अंतरिक्ष में बड़ी घटना, अपने मूल तारे से टकराया ग्रह, 10 लाख डिग्री सेल्सियस था तापमान
नई दिल्ली, 10 फरवरी: हमारा अंतरिक्ष रहस्यों से भरा हुआ है। अब एक नष्ट हुए ग्रह के अवशेषों को उसके मूल ग्रह से टकराते हुए देखा गया, जो एक मृत सूर्य (तारा) है, जिसे सफेद बौना तारा या व्हाइट ड्वार्फ (White Dwarf) के नाम से जाना जाता है। इसके लिए खगोलविदों ने नासा चंद्रा एक्स-रे वेधशाला ( NASA Chandra X-ray Observatory) का इस्तेमाल किया है। (पहली तस्वीर साभार- University of Warwick, बाकी तस्वीरें सांकेतिक)

पृथ्वी से कितनी दूरी
इंग्लैंड में वारविक विश्वविद्यालय (University of Warwick) के विशेषज्ञों ने बताया कि सफेद बौना तारे सूर्य की तरह एक तारे का अवशेष हैं। टक्कर के बाद ग्रहों के अवशेष को 1.8 मिलियन डिग्री फारेनहाइट (10 लाख डिग्री सेल्सियस) तक गर्म होते हुए देखा गया। उन्होंने आगे कहा कि ग्रह का अवशेष ग्रह G 29-38 से टकराया है, जो पृथ्वी से 44 प्रकाश वर्ष दूर है। वैसे इतनी दूरी की वजह से पृथ्वी को कोई नुकसान नहीं होगा।

गैसीय पदार्थों को ट्रैक कर पता लगाया
Daily Mail की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने चट्टानी और गैसीय पदार्थों का पता लगाने के लिए एक्स-रे का उपयोग किया, जो ग्रह प्रणाली द्वारा अपने मेजबान तारे के मरने के बाद पीछे रह गए थे। उन्होंने पाया कि समय के साथ ये मलबा धीरे-धीरे तारकीय अवशेष के करीब जाता है, जब तक कि ये तारे की सतह के भीतर भस्म ना हो जाए। शोधकर्ताओं के मुताबिक ये ग्रह प्रणाली के बनने के अरबों साल बाद हुआ।

सभी तारों का अंत निश्चित!
रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकांश तारे और ग्रह प्रणाली G 29-38 की तरह ही खत्म हो जाएंगे। इसके बाद ये एक सफेद बौने तारे में बदलेंगे। अकेले हमारी आकाशगंगा में 300,000 से अधिक की खोज की जाएगी। इसके अलावा सफेद बौने तारों का अध्ययन करने के लिए खगोलविद पिछले कुछ दशकों से स्पेक्ट्रोस्कोपी प्रक्रिया का उपयोग कर रहे हैं। इससे तारों की सतह पर तत्वों की मात्रा नापने में आसानी होती है। इसके साथ उनकी संरचना का भी पता लगता है।

मृत तारे नए ग्रहों को देते हैं जन्म
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक जब तारे खत्म होने वाले रहते हैं, तो उनके नए ग्रहों के जन्म देने की संभावना रहती है। खलोगविदों ने बताया कि मृत होने वाले तारे अपने चारों ओर मरने वाले तारों से बचे हुए पदार्थों की एक डिस्क (धूल व गैस) की मदद से एक ग्रह की उत्पत्ति कर सकते हैं। इससे संबंधित रिसर्च एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुई है।












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