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मछली चोर चीन के रास्ते में खड़ा हुआ भारत, इन देशों के साथ मिलकर ड्रैगन की दादागिरी को करेगा खत्म

ब क्वाड सदस्य देश भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अवैध तरीके से मछली पकड़ने पर लगाम कसने की तैयारी में हैं। चारों देश सिंगापुर और भारत में निगरानी केंद्रों को जोड़ने वाली उपग्रह ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग करने वाले हैं।

नई दिल्ली, 21 अगस्तः चीन लंबे समय से गैर-कानूनी तरीके से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मछलियों का अवैध शिकार कर मोटा मुनाफा कमाता रहा है। वह अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को या तो दबा देता है या अनसुना कर देता है। लेकिन अब क्वाड सदस्य देश भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अवैध तरीके से मछली पकड़ने पर लगाम कसने की तैयारी में हैं। इसके लिए चारों देश सिंगापुर और भारत में निगरानी केंद्रों को जोड़ने वाली उपग्रह ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग करने वाले हैं।

तस्वीर- पीटीआई(प्रतीकात्मक)

अवैध शिकार से समाप्त हो रहा स्टॉक

अवैध शिकार से समाप्त हो रहा स्टॉक

द एचके पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में मछलियों की आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करने में चीन सबसे बड़ी समस्या है। वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इतनी मछलियां पकड़ ले रहा है कि चीनी तट के पास मछली के स्टॉक के समाप्त होने का खतरा है। चीन के बड़े जहाज अवैध रूप से मछली पकड़ते हैं। इस दौरान वह समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन करते हैं। भारी मात्रा में खुद मछलियां पकड़कर स्थानीय नावों के लिए बहुत कम मौके मछली पकड़ने के लिए छोड़ते हैं।

चीन ने 90 देशों में किया अवैध शिकार

चीन ने 90 देशों में किया अवैध शिकार

चीन के यह अत्यधिक मछली पकड़ने का धंधा धीरे-धीरे प्रशांत महासागर में बड़े पैमाने पर फैलता जा रहा है। एक शोध से पता चलता है कि चीनी मछली पकड़ने के बेड़ों ने 90 से अधिक देशों के पानी में हस्तक्षेप किया है। नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर के डॉ होंग्झौ झांग और जल विज्ञान में मास्टर के उम्मीदवार जेनेविव डोनेलॉन-मे के एक पेपर के मुताबिक, मत्स्य निर्यात और आयात दोनों में विश्व नेता के रूप में चीन इस समस्या में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

चीन की दादागिरी को क्वाड करेगा खत्म

चीन की दादागिरी को क्वाड करेगा खत्म

चीन की इसी दादागिरी पर अंकुश लगाने के लिए क्वाड देशों ने योजना बनाई है। यूके स्थित मीडिया के अनुसार, क्वाड निगरानी केंद्रों व ट्रैकिंग सैटेलाइट को मिलाकर ऐसी व्यवस्था बनाने जा रहा है जो चीनी जहाजों के अनधिकृत क्षेत्रों में प्रवेश की जानकारी तुरंत दे देगी। क्वाड मैरीटाइम इनिशिएटिव सिंगापुर व भारत के निगरानी केंद्रों को जोड़ने जा रहा है जिससे इससे उन चीनी जहाजों का भी पता चल पाएगा, जो पकड़ में आने से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर व इंजन बंद कर लेते हैं।

जापान में हुई बैठक में चर्चा

जापान में हुई बैठक में चर्चा

मई महीने में जापान में हुई क्वाड देशों की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इसके तहत सिंगापुर, भारत और प्रशांत क्षेत्र में एक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में अवैध अनियमित और असूचित मत्स्य पालन (आईयूयूएफ) का पता लगाएगा। इसे एक तरह से चीन के खिलाफ क्वाड के दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।

तीन दशकों में चीन में आया बदलाव

तीन दशकों में चीन में आया बदलाव

चीन हमेशा से तटीय मछली पकड़ने वाला देश रहा है। मूल रूप से चीन में मछुआरे कचरा मछली पकड़ते रहे हैं। ये तटीय और निचले जलीय क्षेत्रों में रहने वाली छोटी मछलियां सस्ती मिलती हैं। लेकिन तकनीक में लगातार सुधार के बाद पिछले तीन दशकों में चीनियों के स्वाद में सुधार हुआ है। अब चीनी गहरे समुद्री जल की मछलियां पसंद करने लगे हैं। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए चीन में दूरस्थ जल मतस्य पालन बेड़े का गठन हुआ। ये बेड़े मछलियां पकड़ने के लिए कुख्यात हैं।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर मंडरा रहा खतरा

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर मंडरा रहा खतरा

ये देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र के क्षेत्रीय जल के बाहर संचालित होते हैं। ये बेड़े पकड़े जाने पर किसी भी नियम का उल्लंघन करने से इनकार करते हैं। ये बेड़े कानूनों में कई खामियों का फायदा उठाकर अवैध रुप से मछलियां पकड़ते हैं। लेकिन इससे कई गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। हाल के वर्षों में अवैध रूप से मछली पकड़ना समुद्री डकैती से बड़ा खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक अनियंत्रित मछली पकड़ने से स्टॉक कम होने लगा है जिससे खाने पर निर्भर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर खतरा मंडरा रहा है।

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