Pakistan के लिए काल का साल बना 2025! सैकड़ों फौजियों की मौत, शरीफ ने की दबाने की कोशिश लेकिन बाहर आई रिपोर्ट
Pakistan के लिए 2025 इस पूरे दशक का सबसे बुरा साल साबित हुआ। जान और माल की हानि में पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तानी सेना ने नए रिकॉर्ड बनाए। दरअसल पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की एक नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि इस साल combat से जुड़ी मौतों में पिछले साल(2024) की तुलना में 74 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हिंसा में तेज उछाल
इस्लामाबाद स्थित इस थिंक-टैंक ने 7 जनवरी को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में हिंसा न सिर्फ पैमाने में बढ़ी, बल्कि उसकी घातक क्षमता में भी साफ इजाफा देखने को मिला। PICSS की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कुल 3,413 संघर्ष-संबंधित मौतें दर्ज की गईं। इसके मुकाबले पिछले वर्ष यह संख्या 1,950 थी, यानी एक ही साल में मौतों का आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया। कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट को दबाने के लिए शरीफ सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया था।

580 नागरिकों से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत
रिपोर्ट में बताया गया कि 667 सुरक्षाकर्मी मारे गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा 2011 के बाद से सबसे ज्यादा वार्षिक संख्या मानी जा रही है। नागरिकों की मौतों का आंकड़ा भी चिंताजनक रहा। 2025 में 580 नागरिक मारे गए, जो 2015 के बाद सबसे अधिक है। इसके अलावा, सरकार समर्थक शांति समितियों के 28 सदस्यों की भी मौत हुई।
आधे से ज्यादा मौतें आतंकवादियों की
कुल 3,413 मौतों में से 2,138 उग्रवादियों की थीं, यानी रिपोर्ट की गई कुल मौतों का आधे से ज्यादा हिस्सा। रिपोर्ट के अनुसार, उग्रवादियों की मौतों में 124 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। PICSS ने उग्रवादियों की मौतों में तेज बढ़ोतरी का श्रेय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए "विस्तारित आतंकवाद-विरोधी अभियानों" को दिया है। हाल के सालों में TTP ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर हमले काफी तेज कर दिए हैं।
2014 के बाद सबसे ज्यादा आतंकी हमले
रिपोर्ट में कहा गया है- "2025 में उग्रवादी परिदृश्य विखंडन, आपसी प्रतिस्पर्धा और सामरिक नवाचार से भरा रहा।" रिपोर्ट आगे बताती है कि 2014 के बाद से 2025 में आतंकी हमले अपने सबसे ऊंचे वार्षिक स्तर पर पहुंच गए। PICSS के अनुसार, 2025 में आत्मघाती हमलों और छोटे ड्रोन के इस्तेमाल में साफ बढ़ोतरी देखी गई, जो आतंकवादियों की बदलती रणनीति को दर्शाता है।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी हमलों में मौतों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
1,066 आतंकी हमले, 26 आत्मघाती हमले,
रिपोर्ट बताती है कि 2025 में कम से कम 1,066 उग्रवादी हमले हुए। इनमें 26 आत्मघाती हमले शामिल थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक हैं। PICSS के मुताबिक, ज्यादातर हिंसा अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा (उसके आदिवासी जिले सहित) और संसाधन-समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान
में केंद्रित रही।
अफगानिस्तान सीमा से जुड़े हैं दोनों प्रांत
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान दोनों ही अफगानिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैं, जहां फिलहाल अफगान तालिबान का नियंत्रण है। इससे सीमा पार उग्रवाद को लेकर पाकिस्तान की चिंता बढ़ी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा हताहत दर्ज किए गए। यह वहां सक्रिय बलूच अलगाववादी समूहों की बढ़ी हुई गतिविधियों और बदली हुई रणनीति को दिखाता है।
अमेरिकी हथियार भी बने वजह
हिंसा में बढ़ोतरी का एक कारण यह भी बताया गया है कि 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की जल्दबाजी में वापसी के बाद वहां छोड़े गए अमेरिकी सैन्य उपकरण अब उग्रवादियों के हाथ लग रहे हैं, जिससे उनकी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ गई है।
सस्ते ड्रोन, बड़ा खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि उग्रवादी अब "वाणिज्यिक क्वाडकॉप्टर ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और आदिवासी जिलों में। यह कम लागत वाली लेकिन दूर से हमला करने वाली तकनीक है, जो पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को और जटिल बनाती है और नागरिकों को ज्यादा खतरे में डालती है।
काबुल से पाकिस्तान की सख्त मांग
इस्लामाबाद और रावलपिंडी ने काबुल से मांग की है कि वह TTP और अन्य उग्रवादी संगठनों को अपनी धरती से काम करने की अनुमति देना बंद करे। पाकिस्तान का आरोप है कि ये समूह अफगानिस्तान से पाकिस्तान विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं।
तालिबान ने आरोप खारिज किए
अफगानिस्तान में सत्ता में बैठे तालिबान ने पाकिस्तान के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और किसी भी तरह के समर्थन से इनकार किया है।
आर्मी का दावा: 67,023 ऑपरेशन
यह रिपोर्ट पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के बयान के लगभग एक महीने बाद आई है। उन्होंने कहा था कि 2025 में सुरक्षा बलों ने 67,023 खुफिया-आधारित अभियान चलाए। चौधरी ने दावा किया था कि इन अभियानों में 136 अफगान नागरिकों सहित कुल 1,873 उग्रवादियों को बेअसर किया गया। लेकिन रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कहती है।
भारत का स्टेटमेंट किया कॉपी
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा की स्थिति पर बोलते हुए और काबुल पर सीमा पार उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए चौधरी ने कहा, "खून और व्यवसाय एक साथ नहीं चल सकते।" हालांकि ये बात भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान से कही थी जिसे चौधरी ने कॉपी कर लिया। अक्टूबर में सीमा पर हुई हिंसा के बाद पाकिस्तान ने व्यापार और लोगों की आवाजाही के लिए कई सीमा चौकियां बंद कर दी थीं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया।
व्यापार के लिए बातचीत फिर शुरू
हालांकि, ताजा घटनाक्रम में दोनों देश सोमवार को एक संयुक्त समिति बनाने पर सहमत हुए हैं, जो सीमा को फिर से व्यापार के लिए खोलने पर बातचीत करेगी। अब देखना होगा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बातचीत हालात को संभाल पाती है या नहीं।
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