Ramaphosa Vs Trump: जिस फोटो को दिखाकर ट्रंप ने अफ्रीकी राष्ट्रपति को चमकाया वो फर्जी निकली, US की किरकिरी
Ramaphosa Vs Trump: हाल ही में एक घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वे साउथ अफ्रीका में श्वेत किसानों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं। यह दावा ओवल ऑफिस में एक बैठक के दौरान किया गया, जहां ट्रंप ने सबूत के तौर पर एक वीडियो का स्क्रीनशॉट पेश किया और यही वो ब्लंडर था वो व्हाइट हाउस कर बैठा। दरअसल ट्रंप ने जो वीडियो मीडिया की मौजूदगी में दिखाकर रामाफोसा की खिंचाई की वो दरअसल वीडियो साउथ अफ्रीका का है ही नहीं बल्कि वो वीडियो रिपब्लिक ऑफ कांगो का था, जिससे ट्रंप के आरोपों की प्रामाणिकता को लेकर विवाद पैदा हो गया। अब सोशल मीडिया से लेकर मैनस्ट्रीम मीडिया तक ट्रंप की किरकिरी हो रही है।
कैस खुली ट्रंप की पोल?
वीडियो को लेकर जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दी, जिस समाचार एजेंसी से स्क्रीनशॉट लिया गया था उसने 3 फरवरी को प्रकाशित वीडियो को शुरू में ट्रंप ने गलत समझा था। रॉयटर्स की फैक्ट-चैक टीम ने बताया कि फुटेज में कांगो के गोमा में मानवीय कोशिशें दिखाई गई थीं, जहां मानवाधिकार कार्यकर्ता रवांडा द्वारा समर्थित एम-23 विद्रोहियों के साथ संघर्ष में मारे गए लोगों के शवों को संभालते हुए देखे गए थे। इस खुलासे ने ट्रंप और व्हाइट हाउस की रिसर्च टीम के काम पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और ये बताता है कि उनके पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।

ट्रम्प की टीम से हुआ डबल ब्लंडर
स्थिति को और बेबुनियाद बनाते हुए ट्रंप ने अमेरिकन थिंकर नामक एक रूढ़िवादी ऑनलाइन पत्रिका के ब्लॉग पोस्ट का भी हवाला दिया, जिसमें साउथ अफ्रीका और कांगो दोनों में नस्लीय तनाव और संघर्षों पर चर्चा की गई थी। ब्लॉग पोस्ट में केवल "यूट्यूब स्क्रीन ग्रैब" के रूप में लेबल की गई एक फोटो शामिल थी और कांगो की घटना के रॉयटर्स वीडियो से जुड़ी हुई थी, जो साउथ अफ्रीका में कथित नरसंहार से संबंध होने का गलत दावा कर रही थी। व्हाइट हाउस ने अभी तक इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि अमेरिकन थिंकर के प्रबंध संपादक एंड्रिया विडबर्ग ने स्वीकार किया कि ट्रंप ने "तस्वीर की गलत पहचान की है।"
ट्रम्प और रामफोसा के बीच बहसबाजी
अपनी बैठक के दौरान, ट्रम्प ने रामफोसा को स्क्रीनशॉट दिखाते हुए बार-बार "डेथ" शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे व्हाइट हाउस में माहौल गरमा गया। रामफोसा ने आरोपों का शांत भाषा में खंडन भी किया, और अफ्रीका में व्यापक हिंसा पर जोर दिया। रामफोसा के मुताबिक उनके देश में जो हिंसा चल रही है उससे सभी समुदाय बराबर से प्रभावित हैं। उन्होंने ये भी बताया कि हिंसा केवल श्वेत किसानों तक सीमित नहीं थी; अश्वेत आबादी को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन ट्रंप ने उन्हें दोबारा घेरने की कोशिश की तो रामफोसा ने तंज मारने के अंदाज में कहा कि- हमारे पास आपको गिफ्ट में देने के लिए प्लेन नहीं है। इस बात से खिसयाए ट्रंप ने कहा कि यदि आप प्लेन गिफ्ट में देते तो मैं उसे जरूर रख लेता। रामफोसा का इशारा ट्रंप को कतर से तोहफे में मिले आलीशान प्लेन की ओर था जिसके बाद ट्रंप ने कतर की भर-भरकर तारीफ की थी।
साउथ अफ्रीका से क्यों चिढ़ते हैं ट्रंप
दोनों राष्ट्रप्रमुखों में बहसबाजी की ये घटना अमेरिका और साउथ अफ्रीका के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने के लिए रामफोसा की कोशिशों के बीच हुई। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों का पुराना इतिहास रहा है, ट्रम्प अक्सर साउथ अफ्रीका की ग्राउंड पॉलिसी, इंटरनेशनल पॉिलिसी और श्वेत अल्पसंख्यकों के साथ देश के भीतर होने वाले रवैये को लेकर खफा रहते हैं और उनकी खुलकर आलोचना भी करते हैं। यह पहला मौका था कि ट्रंप सार्वजनिक मंच से सबूतों के आधार पर रामफोसा को घेरने की कोशिश कर रहे थे और उसी दौरान बल्ंडर कर बैठे। हालांकि, ट्रंप का मकसद दोनों पक्षों में सामंजस्य बिठाने का था, जो 1994 में रंगभेद की समाप्ति के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर हैं।
क्या रहा हासिल?
अगर इस बहस के हासिल निकालने की बात करें तो, ओवल ऑफिस में ट्रंप और रामफोसा के बीच बातचीत विवाद और गलतफहमी से भरी रही, जिसका मुख्य कारण ट्रंप द्वारा एक वीडियो को गलत तरीके से पेश करना था। इस बहसबाजी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सटीक जानकारी की जरूरत और मिसइन्फोर्मेशन के खतरों को इतने बड़े स्तर पर सामने ला दिया है कि सभी देशों में इसका मैसेज चला गया। शायद ही किसी ने व्हाइट हाउस से इस ब्लंडर की उम्मीद की होगी।
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