जमीन पर गाड़ी चला सकती है दुर्लभ 'सोने की मछली'! मछली की इस खासियत से वैज्ञानिक हैरान

दुर्लभ माने जाने वाली गोल्ड फिश के पास वास्तव में गाड़ी चलाने की क्षमता होती है और इजरायली वैज्ञानिकों ने इसे साबित किया है।

तेल अवीव, जनवरी 09: गोल्डेन फिश को याद रखना भी अच्छी बात नहीं मानी जाती है और गोल्डेन फिश को लेकर जो भी जानकारी है, इंसानों के लिए वो जानकारियां काफी खराब ही हैं। बेशक सोने की तरफ दिखने वाली ये मछली काफी दुर्लभ हैं, लेकिन गोल्डेन फिश इंसानों के लिए कम से कम काफी खतरनाक मानी जाती हैं, लेकिन गोल्डेन फिश को लेकर इजरायली वैज्ञानिकों ने जो दावा किया है, उसे बहुत लोग मजाक समझेंगे, लेकिन ये दावा प्रयोगशाला में रिसर्च के बाद किया गया है।

इजरायली वैज्ञानिकों का दावा

इजरायली वैज्ञानिकों का दावा

इजरायल के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि, सुनहरी मछली, जिसे गोल्डेन फिश कहा जाता है, वो हमारा नजरिया बदल सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि, सुनहरी मछली वास्तव में एक वाहन चला सकती है! वो भी जमीन पर! वैज्ञानिकों ने कहा कि, सुनहरी मछली के लिए जमीन पर वाहन चलाना स्पष्ट रूप से एक बड़ी चुनौती थी। तकनीकी शब्दों में इसे 'डोमेन ट्रांसफर मेथडोलॉजी' कहा जाता है। जो यह जांच करता है, कि कोई विशेष प्रजाति अपने पर्यावरण के बाहर कार्य करने में सक्षम है या नहीं।

बेन-गुरियन विश्वविद्यालय में प्रयोग

बेन-गुरियन विश्वविद्यालय में प्रयोग

गोल्डेन फिश को लेकर यह प्रयोग इजराइल में बेन-गुरियन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस टीम का नेतृत्व प्रोफेसर रोनेन सेगेव ने किया है। अपने प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने पहियों पर पानी की टंकी बनाई थी और इसे इस तरह से डिजाइन किया गया था, कि सुनहरी मछली कैसे तैरती है, उसके अनुसार पहिए चल सकते थे।शोधकर्ताओं ने तब सुनहरी मछली को वाहन चलाना सिखाया।

गोल्डेन फिश ने किया कमाल

गोल्डेन फिश ने किया कमाल

रिसर्चर्स ने कहा कि, गोल्डेन फिश ने असल में कमाल कर दिया है। सुनहरीमछली ने जल्द ही अपनी और वाहन की गति के बीच संबंध निर्धारित करना सीख लिया। फिर, मछली के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया गया था और गुलाबी बोर्ड को छूने के लिए उन्हें वाहन को नेविगेट करना था। और वैज्ञानिक उस वक्त आश्चर्यकित रह गये, जब उन्होंने देखा कि, केवल कुछ दिनों के प्रशिक्षण के बाद, सुनहरी मछली बोर्ड को छूने के लिए वाहन को नेविगेट करने में सक्षम थी। ये मछलियां तब भी ऐसा करने में सक्षम थीं, जब उन्हें कमरे में अलग-अलग शुरुआती बिंदु दिए गए थे।

मछली में है नेविगेशन की क्षमता

मछली में है नेविगेशन की क्षमता

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि, नेविगेशन की क्षमता को समझना या नेविगेशन की क्षमता अलग अलग प्रजातियों में है और वो सहजता से इसे सीखे भी सकते हैं। यह स्टडी बिहेवियरल ब्रेन रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है और मजेदार तथ्य ये है कि, प्रयोग के लिए चुनी गई छह सुनहरी मछलियों का नाम प्राइड एंड प्रेजुडिस के पात्रों के नाम पर रखा गया था। यह पाया गया कि मिस्टर डार्सी और मिस्टर बिंगले सबसे अच्छी गाड़ी चला सकते थे।

दुर्लभ मानी जाती है 'गोल्डेन फिश'

दुर्लभ मानी जाती है 'गोल्डेन फिश'

आपको बता दें कि, गोल्डेन फिश को काफी खतरनाक और दुर्लभ माना जाता है और इस मछली की कीमत काफी ज्यादा होती है। पिछले साल जून महीने में अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के आरकंसॉ में रहने वाला एक शख्स जब मछली पकड़ रहा था, तब उसके हाथ में दुर्लभ 'गोल्डेन फिश' लगी थी। इस मछली को वैसे बास कहा जाता है, जबकि इसे वैज्ञानिक बेहद दुर्लभ मछली मानते हैं और ये लाखों मछलियों में से एक होती है। रिपोर्ट के मुताबिक जोश रॉजर नाम का शख्स जब मछली पकड़ रहा था तब उसक जाल में गोल्डेन मछली फंस गई थी, लेकिन उसने गोल्डेन फिश को बीमार समझकर पानी में फेंक दिया था।

बेहद दुर्लभ होती है बास मछली

बेहद दुर्लभ होती है बास मछली

वैज्ञानिकों के मुताबिक बास मछली लाखों में एक पाई जाती है और इसका मिलना किस्मत की ही बात होती है और जोश रॉजर की किस्मत भी कुछ देर के लिए उसके ऊपर मेहरबान हुई थी। बास मछली का रंग सुनहरा यानि सोने के रंग जैसा होता है, इसीलिए इसे सोने की मछली भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मछली का रंग जैंकोक्रोमिज्म की वजह से बदल गया था। ये एक तरह का शरीर के अंदर चल रहे किसी खास कैमिकल की वजह से होता है। मछली का रंग भले ही सुनहरा हो जाता है, लेकिन वो पूरी तरह से स्वस्थ रहती है। बॉयलॉजिस्ट जॉन स्टीन के मुताबिक जेनेटिक गड़बड़ी की वजह से मछली का रंग बदल जाता है। वहीं, मछली पकड़ने वाले जोश रॉजर ने बाद में कहा कि उन्होंने सोचा कि मछली बीमार है, इसीलिए उन्होंने फोटो लेने के बाद उसे वापस पानी में छोड़ दिया।

गलती का हुआ अहसास

गलती का हुआ अहसास

मछली पकड़ने वाले जोश रॉजर ने मछली के साथ फोटो लेने के बाद उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दिया, जिसके बाद उनके फोटो पर कई कमेंच आने लगे और लोगों की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली थी, जिसने जोश रॉजर को अफसोस में भर दिया। लोगों के कमेंट से जोश रॉजर को पता चला कि उन्होंने जिस मछली को वापस पानी में छोड़ा है, वो कोई साधारण मछली नहीं थी, बल्कि लाखों में पाई जाने वाली वो एक दुर्लभ मछली थी। जिसे पानी में वापस छोड़कर उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है। इस मछली का वजन करीब एक किलो था और लंबाई करीब 16 इंच थी।

पीले रंग का पेंग्विन भी दिखा था

पीले रंग का पेंग्विन भी दिखा था

सोने की मछली के हाथ आने से पहले एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने पीले रंग के पेग्विन की तस्वीर खींची थी, जिसने पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया था। फोटोग्राफर जॉर्जिया के टूर पर गया हुआ था, जहां उसने पीले रंग की पेंग्विन को देखा था। अमूमन पेंग्विन काले-सफेद रंग के होते हैं, जिनके सिर पर पीले रंग का निशान बना होता है। पेंग्विन की तस्वीर लेने वाले फोटोग्राफर का नाम यीव्स ऐडम्स था, जिन्होंने पीले रंग के पेंग्विन की अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक में फोटो खिंची थी। उस फोटो में पीले रंग का पेंग्विन पानी में तैरता दिख रहा था। माना गया है कि पीले रंग का पेंग्विन पहली बार दुनिया में देखा गया था।

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