दुनिया में बढ़ती रुपये की चमक, 18 देशों में इंडियन करेंसी में कारोबार, दक्षिण एशिया में बन पाएगा दबदबा?
श्रीलंका और मालदीव पिछले कई सालों से भारत सरकार को रुपये में कारोबार करने के लिए मनाने की कोशिश करते आए हैं। लेकिन, अब जब भारत ने इजाजत दे दी है, तो ये दोनों देश इसकी चर्चा भी नहीं कर रहे हैं।

Rupee going global: यूक्रेन में पिछले एक साल से चल रहे अंतहीन संघर्ष का नतीजा यह है, कि रूस पर एकतरफा अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी प्रतिबंधों ने भारत और चीन जैसे देशों को अमेरिकी डॉलर, जिसे दुनिया का आरक्षित मुद्रा माना जाता है, उसमें व्यापार से दूर जाने के लिए मजबूर कर दिया है।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने भारत और चीन को भारी डिस्काउंट पर तेल बेचने का ऑफर दिया, जिसे दोनों ही पड़ोसी देशों ने दोनों हाथों से भुनाया। लिहाजा, रूस के ऑफर ने भारतीय रुपये को डॉलर की तरह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बनने का एक बड़ा मौका दे दिया और भारत सरकार ने भी इस मौके को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है।
यह पहली बार नहीं है, कि भारतीय रुपया वैश्विक हो रहा है। 60 के दशक में भी, मलेशिया, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों ने भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल किया था और उस वक्त भारतीय रुपये को 'खाड़ी रुपया' तक कहा जाता था। लेकिन, समय के साथ इन देशों ने भारतीय रुपये की जगह अपनी मुद्राओं में व्यापार शुरू कर दिया और भारतीय रुपया खाड़ी में अपना वर्चस्व खो बैठा।

हालांकि, यूक्रेन संकट से पहले भी, पड़ोसी देश जैसे मालदीव, श्रीलंका और कभी-कभी बांग्लादेश ने भी भारतीय रुपये में व्यापार करने या एक आम 'दक्षिण एशियाई मुद्रा' चलाने के लिए फैसिलिटी बनाने की मांग की है।
और आज भी, द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से, भारतीय रुपया पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में एक स्वीकृत मुद्रा है, लेकिन ये देश इसे किसी तीसरे देश के साथ व्यापार करने के लिए उपयोग नहीं कर सकते हैं।
भारतीय रुपये का उपयोग अन्य पड़ोसी देशों में भी अनौपचारिक रूप से किया जाता है और स्वीकार किया जाता है।
दक्षिण एशियाई करेंसी कंसेप्ट क्या है?
अगर भारतीय रुपये में कारोबार होता है, तो श्रीलंका, बांग्लादेश और मालवीद जैसे देशों को काफी फायदा होगा और इन देशों पर डॉलर की मजबूती का कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि ये देश बहुत हद तक आयात और निर्यात के लिए भारत पर निर्भर रहे हैं।
लिहाजा पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद (मालदीव) और महिंदा राजपक्षे (श्रीलंका) भारतीय रुपये में कारोबार के विचार के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने सार्क शिखर सम्मेलन और भारतीय नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता में कई बार रुपये में कारोबार की संभावना जताई थी। हालांकि, उन्हें भारत की तरफ से ही सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

यहां तक कि, जब ईरान के ऊपर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया, फिर भी श्रीलंका और मालदीव ईरान से तेल खरीदने के लिए भारतीय रुपये में भुगतान करना चाहते थे, लेकिन ये संभव नहीं हो पाया।
लिहाजा, अब इस तरह का बैकग्राउंड होने के बाद, अब जब भारत अपनी करेंसी को ग्लोबल करने चला है, तो यह देखना दिलचस्प होगा, कि भारत के ये पड़ोसी देश किस तरह का रिस्पांस देते हैं।
ग्लोबल साउथ में मिलेगी कामयाबी?
भारत ने अब जब अपने रुपये को ग्लोबल मार्केट में उतार दिया है, तो श्रीलंका और मालदीव जैसे देश ने इसे एक बड़े मौके की तरह भुनाया जरूर है, लेकिन अब इन देशों ने पहले की तरह द्विपक्षीय व्यापार में या फिर तीसरे देशों के साथ व्यापार में रुपये के जरिए कारोबार करने की मंशा जताना बंद कर दिया है।
हालांकि, भारत ने रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार में भारतीय रुपये के जरिए कारोबार की संभावना तलाश ली हो, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब जैसे अन्य तेल बेचने वाले देशों सहित 35 देशों ने कम से कम द्विपक्षीय स्तर पर भारतीय रुपये में कारोबार करने को लेकर इच्छा जता दी है।
वहीं, मलेशिया भारतीय रुपये में द्विपक्षीय व्यापार की शुरूआत करने वाला पहला देश बन गया है।
भारतीय रुपये में व्यापार करने से भारत और इसके व्यापारिक भागीदारों, दोनों को काफी लाभ होता है। डॉलर से व्यापार करने पर, व्यापार में शामिल दोनों ही देशों को डॉलर में एक्सचेंज करने के लिए दोनों ही सिरों पर एक्सचेंज रेट का भुगतान करना पड़ता है, जिसकी वजह से सामानों की कीमत बढ़ जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर भारत और सऊदी अरब तेल के लिए डॉलर में व्यापार करते हैं, तो भारत को डॉलर खरीदने के लिए एक्सचेंज रेट का भुगतान करना होता है, फिर भारत सऊदी अरब को डॉलर देता है और फिर सऊदी अरब को उस डॉलर को एक्सचेंज कर, अपनी मुद्रा खरीदनी होती है। यानि, दो सिरों पर एक्सचेंज रेट लगता है, जिसका असर सामानों की कीमत पर पड़ता है।

श्रीलंकाई बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर श्रीलंका डॉलर की जगह कारोबार करने के लिए इंडियन करेंसी का इस्तेमाल करता है, तो श्रीलंका को लेनदेन की लागत में 50 प्रतिशत की बचत होगी।
मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ एक बैठक में, श्रीलंकाई उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोड़ा ने भारतीय रुपये में द्विपक्षीय व्यापार करने पर चर्चा की है।
वहीं, कोलंबो में देश के वाणिज्यिक लेनदारों के लिए एक संयुक्त प्रस्तुति में, श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे और ट्रेजरी सचिव महिंदा सिरिवर्दना, एक कदम आगे बढ़कर कर्ज के 'पुनर्गठन के लिए रुपये-ऋण पर विचार करने की इच्छा का संकेत दिया है।
पड़ोसी देशों के लिए क्यों है फायदेमंद?
भारतीय मुद्रा में व्यापार के लिए, किसी भी देश को भारत के अधिकृत बैंक में एक वोस्त्रो अकाउंट खोलना होगा और उसके बाद वो भारतीय रुपये में कारोबार कर सकता है। भारत के पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति पिछले काफी वक्त से खराब रही है, जिनमें श्रीलंका, म्यामांर और बांग्लादेश भी शामिल है। लिहाजा, इन देशों के लिए भारतीय रुपये में कारोबार करना वरदान साबित होगा। वहीं, अगर भारत के साथ संबंध अच्छे होते, तो आज की तारीख में पाकिस्तान इसका जबरदस्त फायदा उठा सकता था।

अगर पाकिस्तान भारतीय रुपये में कारोबार करता, तो वो सिर्फ एक महीने में महंगाई को काफी कम कर सकता था। हालांकि, पाकिस्तान के ऐसा करने की संभावना नगन्य है।
हालांकि, इनके बाद भी भारतीय रुपये को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्वीकार करने के लिए, इसे अज्ञात क्षेत्र के माध्यम से लंबी दूरी की यात्रा करनी होगी।
भारत निश्चित तौर पर डॉलर, यूरो और पाउंड-स्टर्लिंग पर देशों की निर्भरता को खत्म कर सकता है, लेकिन ऐसा होने के लिए देशों को भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और संभावनाओं का अध्ययन करना होगा।
भारत को भी इसी तरह का अध्ययन करना चाहिए और व्यापारिक भागीदारी को तेजी से बढ़ाना चाहिए, और साथ ही ऐसे तंत्र बनाने चाहिए, जो इस तंत्र के विकास की बारीकी को समझते हुए आवश्यक कदम उठाए।
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