नेपाल के ‘नीतीश कुमार’ बने पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’, कम सीटें लाकर भी बने PM, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ
बिहार में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता नीतीश कुमार सरकार चला रहे हैं। ठीक ऐसी ही स्थिति नेपाल की हो चुकी है। प्रचंड महज 32 सीटों के साथ नेपाल के पीएम बन चुके हैं।

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पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' नेपाल के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उन्हें सोमवार को शपथ दिलाई। इससे पहले राष्ट्रपति ने रविवार को प्रचंड के पीएम पद पर नियुक्ति की घोषणा की थी। पुष्प कमल दहल ने तीसरी बार पीएम पद की शपथ ली है। पहली बार वे 2008 से 2009 और दूसरी बार 2016 से 2017 में प्रधानमंत्री बने थे। समझौते के मुताबिक पुष्प कमल दहल ढाई साल और बाकी के ढाई साल केपी शर्मा ओली पीएम बनेंगे।

नेपाल में किसी भी दल को नहीं मिला बहुमत
नेपाल में नवंबर में हुए आम चुनावों के बाद किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिला था। हालांकि इस रेस में पहले जरूर शेर बहादुर देउबा का नाम आगे चल रहा था, लेकिन रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने सत्ताधारी माओइस्ट सेंटर को समर्थन देने से इनकार कर दिया और गठबंधन को भी छोड़ दिया था। गठबंधन छोड़ने के कुछ देर बाद अब 6 दलों के गठबंधन ने अगली सरकार के पीएम के रूप में 'प्रचंड' को चुना। पुष्प कमल दहल प्रचंड को कुल 169 सांसदों का समर्थन मिला है। इसमें 3 निर्दलीय सांसद भी शामिल हैं।

प्रचंड की पार्टी को मिली महज 32 सीटें
प्रचंड ने 2022 के नवंबर महीने में हुए आम चुनाव शेर बहादुर देउबा यानी कि नेपाली कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था। नेपाली कांग्रेस को चुनाव में सबसे अधिक 89 सीटें मिली थी। इसके बाद केपी शर्मा ओली की पार्टी को 78 सीटें मिली थीं। जबकि प्रचंड की पार्टी को महज 32 सीटें मिल पाई थी। प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 138 सीटें चाहिए। केपी ओली और प्रचंड की पार्टी की सीटों को जोड़ भी लें तो यह आंकड़ा 110 सीटों तक पहुंचता है। ऐसे में प्रचंड और ओली दोनों को ही छोटी-छोटी पार्टियों को लंबे वक्त तक साधे रहना होगा।

नीतीश कुमार से हो रही तुलना
इस बीच सोशल मीडिया पर प्रचंड की तुलना सीमा से लगे पड़ोसी राज्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की जाने लगी है। महज 43 सीटें हासिल कर नीतीश कुमार 243 सदस्यों वाली विधानसभा वाले राज्य के सीएम बने हुए हैं। बिहार में जहां सबसे बड़ी पार्टी राजद नीतीश कुमार की सहयोगी बनी हुई है वहीं दूसरी सबसे बड़ी पार्टी भाजपा विपक्ष में है। वहीं तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता नीतीश कुमार बिहार में सरकार चला रहे हैं। ठीक ऐसी ही स्थिति नेपाल की हो चुकी है। प्रचंड महज 32 सीटों के साथ नेपाल के पीएम बन चुके हैं।

चीन के काफी करीबी हैं प्रचंड
प्रचंड का पीएम बनना भारत के हित में नहीं माना जा रहा है। प्रचंड कम्युनिस्ट नेता है और उनकी चीन से करीबी जगजाहिर है। पहले नेपाल में ऐसी प्रथा थी कि सरकार बनने के पश्चात नेपाल के प्रधानमंत्री का पहला विदेशी दौरा भारत का होता था। वह ‘प्रचंड' ही थे जिन्होंने यह प्रथा तोड़ी थी। 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद जब प्रचंड PM बने तो उन्होंने भारत की जगह चीन दौरे को चुना। हालांकि पहले जुलाई में वे भारत आए थे। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। किसी कारणवश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी।
पीएम मोदी ने प्रचंड को दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ट्वीट किया- भारत और नेपाल के बीच अद्वितीय संबंध हैं। गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है। दोनों देशों के रिश्ते लोगों के बीच गर्मजोशी भरे संबंधों पर आधारित है। मैं इस दोस्ती को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने की आशा करता हूं। इसके साथ ही चीन ने भी प्रचंड को पीएम पद के लिए बधाई दी है। नेपाल में चीनी दूतावास ने अंग्रेजी और नेपाली भाषा में ट्वीट किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने भी प्रचंड को बधाई दी है।












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