कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों से पाकिस्तानी अधिकारियों की गलबहियां, जस्टिन ट्रूडो पर गंभीर सवाल
कनाडा लगातार खालिस्तान समर्थकों का महफूज अड्डा बनता जा रहा है और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सरकार ने 16 सितंबर को आधिकारिक तौर पर भारत को सूचित किया था, कि वह तथाकथित जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देती है।
टोरंटो, सितंबर 23: कनाडा में खालिस्तानी ग्रुप लगातार एक्टिव हो रहे हैं और पाकिस्तान उन्हें लगातार समर्थन दे रहा है, ताकि भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा सके। कनाडा में पिछले हफ्ते खालिस्तान समर्थकों ने जनमत संग्रह का आयोजन किया गया था और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उससे पहले पाकिस्तान के महावाणिज्यदूत जनबाज खान ने खालिस्तानी नेताओं के साथ बैठक की थी। पाकिस्तानी अधिकारी ने खालिस्तानी नेताओं के साथ वैंकूवर में दो गुरुद्वारों का दौरा किया था और बाढ़ की वजह से परेशान पाकिस्तान के लिए चंदा भी जुटाई थी।

कनाडा सरकार पर सवाल
कनाडा लगातार खालिस्तान समर्थकों का महफूज अड्डा बनता जा रहा है और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सरकार ने 16 सितंबर को आधिकारिक तौर पर भारत को सूचित किया था, कि वह तथाकथित जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देती है और भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करती है, लेकिन, तथ्य यह है कि वोटबैंक की मजबूरियों के कारण कनाडा सरकार ने भारत विरोधी तत्वों को रोकने के लिए काफी कम कोशिशें की हैं। कनाडा में कट्टरपंथी सिख समुदाय के बीच भारत विरोधी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है और ऐसे तत्वों पर कनाडा की सरकार वोट बैंक के चलते कोई एक्शन नहीं लेती है। वहीं, भारत सरकार ने उच्चतम राजनीतिक और साथ ही संस्थागत सुरक्षा स्तरों पर कनाडा सरकार को मौखिक और लिखित रूप में भारतीय गुस्से के बारे में बताया है।

पाकिस्तान करता है प्रायोजित
खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख, निज्जर, जो अमेरिका स्थित अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा संचालित 'सिख फॉर जस्टिस' प्लेटफॉर्म का प्रतिनिधि है, उससे ब्रैम्पटन में आयोजित खालिस्तान जनमत संग्रह के दिन पाकिस्तानी राजनियक से मुलाकात इस बात की पुष्टि करती है कि पाकिस्तानी डीप स्टेट खालिस्तानी आतंकियों का समर्थन करता है, ताकि भारत में अशांति की स्थिति पैदा की जा सके। अब यह दशकों की बात हो गई है, कि पाकिस्तानी आईएसआई इस सिख अलगाववादी आंदोलन के पीछे मुख्य खिलाड़ी है, जिसमें भारत के कई मोस्ट वांटेड सिख आतंकवादी लाहौर में शरण ले रहे हैं। पिछले दशकों में, भारत ने पाकिस्तान में शरण लिए हुए सिख आतंकवादियों और गैंगस्टरों को उनके मूल देश वापस भेजने के लिए इस्लामाबाद को डोजियर सौंपा है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। निज्जर के साथ एक अन्य सहयोगी मोनिंदर सिंह बॉयल,जो दशमेश दरबार का पूर्व अध्यक्ष है, रिपुदमन सिंह मलिक के खिलाफ अभियान शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, जिन्हें 2005 एयर इंडिया कनिष्क बम विस्फोट मामले में बरी कर दिया गया था। मलिक की 24 जुलाई 2022 को सरे में हत्या कर दी गई थी।

मोदी सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया
मोदी सरकार ने इन घटनाओं से आंख न मूंदने का फैसला किया है और वह दोनों देशों में इन भारत विरोधी घटनाओं का जवाब देगी। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने यूके और कनाडा में इन घटनाओं का कड़ा संज्ञान लिया है और भारत की प्रतिक्रिया इसके अनुरूप ही होगी। एक तरफ जहां कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में रूस के द्वारा शुरू कराए जा रहे 'जनमत संग्रह' की कड़ी निंदा की है, वहीं, उन्होंने 18 सितंबर को पर ब्रैम्पटन, ओंटारियो में प्रतिबंधित 'सिख फॉर जस्टिस' संगठन द्वारा कराए गए जनमत संग्रह पर आंखें मूंद ली हैं।

जनमत संग्रह रोकने भारत ने भेजा था संदेश
इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने ग्लोबल अफेयर्स कनाडा को अगस्त से सितंबर के बीच 3 राजनयिक संदेश भेजे और कनाडा की ट्रूडो सरकार से अवैध जनमत संग्रह को रोकने के लिए कहा था। ट्रूडो सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कनाडा में व्यक्तियों को इकट्ठा होने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है जब तक कि वे शांतिपूर्वक और कानूनी रूप से ऐसा करते हैं। इसके बाद कनाडा की प्रतिक्रिया में यह भी कहा गया है कि वे ओंटारियो के ब्रैम्पटन में स्वामीनारायण मंदिर में हाल ही में हुई बर्बरता से व्यथित हैं।












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