Roman Gofman Mossad Chief: कौन हैं मोसाद के नए चीफ जिनके नाम पर मच गया इजरायल में बवाल?
Roman Gofman Mossad Chief: इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद को जल्द ही नया प्रमुख मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को मोसाद का अगला चीफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। गोफमैन 2 जून से मौजूदा प्रमुख David Barnea की जगह लेंगे, जिनका पांच साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
हालांकि यह नियुक्ति जितनी अहम मानी जा रही है, उतनी ही विवादों में भी घिर गई है। एक ओर जहां सरकार और सेना के शीर्ष नेतृत्व ने गोफमैन की जमकर सराहना की है, वहीं दूसरी ओर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Benjamin Netanyahu ने बांधे तारीफों के पुल
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गोफमैन की नियुक्ति की घोषणा करते हुए उन्हें 'साहसी, रचनात्मक और असाधारण अधिकारी' बताया। उन्होंने कहा कि गोफमैन ने युद्ध के दौरान लीक से हटकर सोचने और कठिन परिस्थितियों में प्रभावशाली नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। नेतन्याहू ने भरोसा जताया कि उनकी अगुवाई में मोसाद इजरायल की सुरक्षा को और मजबूत करेगा। हालांकि, इस नियुक्ति का विरोध इजरायल के अंदर ही बड़े पैमाने पर हो रहा है।
इजराइली सेना इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ इयाल जमीर ने भी इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गोफमैन का सैन्य करियर बेहद शानदार रहा है और वह इस पद के लिए पूरी तरह योग्य हैं। जमीर ने यहां तक कहा कि यदि उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं मिलती, तो वे IDF के शीर्ष पद के भी मजबूत दावेदार हो सकते थे।
Roman Gofman Mossad Chief: रोमन की नियुक्ति का भारी विरोध
इस नियुक्ति को लेकर विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। मौजूदा मोसाद चीफ डेविड बार्निया ने गोफमैन की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए उन पर शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। बार्निया का कहना है कि गोफमैन का व्यवहार इस महत्वपूर्ण पद के अनुरूप नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी ओरी एलमाकायस ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस नियुक्ति को "खतरनाक" बताते हुए इसे रद्द कराने तक की बात कही है। एलमाकायस का मानना है कि गोफमैन की नियुक्ति इजराइल की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
Mossad के प्रमुख पदों की नियुक्ति पर रहती है दुनिया की नजर
मोसाद जैसे संवेदनशील और रणनीतिक संगठन के प्रमुख की नियुक्ति हमेशा बेहद अहम होती है, क्योंकि यह एजेंसी वैश्विक स्तर पर खुफिया ऑपरेशंस और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस पद पर किसी भी विवादास्पद नियुक्ति का असर देश की सुरक्षा नीतियों पर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें 2 जून पर टिकी हैं, जब रोमन गोफमैन आधिकारिक रूप से मोसाद की कमान संभालेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने विरोधियों की चिंताओं को कैसे संबोधित करते हैं और एजेंसी को किस दिशा में आगे ले जाते हैं।














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