।

भारत को दरकिनार कर, रूस-पाकिस्‍तान और चीन आए एक साथ, तालिबान के जरिए करेंगे आईएसआईएस का खात्‍मा

आपको बताते चले कि बीते मंगलवार को ही चीन, पाकिस्तान और रूस ने अफगानिस्तान के हालातों को लेकर मॉस्को में मुलाकात की थी। टीओआई की खबर के मुताबिक अफगानिस्तान सरकार ने ऐसे किसी कदम का कड़ा विरोध किया है, पर इसके बावजूद ये तीनों देश अफगानिस्तान के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। मास्‍को में हुई बातचीत के बाद तीनों देशों ने बयान जारी करते हुए कहा कि अगली बार किसी भी ऐसी बातचीत के लिए अफगानिस्‍तान के प्रतिनिध को जरूर शामिल किया जाएगा।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन(ओआरएफ) में रूस के जानकार नंदन उन्नीकृष्णन ने पहले कहा था कि मौजूदा दौर में भारत और रूस का आपसी संवाद सीमित होता जा रहा है। इन हालातों में रूस का यह कदम भारत के साथ उसके संबंधों को बिगाड़ सकता है। आपको बताते चलें कि पिछले दिनों ही भारत और रूस के बीच 6 खरब रुपए के रक्षा सौदे पर रजामंदी भरी थी।

ऐसे में अगर रूस और चीन अपने अफगानिस्‍तान में हस्‍तक्षेप के रूख पर कायम रहते हैं और अमेरिका इस फैसले के खिलाफ संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा काउसिंल में वीटों नहीं करता है तो हो सकता है कि उच्‍च स्‍तर के तालिबानी नेताओं का नाम संयुक्‍त राष्‍ट्र की सुरक्षा परिषद से हटाया जा सकता है। वहीं अफगानिस्‍तान पहले ही यूएनएससी से तालिबान के नए प्रमुख का नाम भी प्रतिबंधित नेताओं की सूची में शामिल करने के लिए कह चुका है। इसके जरिए सिर्फ भारत की चिंता नहीं बढेगी बल्कि अमेरिका को भी घेरने की तैयारी तीनों देश कर रहे हैं।

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