पन्नून, मुसलमान, CAA.. लोकसभा चुनाव के बीच मोदी सरकार के खिलाफ 5 प्रोपेगेंडा, अमेरिका का खेल क्या है?
Inda-US News: भारत में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं और इस बीच अमेरिका से भारत के खिलाफ एक के बाद एक मामले उछाले जा रहे हैं। ताजा ताजा भारत के खिलाफ जो मामला अमेरिकी मीडिया में छपा है, उसमें मोदी सरकार के उस अधिकारी के नाम का खुलासा किया गया है, जो कथित तौर पर खालिस्तानी आतंकवादी पन्नून की हत्या की साजिश में शामिल था।
हालांकि, भारत ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया, लेकिन इस वक्त जब चुनाव चल रहे हैं, तो भारत के खिलाफ अचानक ऐसे ऐसे रिपोर्ट क्यों उछाले जा रहे हैं.. आइये उन 5 घटनाओं को जानते हैं, जो मोदी सरकार को 'बदनाम' करने के लिए अमेरिका मीडिया अब तक छाप चुका है।

1- 20 अप्रैल 2024, पन्नून को लेकर भारतीय अधिकारी पर आरोप
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने उस अधिकारी का नाम विक्रम यादव बताया, और भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को वाशिंगटन पोस्ट की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के खिलाफ कथित असफल हत्या के प्रयास में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक अधिकारी की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि रॉ अधिकारी विक्रम यादव ने सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कानूनी वकील गुरपतवंत सिंह पन्नून को खत्म करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में कहा गया है, "अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया है, कि पन्नुन को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन को उस समय के रॉ प्रमुख सामंत गोयल ने मंजूरी दी थी।"
2- 26 अप्रैल 2024, मानवाधिकार पर ज्ञान
भारत ने मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाने वाले अमेरिकी विदेश विभाग की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया, कि यह रिपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में अमेरिका की "गहरी पक्षपातपूर्ण और खराब समझ को दर्शाती है"। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने की कोशिश की गई थी और आरोप लगाया गया था, भारत में मुसलमानों का प्रताड़ित किया जाता है।
3- 24 अप्रैल 2024, भारत के चुनाव पर टिप्पणी
अमेरिकी मीडिया में भारत में चुनाव को लेकर एक के बाद एक रिपोर्ट छप रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है, कि भारत में चुनावों में धांधली हो सकती है। इसके अलावा भी कई तरह के झूठे दावे किए गये हैं। जिनको लेकर भारत के विदेश मंत्री स जयशंकर ने भारत की अनुचित आलोचना पर पश्चिमी मीडिया की आलोचना करते हुए कहा, कि पश्चिमी मीडिया भारत के चुनावों में "राजनीतिक खिलाड़ी" के रूप में काम करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, कि "मुझे पश्चिमी प्रेस से बहुत शोर मिलता है। यदि वे हमारे लोकतंत्र की आलोचना करते हैं, तो इसका कारण यह नहीं है कि उनके पास जानकारी का अभाव है, ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे भी हमारे चुनाव में राजनीतिक खिलाड़ी हैं।" आपको बता दें, कि अमेरिकी मीडिया के एक रिपोर्ट में ये तक कहा गया है, कि इतनी गर्मी में भारत में चुनाव क्यों हो रहे हैं।
4- 28 मार्च 2024, केजरीवाल की गिरफ्तारी पर टिप्पणी
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने चौधरी बनने की कोशिश की थी और अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था, कि वो केजरीवाल की गिरफ्तारी पर नजर रख रहा है। जिसपर भारत ने अमेरिकी विदेश विभाग की टिप्पणी को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया और नई दिल्ली में अमेरिका के डिप्टी एंबेसडर को तलब भी किया था।
5- 15 मार्च 2024, CAA पर बोला अमेरिका
अमेरिका ने भारत के 2019-नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर चिंता जताई थी, जिसपर करारा जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, कि 2019 का नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) भारत का आंतरिक मामला हैस जो देश की समावेशी परंपरा के अनुरूप है, और भारत ने अमेरिकी चिंताओं को "गलत, गलत सूचना पर आधारित और अनुचित" बताया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों के सताए हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं। अमेरिका ने कहा था, कि वह भारत में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की अधिसूचना को लेकर चिंतित है और इसके कार्यान्वयन पर बारीकी से नजर रख रहा है।












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