अमेरिका दौरा खत्म कर मिस्र निकले PM मोदी, जानिए इजिप्ट से कैसे हैं भारत के संबंध, क्या है यात्रा का मकसद?
PM Modi Egypt Visit: अमेरिका का राजकीय दौरा खत्म कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मिस्र के दौरे पर निकल गये हैं। 24 और 25 जून के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिस्र यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दोनों पक्षों द्वारा सुरक्षा से लेकर व्यापार और निवेश तक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की व्यवस्था करने की उम्मीद है।
भारत और मिस्र के काफी करीबी संबंध रहे हैं और इस साल भारत ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी गणतंत्र दिवस 2023 के मौके पर भारत के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत सरकार का ये फैसला भारत और अरब देशों के बीच मजबूत होते हुए रिश्ते को दर्शाता है। आइये समझने की कोशिश करते हैं, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मिस्र दौरा, दोनों देशों को और कितना करीब लाएगा?

अरब देशों में भारत की मजबूत होती पकड़
भारत के पहले ही संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंध हैं और अब भारत ने अरब दुनिया के बाकी देशों से भी मजबूत संबंध स्थापित करने की कोशिश शुरू कर दी है, हालांकि मिस्र के साथ भारत के काफी पुराने संबंध रहे हैं और पीएम मोदी उस संबंध में और पैनापन ला रहे हैं।
मिस्र 2023 में भारत की अध्यक्षता में जी20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित नौ अतिथि देशों में शामिल है, हालांकि मिस्र ने कश्मीर में आयोजित किए जी20 के टूरिज्म बैठक में शामिल नहीं होकर सबको चौंका दिया था, क्योंकि भारत और मिस्र ने पिछले ही साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने को लेकर 75वीं वर्षगांठ मनाई है।
पिछले कुछ दशकों में भारत और मिस्र की दोस्ती काफी मजबूत हुई है और मोदी सरकार ने अरब देशों से दोस्ती बढ़ाने पर काफी ध्यान दिया है। भारत और मिस्र, दोनों ही देश गुटनिरपेक्ष के संस्थापक सदस्य थे, जिसे शुरू करने का श्रेय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को दिया जाता है और उसी वक्त से दोनों देशों के बीच के संबंध मधुर रहे हैं।
भारत के पूर्व राजदूत तलमीज अहमद, जिन्होंने अरब देशों में, खासकर सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय राजदूत के दौर पर काम किया है, उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, कि मिस्र जब गंभीर घरेलू राजनीतिक मुद्दों जैसे अरब स्प्रिंग विरोध और एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, उस वक्त भारत का ध्यान ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लाखों प्रवासियों की उपस्थिति जैसे हितों के कारण दूसरे खाड़ी देशों की तरफ चला गया था, लेकिन अब भारत फिर से मिस्र के साथ अपने संबंधों में आई थोड़ी सी दूरी को पाट चुका है।
वहीं, खराब आर्थिक स्थिति के बाद भी पिछले तीन-चार वर्षों में मिस्र ने एक बार फिर से जियो पॉलिटिक्स में अपनी भूमिका पर जोर देना शुरू कर दिया है और इसने ऐसी पहल की है, जो खाड़ी देशों से स्वतंत्र हैं, जैसे कि सीरिया, यमन और तुर्की पर मिस्र की स्थिति दूसरे खाड़ी देशों से अलग और स्वतंत्र रही है।
मिस्र ने भी इराक के साथ अपने संबंध बनाए हैं और ईरान के साथ भी बातचीत शुरू की है। इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में भारत-मिस्र संबंधों में काफी प्रगाढ़ता आई है और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पिछले साल 19-20 सितंबर के दौरान काहिरा की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति सिसी से मुलाकात की थी और रक्षा क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं के बीच अहम बातचीत की गई थी।
भारत और मिस्र में रक्षा संबंध कैसे हैं?
पिछले साल मिस्र के दौरे के दौरान भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके मिस्र के समकक्ष जनरल मोहम्मद जकी ने सभी क्षेत्रों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और भारत और मिस्र के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रस्तावों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त जताई थी।
दोनों पक्ष ट्रेनिंग के लिए संयुक्त अभ्यास और सैन्य कर्मियों के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी सहमत हुए थे, जो विशेष रूप से उग्रवाद और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए साथ मिलकर काम करने को लेकर था।
इसके अलावा, मिस्र की नजर भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को खरीदने पर है और मिस्र भारत से कम से कम 70 तेजस फाइटर क्राफ्ट खरीदना चाहता है। माना जा रहा है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के दौरा तेजस फाइटर जेट को लेकर बात हो सकती है।
मिस्र के वायु सेना प्रमुख महमूद फआद अब्द अल-गवाद ने रक्षा उपकरणों की खोज के लिए पिछले साल जुलाई में भारत का दौरा किया था, वहीं, अक्टूबर 2021 में दोनों देशों के बीच पहला वायुसेना अभ्यास भी हुआ था। माना जा रहा है, कि भारत और मिस्र के बीच तेजस फाइटर जेट को लेकर डील जल्द ही फाइनल हो सकती है।
कैसे हैं दोनों देशों में व्यापारिक संबंध?
मिस्र वो देश है, जिसका एक हिस्सा अफ्रीकी महाद्वीप में भी आता है। लिहाजा, भारत के लिए मिस्र, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच एक कड़ी के रूप में एक रणनीतिक महत्व रखता है, जिसे नई दिल्ली अपने विस्तारित पड़ोस के हिस्से के रूप में वर्णित करता है।
मिस्र परंपरागत रूप से अफ्रीका में भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों में से एक रहा है और भारत 2020-21 में मिस्र का आठवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। भारत और मिस्र के बीच साल 2012-13 में 5.45 अरब डॉलर की व्यापारिक भागीदारी थी, जो 2016-17 में ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी की वजह से गिरकर 3.23 अरब डॉलर हो गया था। लेकिन, साल 2017-18 में एक बार फिर से इसमें वृद्धि आने लगी और ये 2020-21 में 4.15 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।












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