अंतरिक्ष से गिरते रॉकेट को हेलीकॉप्टर की मदद से किया गया 'कैच', सामने आया VIDEO
नई दिल्ली, 4 मई: इंसान अब स्पेस सेक्टर में काफी ज्यादा आगे बढ़ गया है। जिस वजह से आए दिन कोई ना कोई देश या कंपनी अपने रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजती रहती है। एक बार जब कोई रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा जाता है, तो वो सेटेलाइट को वायुमंडल से ऊपर भेजकर नष्ट हो जाता है, लेकिन अब अमेरिकी लॉन्च फर्म रॉकेट लैब यूएसए इंक ने एक नया कारनाम किया है। जिससे स्पेस सेक्टर में नई क्रांति आएगी। (वीडियो-नीचे)

अरबों रुपये बचेंगे
कंपनी का मानना है कि रॉकेट जब सेटेलाइट या अन्य किसी चीज को स्पेस में भेजता है, तो वो पृथ्वी पर गिरकर नष्ट हो जाता है। ऐसे में अगर गिरते रॉकेट को बचा लिया जाए तो कंपनी के अरबों रुपये बच जाएंगे। इसके लिए हाल ही में एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया, जिसकी मदद से हवा में ही गिरते रॉकेट को केबल की मदद से पकड़ लिया गया। हालांकि बाद में सुरक्षा कारणों से पायलट ने उसे छोड़ दिया, लेकिन ये टेस्ट स्पेस सेक्टर में मील का पत्थर साबित होगा।

लगा रखा था पैराशूट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूजीलैंड से सुबह 10:50 बजे (2250 GMT) पृथ्वी की कक्षा में 34 उपग्रह भेजे गए। इसके बाद चार मंजिला लंबा इलेक्ट्रॉन बूस्टर चरण पृथ्वी की ओर तेज गति से नीचे आने लगा। कंपनी ने इसमें एक पैराशूट पहले ही इंस्टाल कर रखा था, जो तय वक्त पर खुला और उसने रॉकेट की रफ्तार की धीमा कर दिया।

महासागर में गिरा
इसके बाद प्रशांत महासागर के ऊपर एक लंबी केबल की मदद से रॉकेट को पकड़ा गया। इस बीच कंट्रोल सेंटर में सभी लोग उत्साहित हो गए और जमकर तालियां बजीं। हालांकि ये खुशी छड़ भर की ही थी। रॉकेट को पकड़ने के बाद कुछ ही देर में इसे छोड़ दिया गया, जो जाकर महासागर में गिरा। बाद में उसे नाव की मदद से निकाल लिया गया।

'बहुत मुश्किल काम था'
कंपनी ने कहा कि ये टेस्ट प्रोजेक्ट था, इस वजह से हेलीकॉप्टर से रॉकेट को पकड़ने के बाद उसे छोड़ दिया गया। अब कंपनी इसे सुरक्षित बनाने के लिए और काम करेगी। ये टेस्ट काफी हद तक सफल रहा। कंपनी के सीईओ पीटर बेक के मुताबिक ये बहुत ही जटिल काम था। उन्होंने इस काम की तुलना 'सुपरसोनिक बैले' से की है।












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