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44 सेकंड में पूरा इलाका साफ! Pinaka Rocket System कितना ताकतवर? राफेल के बदले फ्रांस खरीदेगा भारत से ये हथियार

Pinaka Rocket System: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी तीन दिवसीय (17-19 फरवरी, 2026) ऐतिहासिक यात्रा पर मुंबई पहुंच चुके हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। यह यात्रा 'Horizon 2047' रोडमैप के तहत रक्षा और AI जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। एक तरफ जहां भारत फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा डील के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की ओर बढ़ रहा है।

वहीं दूसरी तरफ पासा पलटता दिख रहा है। अब विकसित देश फ्रांस भारत के स्वदेशी 'पिनाका' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। यह न केवल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रमाण है, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में 'मेक इन इंडिया' के बढ़ते दबदबे की एक बड़ी गूंज भी है।

Pinaka Rocket System
(AI Image)

India France Defense Deal 2026: राफेल डील और मैक्रों की यात्रा का रणनीतिक महत्व

राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा रक्षा गलियारों में हलचल पैदा कर रही है। भारत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 4.5+ पीढ़ी के 114 राफेल विमानों की खरीद की तैयारी में है, जिसे रक्षा खरीद परिषद (DAC) की मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन इस बार की चर्चा सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है। 'Horizon 2047' के तहत दोनों देश तकनीक के आदान-प्रदान और सह-उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। इसी कड़ी में फ्रांस की एक उच्च स्तरीय कमेटी ने भारतीय 'पिनाका' सिस्टम का बारीकी से मूल्यांकन किया है, जो यह संकेत देता है कि अब भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर चुका है।

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Emmanuel Macron India Visit: पिनाका की 'शूट एंड स्कूट' क्षमता और फ्रांस की जरूरत

फ्रांस अपनी सेना के पुराने पड़ रहे M270 रॉकेट सिस्टम को बदलना चाहता है। फ्रांस का अपना नया सिस्टम विकसित होने में अभी वक्त है, ऐसे में 'पिनाका' एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी 'शूट एंड स्कूट' तकनीक है, यानी रॉकेट दागने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल लेता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाते। हाल ही में फ्रांस के प्रतिनिधिमंडल ने इसके एडवांस वर्जन के सफल परीक्षण और मारक क्षमता का खुद जायजा लिया है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो किसी नाटो (NATO) देश को स्वदेशी हथियार बेचना भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।

रफ़्तार और सटीकता: जब पिनाका ने दुनिया को चौंकाया

फायरिंग पावर के मामले में पिनाका दुनिया के टॉप-5 सिस्टम्स में शुमार है। इसकी तुलना अक्सर अमेरिकी HIMARS और रूसी Tornado-S से की जाती है। जहां अमेरिकी सिस्टम 45 सेकंड में 6 रॉकेट छोड़ता है, वहीं भारत का पिनाका महज 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागकर दुश्मन के एक वर्ग किलोमीटर इलाके को मलबे के ढेर में तब्दील कर सकता है। इसकी एक पूरी बैटरी एक मिनट के भीतर 72 रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम है। यही 'रैपिड फायर' क्षमता और पहाड़ी इलाकों में इसकी अचूक सटीकता इसे फ्रांस जैसे देशों की पहली पसंद बना रही है।

DRDO Pinaka MK3: आठ गुना सस्ता और पूरी तरह स्वदेशी

पिनाका की सबसे बड़ी ताकत इसकी किफायती कीमत और आत्मनिर्भरता है। जहां एक अमेरिकी HIMARS सिस्टम की कीमत करीब 19.5 करोड़ रुपये है, वहीं एक पिनाका सिस्टम मात्र 2.3 करोड़ रुपये में उपलब्ध है। यानी कीमत में करीब 8 गुना का अंतर! सबसे खास बात यह है कि इसे DRDO ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया है, जिसका मतलब है कि इसके पुर्जों या मेंटेनेंस के लिए भारत को किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आर्मेनिया की सफलता के बाद अब फ्रांस का इस पर भरोसा जताना भारतीय इंजीनियरिंग की वैश्विक मान्यता है।

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मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक होने की उम्मीद

पिनाका की तकनीक रुकने वाली नहीं है। वर्तमान में इसकी रेंज 75 से 90 किलोमीटर है, लेकिन इसके नए वर्जन MK-2 और MK-3 पर काम जारी है, जो 120 से 150 किलोमीटर तक मार करेंगे। इतना ही नहीं, भविष्य के लिए MK-4 पर भी शोध चल रहा है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक होने की उम्मीद है। यह गाइडेड रॉकेट सिस्टम एक मिसाइल की तरह काम करता है, जो जीपीएस और नेविगेशन तकनीक की मदद से लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदता है। भारत और फ्रांस के बीच यह 'गिव एंड टेक' की साझेदारी रक्षा जगत के समीकरणों को हमेशा के लिए बदल सकती है।

'मेक इन इंडिया' की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत

कल तक दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार रहा भारत आज फ्रांस जैसे नाटो सदस्य को स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम बेचने की दहलीज पर है। यह DRDO की इंजीनियरिंग और 'मेक इन इंडिया' की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत है। जब कोई विकसित देश भारतीय तकनीक पर भरोसा करता है, तो वह केवल एक सौदा नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में एक बड़ी छलांग होती है।

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