क्राइम मिनिस्टर... इजराइली प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भयानक प्रदर्शन, गिर जाएगी नेतन्याहू सरकार?
Israel Massive protests: गाजा में हमास के खिलाफ चल रहे युद्ध के बीच, इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भयानक गुस्सा फूट पड़ा है और गाजा पट्टी में युद्ध योजनाओं को लेकर वो अपनी सहयोगी पार्टियों से ही भारी प्रेशर झेल रहे हैं, जबकि हमास के साथ युद्ध खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है।
शनिवार को उस वक्त बवाल शुरू हो गया, जब इजराइली युद्ध मंत्रिमंडल के सदस्य और नेतन्याहू के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज़ ने कहा, कि अगर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय, अरब और फिलिस्तीनी प्रशासन को संभालने के लिए एक नई युद्ध योजना तैयार नहीं की, तो वह 8 जून को सरकार से इस्तीफा दे देंगे।

नेतन्याहू सरकार के खिलाफ क्यों हो रहे प्रदर्शन?
इजराइल युद्ध कैबिनेट के तीसरे सदस्य, रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने भी फिलिस्तीनी प्रशासन के लिए एक योजना बनाने का आह्वान किया है और इस सप्ताह एक भाषण में उन्होंने कहा है, कि वह इस बात से सहमत नहीं होंगे, कि इजराइल गाजा पर शासन करेगा।
इस बीच, अमेरिका ने गाजा को राज्य का दर्जा देने से पहले सऊदी अरब और अन्य अरब देशों की सहायता से शासन करने के लिए एक फिलिस्तीनी प्राधिकरण को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। ऐसी उम्मीद है, कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन, रविवार को इज़राइल की यात्रा के दौरान उन योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।
नेतन्याहू ने अल्टीमेटम को खारिज किया
अब तक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों का मुकाबला किया है। लेकिन गैंट्ज़ का अल्टीमेटम उनके लिए मुसीबत बन सकता है। नेतन्याहू ने गाजा में फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को लेकर किसी भी तरह की योजना में भूमिका को खारिज कर दिया है और उन्होंने कहा है, कि गाजा के प्रशासन की जिम्मेदारी वो हमास से संबंध नहीं रखने वाले स्थानीय फिलीस्तीनियों को सौंपने की योजना बना रहे हैं।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा है, कि जब तक हमास हार नहीं जाता, तब तक ऐसी कोई भी योजना बनाना असंभव है, क्योंकि इसने हमास ने इज़राइल के साथ सहयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को धमकी दे रखी है।
इसके अलावा, नेतन्याहू की सरकार फिलिस्तीनी राज्य के दर्जे की भी घोर विरोधी है। अल्टीमेटम के बाद जारी एक बयान में, नेतन्याहू ने कहा है, कि गैंट्ज़ की शर्तें "इज़राइल के लिए हार, ज्यादातर बंधकों को छोड़ना, हमास को बरकरार रखना और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना करना" होंगी।
यदि गैंट्ज़ ने इस्तीफा दे दिया तो क्या होगा?
गैंट्ज़ के जाने से नेतन्याहू अपने धुर दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगियों पर और भी ज्यादा निर्भर हो जाएंगे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर और वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच शामिल हैं, जो मांगों के पूरा नहीं होने पर उनकी सरकार को आसानी से गिरा सकते हैं।
नेतन्याहू की सहयोगी पार्टियों की मांगे और भी ज्यादा खतरनाक हैं। उनकी मांग है, कि इजराइली सरकार फिर से गाजा पट्टी पर कब्जा करे, फिलीस्तीनी क्षेत्र में इजराइलियों को बसाए और 2005 में फिलीस्तीनी क्षेत्र से हटाई गई यहूदी बस्तियों को फिर से बसाई जाए।
लेकिन नेतन्याहू के आलोचकों, जिनमें हाल के महीनों में साप्ताहिक विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए हजारों लोग भी शामिल हैं, उन्होंने उन पर अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए युद्ध को लम्बा खींचने का आरोप लगाया है। गैंट्ज़, जिन्होंने 7 अक्टूबर के हमले के कुछ दिनों बाद नेतन्याहू की सरकार को देश हित में समर्थन दिया था, उन्होंने नेतन्याहू को चेतावनी दी, कि वे "कट्टरपंथियों का रास्ता न चुनें और पूरे देश को रसातल में न ले जाएं।"
जबकि नेतन्याहू ने इस तरह के आरोपों से इनकार करते हुए कहा, कि उनका ध्यान हमास को हराने पर केंद्रित है और चुनाव, युद्ध के प्रयासों से ध्यान भटकाएंगे।
गिर सकती है बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार?
ओपिनियन पोल्स से पता चलता है, कि अगर नए चुनाव हुए, तो बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव में बुरी तरह से हार जाएंगे और गैंट्ज़ को उनकी जगह लेने की पूरी संभावना है। यह संभवतः नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक करियर के अंत का प्रतीक होगा और लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों में उन पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है।
इजरायली मीडिया ने युद्ध के दौरान देश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के भीतर भी बढ़ते असंतोष की सूचना दी है, अधिकारियों ने चेतावनी दी है, कि ऐसी किसी भी योजना की कमी सामरिक जीत को रणनीतिक हार में बदल रही है।
वहीं, अगर गाजा के लिए प्लान नहीं तैयार किया गया, तो हमास फिर से संगठित हो जाएगा और हाल के दिनों में उत्तर में निर्मित जबालिया शरणार्थी शिविर और गाजा शहर के बाहरी इलाके ज़िटौन में भारी लड़ाई छिड़ गई है। इस बीच इजरायली सैनिक, दक्षिणी शहर राफ़ा के कुछ हिस्सों में घुसपैठ कर रहे हैं, जिसे वे एक सीमित अभियान बता रहे हैं। वहां की लड़ाई ने लगभग 800,000 लोगों को विस्थापित कर दिया है, जिनमें से कई पहले ही अन्य क्षेत्रों से भाग गए हैं और मानवीय सहायता के वितरण में भी गंभीर बाधाएं आई हैं।












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