वाट्सएप छोड़ तीन नये मैसेजिंग एप्स पर शिफ्ट हुए आतंकी, इन एप्स पर पहचान रहेगी गुप्त- खुलासा
पाकिस्तानी आतंकियों ने वाट्सएप और मैसेंजर का इस्तेमाल बंद कर तीन नये मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। आतंकियों को डर है कहीं वो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे ना चढ़ जाएं
Terrorist quit WhatsApp: नई दिल्ली: भारतीय सैनिकों (Indian Army) के रडार में आने से बचने के लिए पाकिस्तानी आतंकियों (Pakistani Terrorist) ने अब वाट्सएप (Whatsapp) का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। वाट्सएप की जगह पाकिस्तानी आतंकियों ने एक दूसरे से बातचीत करने के लिए या संपर्क साधने के लिए तीन नये मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। ये खुलासा तब हुआ है, जब पिछले हफ्ते भारतीय सेना ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था और उनके मोबाइल फोन की जांच की गई थी।

वाट्सएप चैट में पकड़े जाने का डर
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी आतंकियों को डर है कि वाट्सएप का इस्तेमाल करने पर वो पकड़ लिए जाएंगे। साथ ही उनकी बातचीत को सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा क्रैक कर लिया जाएगा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब आतंकियों को कई मदद मिलने बंद हो गये हैं, खासकर उन्हें इंटरनेट का स्पीड नहीं मिल पाता है। जिसकी वजह से वो वाट्सएप या फेसबुक मैसेंजर पर बात नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में पाकिस्तानी आतंकियों ने तीन नये मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल आपस में संपर्क स्थापित करने के लिए करना शुरू किया है।

तुर्की के मैसेजिंग एप का इस्तेमाल
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि अब पाकिस्तानी आतंकियों ने तीन नये मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल बातचीत करने के लिए शुरू किया है। जिनमें एक मैसेजिंग एप तुर्की का बनाया हुआ है। सुरक्षा के लिहाज से अभी उन तीनों मोबाइल एप्लिकेशन का नाम सेना ने छिपा कर रखा है। बताया जा रहा है कि एक मोबाइल मैसेजिंग एप्लिकेशन तुर्की का तो दूसरा मैसेज एप अमेरिका में डेवलप किया गया है, जबकि तीसरा यूरोप में डेपलप किया गया है।
कम इंटरनेट स्पीड में भी अच्छा काम
भारतीय सेना ने खुलासा किया है पिछले दिनों मारे गये या फिर पकड़े गये कई आतंकियों के मोबाइल में ये तीन मैसेजिंग एप्लिकेशन मिले हैं। इन मैसेजिंग एप्स की खासियत ये है कि ये बेहद कम इंटरनेट स्पीड में चल सकते हैं। यानि 2G इंटरनेट मिले तब भी इनके जरिए आसानी से बातचीत की जा सकती है। वहीं, खुलासा ये भी हुआ है इन मैसेजिंग एप्स पर बातचीच एनक्रिप्सन और डिक्रिप्शन सीधे मोबाइल डिवाइस पर ही हो जाते हैं, लिहाजा इसे क्रैक करना भी आसान नहीं है।
ये तीनों मोबाइल एप्लिकेशन RSA 2048 एल्गोरिदम पर काम करते हैं। जिसे सबसे सिक्योर माना जाता है। RSA अमेरिकन नेटवर्क सिक्योरिटी एंड ऑथेंटिकेशन कंपनी को कहा जाता है, जिसकी स्थापना 1982 में की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि घाटी में पाकिस्तान से आने वाले ज्यादातर आतंकियों ने अब इन्हीं तीन मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
बिना नंबर और बिना e-mail ID के काम
सुरक्षा एजेंसियां उस वक्त हैरान हो गईं जब पता चला कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होने वाले एक मैसेजिंग एप को फोन में इंस्टाल करने से लेकर बात करने तक के बीच किसी फोन नंबर या ई-मेल आईडी की भी जरूरत नहीं पड़ती है। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि इस मैसेजिंग एप्लिकेशन से पाकिस्तानी आतंकी घाटी में युवाओं को बहकाने का काम करते हैं। अब सुरक्षा एजेंसियां इन मोबाइल एप्लिकेशन्स पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में काम कर रही है।












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