थाईलैंड के PM ने की हिंदू धर्म की सराहना, बोले- दुनिया को शांति चाहिए तो इसके मूल्यों को अपनाना होगा
थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिनी के हिंदू धर्म को लेकर दिए गए बयान की काफी चर्चा हो रही है। थाई पीएम का कहना है कि दुनिया में अगर शांति चाहिए तो उन्हें हिन्दू मूल्यों को अपनाना होगा।
थाई पीएम थाविसिनी का मानना है कि हिन्दू धर्म के उच्च आदर्शों पर चलकर ही दुनिया में शांति स्थापना की जा सकती है। प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिनी ने तीसरी विश्व हिन्दू कांग्रेस में कहा कि अशांति से जूझ रही दुनिया को अहिंसा, सत्य, सहिष्णुता और सद्भाव के हिंदू मूल्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए, तभी विश्व में शांति स्थापित होगी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, थाईलैंड प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदू धर्म के सिद्धांतों और मूल्यों पर आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस की मेजबानी करना हमारे देश के लिए सम्मान की बात है। विश्व में हिन्दुओं की एक प्रगतिशील और प्रतिभासंपन्न समाज के रूप में पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से ही इस भव्य सम्मेलन का शुभारंभ हुआ है।
थाई पीएम ने कहा कि थाईलैंड की भारत से भौगोलिक दूरी जो भी हो लेकिन हिन्दू धर्म के सत्य और सहिष्णुता के सिद्धांतों का हमेशा से आदर रहा है। इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया भर के हिन्दुओं को एक-दूसरे से जुड़ने की अपील की और कहा कि भारत अन्य देशों को खुशी और संतुष्टि प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगा।
भागवत ने कहा कि दुनिया ने भौतिकवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद के कई प्रयोग किए हैं मगर इससे उन्हें संतुष्टि हासिल नहीं हो पाई है। कोविड के बाद दुनिया ने इस पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है। आज दुनिया लड़खड़ा रही है और ऐसा लगता है कि सभी इस बात पर एकमत हैं कि भारत रास्ता देगा।
भागवत ने कहा कि हिन्दुओं को एक साथ आकर काम करके वसुधैव कुटुंबकम की भावना को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें हर हिन्दू तक पहुंचना है और उनसे जुड़ना है और हिन्दू मिलकर दुनिया में हर किसी को जोड़ेंगे।
भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे हिन्दू अधिक संख्या में जुड़े हैं दुनिया से जुड़ने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। भागवत ने कहा कि निस्वार्थ सेवा के मामले में हम दुनिया भर में आगे हैं। यह हमारी परंपरा और मूल्यों में है।
आपको बता दें कि थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड हिन्दू कांग्रेस सम्मेलन में दुनियाभर के 61 देशों से आमंत्रित 2,200 से ज्यादा प्रतिनिधि एकत्र हुए हैं। यह सभी शिक्षा, अर्थतंत्र, अकेडेमिक, रिसर्च एंड डेवल्पमेंट, मीडिया और राजनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले हैं। इनमें से करीब 25 देशों के सांसद एवं मंत्री भी शामिल हैं।












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