PM Modi Visit to USA: यूं नहीं अमेरिका कर रहा पीएम मोदी का भव्य स्वागत, ये हैं वजहें
PM Modi Visit to USA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर हैं। इस दौरे की काफी चर्चा हो रही है। जिस तरह से अमेरिका पीएम मोदी का जबरदस्त तरीके से स्वागत कर रहा है उसको लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्या वजह है जो अमेरिका ने पीएम मोदी के स्वागत में रेड कार्पेट को बिछा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिका का रेड कार्पेट बिछाने के कई मायने हैं और इसके केंद्र में चीन है। जी हां, अमेरिका के लिए खुद को सुपरपॉवर बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, पिछले कुछ सालों में जिस तरह से चीन ने अपनी आर्थिक ताकत को बढ़ाया है, उसकी वजह से अमेरिका की ग्लोबल पॉवर जरूर घटी है।

डिफेंस डील
अमेरिका के दौरे पर तीन बड़े क्षेत्र पर हर किसी की नजर है जिसमे कुछ बड़ा ऐलान होने की लोगों की उम्मीद है। पहला डिफेंस, दूसरे टेक्नोलॉजी और तीसरा ट्रेड। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार रूस से आयात करता है। 2017-22 के बीच तकरीबन 45 फीसदी हथियारों का आयात हुआ है।
फ्रांस को पीछे छोड़ने की कवायद
लेकिन 2016 तक यह 65 फीसदी हुआ करता था, ऐसे मे अमेरिका इस मौके गैप को मौके के तौर पर देख रहा है। अमेरिका की तुलना में भारत फ्रांस के साथ बड़ी आर्म डील करता आया है। अमेरिका से भारत ने तकरीबन 11 फीसदी डिफेंस डील की है जबकि फ्रांस के साथ 29 फीसदी की। लिहाजा अमेरिका चाहते कि वह भारत के साथ इस डिफेंस डील को बेहतर करे।
टेक सेक्टर में भारत का साथ
अमेरिका और भारत उभरती तकनीक वाले देश हैं। दोनों देशों के बीच आईटी, स्पेस, डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य के सेक्टर में बड़े समझौते हो सकते हैं। दोनों ही देश तकनीक के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ा सकते हैं। इसमे खासकर सेमीकंडक्टर और हेल्थकेयर से जुड़े उत्पाद अहम हैं।
ट्रेड पर नजर
ट्रेड की बात करें तो भारत अमेरिका का टॉप ट्रेडिंग सहयोगी है, भारत के साथ अमेरिका 130 बिलियन डॉलर की ट्रेड करता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी बहुत संभावनाएं हैं। दोनो देशों के बीच टैरिफ को लेकर सबकुछ ठीक नहीं रहा है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, दुबाई, कनाडा, यूके, यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड अग्रीमेंट किया है, लेकिन अमेरिका के साथ यह अग्रीमेंट अभी तक नहीं किया गया है।
चीन की बादशाहत चुनौती
अमेरिका और भारत दोनों ही सप्लाई चेन में चीन की बादशाहत को खत्म करना चाहते हैं। महामारी के बाद से अमेरिका और दुनिया के कई बड़े देश चीन प्लस एन की नीति पर काम कर रहे हैं। वह अपनी पूरी चेन सप्लाई को चीन पर निर्भर नहीं रखा चाहते हैं, ऐसे में भारत इस दिशा में बड़े विकल्प के तौर पर सामने आया है।
अगले साल चुनाव
अमेरिका और भारत दोनों ही देशों में अगले साल चुनाव है, ऐसे में दोनों ही नेता जरूर बड़ी डील का ऐलान कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों में नेताओं को जनाधार मजबूत हो। लिहाजा भारत-अमेरिका के बीच किसी बड़े समझौते के ऐलान से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है।












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