अमेरिका ने कहा भारत के साथ रिश्ते नई सरकार के साथ भी नहीं बदलेंगे
पेंटागन ने भारत को बताया अमेरिका का दोस्त कहा डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन में भी मजबूत होंगे भारत-अमेरिका के रक्षा संबंध।
वाशिंगटन। 20 जनवरी के बाद व्हाइट हाउस से राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके प्रशासन की विदाई हो जाएगी। उनकी जगह पर नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में व्हाइट हाउस की चाबी आ जाएगी। भारत की नजरें अमेरिका में होने वाले सत्ता परिवर्तन पर टिकी हैं। इन सबके बीच ही अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि नई सत्ता के बावजूद भारत के साथ संबंध नहीं बदलेंगे।

भारत के साथ संबंध काफी बेहतर
पेंटागन ने कहा है कि भारत के साथ उसके संबंध बहुत अच्छी स्थिति में हैं। यह रिश्ते डोनाल्ड ट्रंप के शासन में भी जारी रहेंगे और उसके बाद भी। पेंटागन के प्रवक्ता पीटर कुक ने यह बात एक प्रेस कांफेंस में कही है। ट्रंप के सत्ता संभालने से पहले यह बयान आना काफी अहम माना जा रहा है। कुक की मानें तो दोनों देशों के बीच रिश्तों को लेकर रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर की प्रतिबद्धता बिल्कुल स्पष्ट है। इसलिए आने वाले समय में भी दोनों देशों के रक्षा संबंधों के शानदार बने रहेंगे। कार्टर को भारत का दोस्त कहा जाता है और विदाई से पहले उन्होंने जिन देशों का दौरा किया उसमें भारत भी शामिल था। दिसंबर 2016 में कार्टर भारत आए थे। कार्टर वर्ष 2016 की शुरुआत में जब भारत आए थे तो उनकी पहल पर भारत-अमेरिका डिफेंस टेक्नोलॉज ट्रांसफर समझौता फाइनल हुआ था। इससे दोनों देश मिलकर संवेदनशील टेक्नोलॉजी को शेयर कर पाएंगे और साथ मिलकर उन पर काम करेंगे।
बड़ी डिफेंस डील्स पर नजर
इससे पहले खबर आई थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के खत्म होने से पहले अमेरिका ने भारत को कई अहम डिफेंस डिल्स ऑफर की हैं। अमेरिका ने भारत को डिफेंस टेक्नोलॉजी और ट्रेड इनीशिएटिव (डीटीटीआई) के तहत मिलिट्री हेलीकॉप्टर्स और इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल्स के उत्पादन का ऑफर दिया है। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस पर भारत 20 जनवरी के बाद फैसला लेगा जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अपना जिम्मा संभाल लेगा। भारत पहले से अमेरिका की ओर से आए फ्यूचर वर्टिकल लिफ्ट (एफवीएल) एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में उसकी भागीदारी को लेकर अपनी रूचि जता चुका है। इसके तहत पांच अलग-अलग हेलीकॉप्टर्स को अगले 15 वर्षों में विकसित किया जाना है। इसकी कीमत करीब आठ बिलियन डॉलर होगी। अमेरिका ने सलाह दी थी कि फ्यूचर इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल्स (एफआईसीवी) प्रोजेक्ट में इजरायल को भी शामिल किया जा सकता है।












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