तहरीक-ए-तालिबान करवाएगा पाकिस्तान-तालिबान में जंग? बलूचिस्तान में PAK सेना के खिलाफ खोला नया फ्रंट
Pakistan vs Taliban on Tehreek-i-Taliban: पाकिस्तान और तालिबान पिछले एक महीने से लगातार एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं और दोनों के बीच का ये विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। तालिबान ने साफ कर दिया है, कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी), पाकिस्तान की समस्या है और वो खुद इससे निपटे।
जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासकों को धमकी दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा है, कि अगर तालिबान, टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो पाकिस्तान अपनी रक्षा का अधिकार रखता है। जबकि, तालिबान पहले ही कह चुका है, कि अगर अफगानिस्तान में घुसने की कोशिश की गई, तो तालिबान उसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

पाकिस्तान-तालिबान में बढ़ता टेंशन
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को "पड़ोसी होने का कर्तव्य पूरा नहीं करने" और दोहा समझौते का पालन करने में नाकाम रहने के लिए अफगानिस्तान की आलोचना की।
रक्षा मंत्री ने ट्विटर पर लिखा, कि "पिछले 40/50 वर्षों में 50/60 लाख अफगानों ने सभी अधिकारों के साथ पाकिस्तान में शरण मांगी है। इसके विपरीत, पाकिस्तानियों का खून बहाने वाले आतंकवादियों के पास अफगान धरती पर सुरक्षित पनाहगाह हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, कि यह स्थिति अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती है और उन्होंने पाकिस्तान की रक्षा के लिए अपना संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने तालिबान को चेतावनी देते हुए कहा, कि "पाकिस्तान अपनी ज़मीन और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने सभी संसाधनों का उपयोग करेगा, इंशा अल्लाह।"
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी उस वक्त आई है, जब पाकिस्तान सेना ने एक बयान में कहा है, कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लिए अफगानिस्तान की धरती सुरक्षित ठिकाना है और पाकिस्तानी सेना, उनपर कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर का ये बयान उस वक्त आया है, जब टीटीपी के हमले में अफगान सीमा से लगते क्वेटा गैरीसन में पाकिस्तानी सेना के 9 जवान मारे गये हैं।

जबकि, पिछले हफ्ते ही तालिबान के प्रवक्त सुहैल शाहीन ने एक इंटरव्यू में खुले तौर पर कहा, कि टीटीपी का अफगानिस्तान में कोई अस्तित्व नहीं है, और टीटीपी पाकिस्तान की समस्या है और वो खुद इस समस्या से निपटे। सुहैल शाहीन ने कहा, कि अफगानिस्तान की धरती पर टीटीपी का कोई निशान नहीं है और उन्होंने पाकिस्तान के आरोपों को झूठा करार दिया है।
जबकि दूसरी तरफ, टीटीपी के आतंकियों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दूसरा फ्रंट खोल दिया है।
बलूचिस्तान में टीटीपी ने खोला दूसरा फ्रंट
बलूचिस्तान के झोब शहर में भीषण आतंकवादी हमला किया गया है, जिसमें पाकिस्तानी सेना ने अपने नौ सैनिकों को खो दिया है। ये हमला बलूचिस्तान के झोब शहर में किया गया है और पिछले कुछ महीनों से इस क्षेत्र में एक के बाद एक कई आतंकी हमले होने लगे हैं। इस क्षेत्र को पहले आतंकवाद मुक्त माना जाता था।
यह आतंकी हमला, उस उग्रवाद से अलग घटना है, जो प्रांत के बलूच-बहुल क्षेत्रों को प्रभावित करता है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उसकी शाखाएं से जुड़े संगठन अब बलूचिस्तान प्रांत के उत्तरी हिस्सों, जो पारंपरिक रूप से पख्तून-बहुल क्षेत्र माने जाने वाले - उन क्षेत्रों में सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ अपने हमले तेज कर रहे हैं।
हालांकि ये क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा के काफी करीब हैं और दक्षिण वजीरिस्तान जैसे आदिवासी जिलों के भी करीब हैं, लेकिन अतीत में ये आतंकवादी गतिविधियों से तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित रहे थे।
क्वेटा स्थित एक अखबार के संपादक आसिफ बलूच का मानना है, कि अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ दो मोर्चे खुल गए हैं, यानी टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ बलूचिस्तान के पख्तून बेल्ट में भी अपने हमले तेज कर दिए हैं।
उन्होंने कहा, कि "बलूच हिस्सों में सुरक्षा की स्थिति हमेशा गंभीर रही है, लेकिन पख्तून बेल्ट ऐसे समूहों के निशाने पर नहीं रहे है।"
हाल के महीनों में, टीटीपी ने बलूची भाषा में भी वीडियो जारी करना शुरू कर दिया है और माना जा रहा है, कि टीटीपी बलूचिस्तान प्रांत के बलूच-बहुल क्षेत्रों में पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है।
टीपीपी के वीडियो में उन लापता बलूचों की बात की गई है, जिन्हें गायब करने का आरोप पाकिस्तान की सेना पर है। वीडियो में लापता लोगों के परिजनों को इंसाफ दिलाने की बात कही गई है। वीडियो में उनके साथ संवेदना जताई गई है, जिससे साबित होता है, कि टीटीपी के लोग अब बलूचों में अपना समर्थन हासिल कर रहे हैं।
विश्लेषक मुहम्मद अमीर राणा के मुताबिक, टीटीपी का पारंपरिक रूप से पख्तून बेल्ट में समर्थन आधार रहा है, यही वजह है कि वे इन हिस्सों में हमले करने में सक्षम थे। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अगर बलूचों में भी टीटीपी की पकड़ बन जाती है, तो ये पाकिस्तान के लिए काफी खतरनाक होगा।
टीटीपी की रणनीति कैसे बदल गई है?
टीटीपी पहले पाकिस्तान की पुलिस को निशाना बनाती थी, लेकिन अब उन्होंने पाकिस्तानी सेना और उनके शिविरों पर डायरेक्ट हमला करना शुरू कर दिया है। पहले टीटीपी, आम लोगों पर हमले करती थी, जो उन्होंने पूरी तरह से बंद कर दिया है। टीटीपी के हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सिर्फ सैनिकों और पुलिस फोर्स के खिलाफ हो रहे हैं।
इसके अलावा, टीटीपी ने पाकिस्तान में अपने आप को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ समय पहले टीटीपी ने जो वीडियो जारी किया था, उसमें दावा किया गया था, कि बलूच-बहुल क्षेत्र उनके कलात-मकरान चैप्टर का हिस्सा है, जबकि पख्तून-बहुल हिस्से ज़ोब चैप्टर के अंतर्गत आते हैं।
टीटीपी ने इसके लिए एक नये संगठन के नाम की घोषणा की है, जिसका नाम तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान है, और इसी संगठन पर जोब में सैनिकों पर हमला करने का आरोप है, जिसमें 9 सैनिक मारे गये हैं। विशेषज्ञों का मानना है, कि यह टीटीपी या उसके संबद्ध संगठनों में से एक के लिए "कवर नाम" है।
तालिबान के निर्माण में खाद-बीज डालने वाला पाकिस्तान, आज अपने कर्मों की सजा भुगत रहा है और बहुत जल्द, बलूचिस्तान में स्थिति बेकाबू हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तान में हमला कर टीटीपी के आतंकियों के लिए अफगानिस्तान में छिपना काफी आसान है।












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