भारत रूस के साथ भागीदारी को इच्छुक, पीएम मोदी बोले, 'डिप्लोमेसी और डॉयलाग' से खत्म होगा यूक्रेन संघर्ष
भारत ने यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत से ही डिप्लोमेसी और डॉयलाग का मार्ग अपनाने पर जोर दिया है। हम इस संघर्ष को दूर करने के लिए सभी शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करते हैं।
नई दिल्ली/मास्को 7 सितंबर : रूस के व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) में 7वें पूर्वी आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र को वर्चुअली (virtually) संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (prime minister Narendra Modi) ने रूस-यूक्रेन यु्द्ध और उससे उत्पन्न विकट परिस्थितियों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि, यूक्रेन संघर्ष और कोविड महामारी के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर इसका बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि, यूक्रेन संघर्ष के कारण अनाज (food grain) फर्टिलाइजर (fertilizer) और ईंधन (fuel) की कमी विकासशील देशों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

डिप्लोमेसी और डॉयलाग का मार्ग
भारत ने यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत से ही डिप्लोमेसी और डॉयलाग का मार्ग अपनाने पर जोर दिया है। हम इस संघर्ष को दूर करने के लिए सभी शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करते हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि, यूक्रेन संघर्ष के दौरान हम अनाज और फर्टिलाइजर के सुरक्षित निर्यात संबंधी हाल के सहमति का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि, वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को धन्यवाद देते हैं, क्योंकि उन्होंने इस फोरम को संबोधित करने का उन्हें अवसर दिया।

व्लादिवोस्तोक में 7वें पूर्वी आर्थिक मंच को संबोधित किया पीएम ने
व्लादिवोस्तोक में 7वें पूर्वी आर्थिक मंच को संबोधित किया पीएम ने
व्लादिवोस्तोक में 7वें पूर्वी आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,'भारतीय वाणिज्य दूतावास इस महीने व्लादिवोस्तोक में अपनी स्थापना के 30 साल पूरे करेगा। इस शहर में वाणिज्य दूतावास खोलने वाला भारत पहला देश था। पीएम ने कहा, मुझे खुशी है कि व्लादिवोस्तोक में आयोजित किए जा रहे सातवें Eastern Economic Forum में आपसे वर्चुअल रूप से जुड़ने का मौका मिला। इसी महीने, Vladivostok में भारत के कांसुलेट की स्थापना के 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस शहर में कांसुलेट खोलने वाला पहला देश भारत ही था। पीएम मोदी ने इस दौरान यूक्रेन संघर्ष और कोरोना महामारी से उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों का भी जिक्र किया।

रूस के साथ आगे बढ़ेगा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत आर्कटिक विषयों पर रूस के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत करने के लिए इच्छुक है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ऊर्जा के साथ-साथ, भारत ने फार्मा और हीरों के क्षेत्रों में भी Russian Far East में महत्वपूर्ण निवेश किये हैं। 2019 में मुझे इस फोरम में हिस्सा लेने का मौका मिला था। उस समय हमने भारत की 'Act Far-East' नीति की घोषणा की थी। परिणामस्वरूप, Russian Far East के साथ विभिन्न क्षेत्रों में भारत का सहयोग बढ़ा है। आज यह नीति भारत और रूस की 'Special and Privileged Strategic Partnership' की एक प्रमुख स्तम्भ बन गयी है।

पुतिन को धन्यवाद
पीएम मोदी ने कहा कि, ये शहर भारत के साथ संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। 2015 में स्थापित यह फोरम अंतरराष्ट्रीय सहयोग का वैश्विक मंच बन गया है। इसके लिए उन्होंने व्लादिमीर पुतिन को उनकी दूरदर्शिता के लिए धन्यवाद दिया। आज इस नीति की वजह से दोनों देशों के बीच की दोस्ती का प्रमुख स्तंभ बन गया है। भारत आर्कटिक विषयों पर रूस के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत करने के लिए इच्छुक है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग की भी आपार संभावनाएं है। ऊर्जा के साथ-साथ, भारत ने फार्मा और हीरों के क्षेत्रों में भी Russian Far East में महत्वपूर्ण निवेश किये हैं। उन्होंने कहा कि,भारतीयों की प्रतिभा रूस के विकास में अहम योगदान दे सकता है।












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