इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विश्वसनीय और समान विचारधारा वाले पाटनर्स को साथ काम करने की आवश्यकता है :अमेरिकी राजदूत
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विश्वसनीय और समान विचारधारा वाले पाटनर्स को साथ काम करने की आवश्यकता है :अमेरिकी राजदूत
नई दिल्ली। यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (USIBC) की मेजबानी में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन कि शुरुआत मंगलवार को हुई। बुधवार को समिट का दूसरा और आखिरी दिन है। इस साल काउंसिल के गठन की 45वीं वर्षगांठ है। भारत में अमेरिका के राजदूज केन जस्टर ने इंडिया आइडियाज समिट में कहा कि कोई भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संघर्ष नहीं करना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमें इंडो-पैसफिक रीजन के लिए दिशानिर्देशों, रेड लाइन्स और अन्य तरीकों को विकसित करने के लिए विश्वसनीय और समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम करने की आवश्यकता है।


बता दें हिंद महासागर और प्रशांत यानी प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर जो समुद्र का एक हिस्सा बनता है, उसे हिंद प्रशांत क्षेत्र कहलाता है। विशाल हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सीधे जलग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाले देशों को 'इंडो-पैसिफिक देश' कहा जा सकता है। इसके अंतर्गत एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र दक्षिण चीन सागर आता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अमेरिका अपनी वैश्विक स्थिति को पुनर्जीवित करने के लिये इसे अपनी रणनीति का एक हिस्सा मानता है, जिसे चीन द्वारा चुनौती दी जा रही है। ट्रंप द्वारा उपयोग किये जाने वाले 'एशिया-प्रशांत रणनीति'का अर्थ है कि भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य प्रमुख एशियाई देशों, विशेष रूप से जापान और ऑस्ट्रेलिया, 'शीत युद्ध' के बढ़ते प्रभाव के नए ढाँचे में चीन को रोकने में शामिल होंगे।













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