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QUAD की बैठक में किया गया पाकिस्तान का हिसाब-किताब, मोदी की बात पर जापान, US और ऑस्ट्रेलिया की मुहर

क्वाड चार देशों का एक संगठन है, जो सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। चीन इसे सैन्य गठबंधन कहता है, जबकि भारत इसे आपसी हितों की पूर्ति के लिए बनाया गया ग्रुप कहता है।

quad summit japan hiroshima

QUAD In Hiroshima: जापान के हिरोशिमा में शनिवार को हुए क्वाड की बैठक में पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ क्वाड के सभी चारों देश एक ऐसे प्रस्ताव को पास करने पर तैयार हो गये, जिसमें उसके हर एक गुनाह का अलग अलग हिसाब किताब किया गया है।

क्वाड शिखर सम्मेलन के बाद क्वाड के चारों देश, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान हैं, उनकी तरफ से एक ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया गया है।

इस ज्वांइट स्टेटमेंट को देखने पर पता चलता है, कि भारत ने पाकिस्तान को लेकर क्वाड के देशों को इस बात के लिए मना लिया है, कि किस तरह से ये पड़ोसी देश, भारत में आतंकवाद की सप्लाई करता है।

लिहाजा, जब क्वाड देशों की तरफ से ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया गया, तो उसमें पठानकोट और मुंबई हमला का खास तौर पर जिक्र किया गया था।

क्वाड के ज्वाइंट स्टेटमेंट में निशाने पर पाकिस्तान

शनिवार को क्वाड देशों के राष्ट्रप्रमुखों, भारत के नरेन्द्र मोदी, अमेरिका के जो बाइडेन, जापान के फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के एंथनी अल्बनीज के बीच बैठक की गई है।

बैठक के बाद चारों नेताओं की तरफ से एक संयुक्त बयान में कहा गया, कि वे "सीमा पार आतंकवाद के साथ साथ आतंकवाद के सभी रूपों, अभिव्यक्तियों आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की असमान रूप से निंदा करते हैं।"

ज्वाइंट स्टेटमेंट के इस हिस्से में सीमा पार आतंकवाद का जिक्र किया गया है, जो सीधे तौर पर पाकिस्तान की बात करता है, क्योंकि भारत हमेशा से आरोप लगाता आया है, कि पाकिस्तान क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद को बढ़ावा देता है और भारत में आतंकियों को भेजने का काम करता है।

सिर्फ इतना ही नहीं, ज्वाइंट स्टेटमेंट में आगे कहा गया है, कि "इस तरह के आतंकवादी हमलों के अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लि्ए और ऐसे हमलों में जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए क्वाड के सभी देश एकसाथ मिलकर काम करेंगे"।

इसके साथ ही, ज्वाइंट स्टेटमेंट में आगे लिखा गया है, कि हम "सीमा पार आतंकवाद के साथ साथ मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमला और पठानकोट में हुए आतंकी हमलों की निंदा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

क्वाड का स्टेटमेंट भारत के लिए कितना अहम?

क्वाड के इस स्टेटमेंट में पाकिस्तान का नाम लिए बगैर भारत में किए गये आतंकी हमलों की निंदा की गई है और आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद से उत्पन्न खतरों को रोकने, उनका पता लगाने और उसके मुताबिक प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यापक और निरंतर तरीके से अपने क्षेत्रीय भागीदारों के साथ काम करने की बात कही गई है।

ये भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत ने अब अपने अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों और सहयोगियों को ये समझा दिया है, कि पाकिस्तान ने भारत में किस तरह से आतंकी हमलों को अंजाम दिया है और क्यों उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

लिहाजा, अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान सिर्फ गाल बजाकर निकल नहीं सकता और उसे अपने देश में चल रहे आतंकी कैंपों और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

इसके अलावा, क्वाड के चारों सदस्य मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एक तंत्र विकसित कर रहे हैं, जिसके तहत एक दूसरे को खुफिया जानकारियां देना, टेक्नोलॉजी शेयर करना, और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक दूसरे का समर्थन करना भी शामिल है।

ये भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्वाड के दो देश ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका, Five Eyes Alliance का भी हिस्सा हैं, जो आतंकी हरकतों की निगरानी करता है। इस एलायंस में पांच देश, अमेरिका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा की खुफिया एजेंसियां शामिल हैं। जो दुनिया के किसी भी हिस्से में चल रहे अवैध लेनदेन, मादक पदार्थों की तस्करी, आंतकी हरकतों समेत दूसरे अवैध कार्यों की निगरानी करता है।

दुनिया की पांच खुफिया एजेंसियों का ये संगठन काफी ताकतवर है और ये कितना शक्तिशाली है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि इसके ही कहने पर न्यूजीलैंड ने मैच वाले दिन पाकिस्तान से पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था और पूरी टीम ने उसी दिन पाकिस्तान छोड़ दिया था।

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    लिहाजा, भारत को Five Eyes Alliance से भी मदद मिल सकती है। वहीं, यूनाइटेड नेशंस जैसे मंचों पर भारत आसानी से पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर सकता है और उसे जियो पॉलिटिक्स में पीछे धकेल सकता है।

    भारत के लिए ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज से 25-30 साल पहले एक ऐसा भी वक्त था, जब अमेरिका सीमा पार आतंकवाद को मानता ही नहीं था, लेकिन आज अमेरिका अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में आतंकवाद के हर रूप को ना सिर्फ स्वीकार कर रहा है, बल्कि अपने 'पुराने पार्टनर' को इसके लिए जवाबदेह ठहराने की भी बात कर रहा है।

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